मुख्यमंत्री सुनिश्चित करना चाहते हैं, कन्यादान योजना का लाभ गरीब परिवारों के बेटियों को मिले

कन्यादान योजना

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के बजट राशि का शत प्रतिशत खर्च करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया

स्त्रियों को ग़ुलाम बनाने और तमाम तरह के बर्बर अमानवीय व्यवहार का शिकार बनाने का चलन हमारे देश व समाज में आज भी मौजूद है। आपने मध्यकाल में दासप्रथा, सतीप्रथा या धार्मिक कर्मकाण्डों के चलते स्त्रियों की बलि चढ़ाने या मार देने के बारे में सुना या पढ़ा जरूर होगा। मगर आज भी बाल-विवाह के नाम पर लाखों स्त्रियों की ज़िन्दगी की बलि दी जाती है। भारत स्त्रियों को सामन्ती मूल्य-मान्यताओं में बाँधने में सबसे आगे हैं। यूनीसेफ़ (यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेन एमरजंसी फण्ड) की रिपोर्ट के मुताबिक बाल विवाह के मामले में भारत का दूसरा स्थान है।

ऐसे में झारखंड सरकार द्वारा चलाए जा रहे मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की प्रासंगिकता को समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने इस योजना का लाभ गरीबी रेखा से नीचे गुजर करने वाले परिवारों के बच्चियों को देना चाहते हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने जागरूकता फैलाने की ओर कदम बढ़ाया दिया है। उन्होंने ऐसे पात्र परिवारों की किशोरियों का एक डाटा भी तैयार करने का आदेश पारित किया है। क्मुयोंकि, ख्यमंत्री का मानना है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजर-बसर करने वाले परिवारों की बच्चियों को शादी के समय सहायता राशि उपलब्ध कराना न केवल पुण्य का कार्य है, लोकतंत्र की जरुरत भी है। 

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के बजट राशि का शत प्रतिशत खर्च करने का निर्देश

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के बजट राशि का शत प्रतिशत खर्च करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने विभागीय पदाधिकारियों को दिया है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत झारखंड राज्य अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों की बेटियों को, उनके विवाह के अवसर पर 30 हजार रुपए आर्थिक सहायता कन्या के बचत खाता में प्रदान की जाती है। महिला सशक्तिकरण बालिका शिक्षा पर जोर एवं बाल विवाह कुप्रथा का अंत के उद्देश्य से मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना के स्थान पर मुख्यमंत्री सुकन्या योजना जनवरी 2019 से प्रारंभ की गई है। 

डायन प्रथा उन्मूलन पर ज्यादा फोकस रखें

मुख्यमंत्री ने डायनप्रथा उन्मूलन पर ज्यादा फोकस करते हुए, इस कुप्रथा को जड़ से ख़त्म कर जोर दिया है। जिस क्षेत्र में पिछले 19 सालों में डायन-बिसाइन की ज्यादा घटनाएं हुई हैं उनका सर्वे तथा उन क्षेत्रों पर व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने का निर्देश दिया गया है। ज्ञात हो कि हेमंत सरकार दहेजप्रथा का अंत एवं विवाह में फ़िज़ूलखर्ची पर लगाम लगाने के उद्देश्य से योजना अंतर्गत “सामूहिक विवाह कार्यक्रम” भी संचालित किया जाता है। साथ ही अंतिम संस्कार के लिए भी अनुदान दिया जाता है।

बाल संरक्षण योजना के तहत अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए होगा मॉडल तैयार 

मुख्यमंत्री द्वारा बाल संरक्षण योजना तहत एक ऐसा मॉडल तैयार करने का आदेश दिया है, जिसके तहत अनाथ बच्चों की परवरिश उसी गांव की विधवा बहनों तथा जो परिवार में अकेले हैं उन्हें जोडा जाएगा। इस मॉडल के पीछे हेमंत सरकार का मंशा है कि वह अनाथ बच्चों को एक पारिवारिक माहौल मुहैया कराना चाहती है। जिससे एक तरफ बच्चों की परवरिश अच्छी हो सकेगी और दूसरी तरफ विधवा बहनों तथा परिवार में अकेले रहने वालों को भी सामाजिक सुरक्षा मुहेया हो पायेगा।

सामाजिक सुरक्षा के मद्देनज़र हेमंत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं

सामाजिक सुरक्षा सहायता कार्यक्रम के तहत सरकाए की योजनाएं। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अंतर्गत गठित बाल देखरेख संस्थाएं, प्रायोजन एवं पालन पोषण कार्यक्रम के अंत तक स्थिति, तेजस्विनी परियोजना, राष्ट्रीय परिवार हितलाभ योजना, कंबल एवं वस्त्र वितरण योजना, उज्वला योजना, स्वाधार गृह योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, आंगनबाड़ी सेवाएं के लिए 15वें वित्त आयोग का अनुदान, केंद्रीय योजनागत योजना, नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम हेतु कार्यक्रम, वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना।

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