रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड

बीजेपी के रघुवर सरकार की गलती से डीवीसी पर बढ़ता गया कर्ज हुआ 5608.32 करोड़, झारखंड को केंद्र से मिलना है करीब 42,500 करोड़।

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केंद्र पर कोल इंडिया पर जमीन के मुआवजे का 40,000 और जीएसटी का 2500 करोड़ बाकी, इसे न देकर केंद्र कर रहा तानाशाही

डीवीसी से खरीदी बिजली के एवज में बकाया राशि को अगले 15 दिनों में भुगतान करने का झारखंड सरकार को नोटिस

रांची। केंद्र की सत्ता में बैठी बीजेपी सरकार अपने जिस कार्यशैली के लिए बदनाम थी, अब वह खुलकर सामने आने लगी है। मोदी सरकार के बारे में कहा जाता है कि कोई भी राज्य सरकार अगर अच्छा काम कर रही है, तो उसे गिराने या परेशान करने के लिए अपनी शक्तियों का धौंस दिखाये। शायद इस बार केंद्र अपनी इस शक्ति का प्रयोग हेमंत सरकार पर कर रहा है। सत्ता जाने का गम क्या होता है वह इससे समझा जा सकता है कि अब केंद्र ने झारखंड सरकार को एक नोटिस भेजा है। नोटिस डीवीसी से खरीदी गयी बिजली के एवज में बकाया 5608.32 करोड़ रुपये को लेकर है। इसमें कहा गया है कि अगले 15 दिन में भुगतान नहीं करने पर केंद्र राज्य सरकार के आरबीआइ खाते से इस बकाये रकम को 4 किस्तों में काटेगा। किस्त की पहली राशि 1417.50 करोड़ रुपये होगी, जो कि अक्तूबर माह से ली जायेगी। लेकिन मोदी सरकार को यह समझना चाहिए था कि जिस तानाशाही से वह हेमंत सरकार को चेतावनी दे रही है, उससे पहले वह झारखंडी जनता के हक के 42,500 करोड़ रूपये का तत्काल भुगतान करें। 42,500 करोड़ रूपये की राशि में कोल इंडिया पर जमीन के एवज में मुआवजे का 40,000 करोड़ और जीएसटी का 2,500 करोड़ रूपये शामिल है।

गलती की सजा झारखंड वासी और हेमंत सरकार क्यों भुगते, 31 मार्च 2017 के बाद रघुवर सरकार ने ही नहीं किया भुगतान

आज डीवीसी के जिस बकाया राशि को लेकर केंद्र सरकार हेमंत सरकार पर प्रेशर पॉलिटिक्स खेल रही है, उसका एक मात्र कारण पूर्व की बीजेपी की रघुवर सरकार है। बिजली विभाग के अधिकारियों की मानें, तो जेबीवीएनएल की तरफ से 31 मार्च 2017 को 4780 करोड़ रुपये डीवीसी को दी गयी थी। इसके बाद डीवीसी को बकाया राशि करीब-करीब शून्य हो गया था। लेकिन 31 मार्च 2017 के बाद रघुवर सरकार की तरफ से 250-300 करोड़ के बिजली बिल के एवज में केवल 150-200 करोड़ रूपये ही डीवीसी को भुगतान किया गया। किसी-किसी महीने ये भुगतान भी जेबीवीएनएल की तरफ से नहीं किया गया. जिससे बकाये की राशि में इजाफा होने लगा।

केंद्र पर झारखंड का है करीब आठ गुणा यानी 42,500 करोड़ रूपये बकाया

केंद्र जिस तेवर से झारखंड सरकार को 5608.32 करोड़ रूपये भुगतान करने की चेतावनी दे रहा है, उसे समझना चाहिए था कि इससे करीब आठ गुणा तो केवल केंद्र को झारखंड को देना है. 42,500 करोड़ रूपये की इस राशि में कोल इंडिया पर जमीन मुआवजे के मद में करीब 40,000 करोड़ रूपये बकाया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 के तहत जीएसटी के मद से केंद्र को करीब 2500 करोड़ रूपये झारखंड को देना है। पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र से इस बकाये राशि की मांग कर चुके हैं। लेकिन केंद्र सरकार इसे देने पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। हेमंत ने यह भी कहा है कि झारखंडी जनता की इस बड़ी राशि को केंद्र नहीं देती है, तो सरकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेगी।

हेमंत ने पहले ही कहा है कि अपना अधिकार हम लड़कर लेंगे

केंद्र की मोदी सरकार अपनी ताकत का कितना भी गलत प्रयोग करें, लेकिन हेमंत सरकार इससे डरने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री ने कई बार यह बयान दिया है कि हम केंद्र से डरने वाले नहीं है। झारखंडी जनता के अधिकारों को हम लड़कर लेंगे। केंद्र पर बकाया 42,500 करोड़ रूपये झारखंड सरकार का हक है। पिछले दिनों जब राज्य सरकार ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और केंद्र पर दबाव बनाया तो बड़ी मुश्किल से 250 करोड़ ही मिला। बाकी राशि लेने के लिए झारखंड सरकार हर सीमा को पार करेगी। राज्य के हक-अधिकार के लिए हेमन्त सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

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