फिर बढ़ी हेमंत सोरेन की साख, अपील पर तमाम संगठनों ने दिया भारत बंद को समर्थन

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आपदा

फिर मजबूत हुई हेमंत सोरेन की साख, अपील पर तमाम संगठनों ने दिया भारत बंद को समर्थन, नहीं घटी कोई अप्रिय घटना

छठे दौर की वार्ता के ठीक पहले कार्यक्रम की सफलता ने केंद्र को डाला पसोपेश में

रांची। केंद्र सरकार के लाए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में देश के किसान संगठनों ने मंगलवार 8 दिसंम्बर को भारत बंद का आह्वाहन किया था। हेमंत सोरेन व झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार ने किसानों को देश का असल मालिक बताते हुए बंद को समर्थन दिया था। श्री सोरेन के अपील के मद्देनजर राज्य के कमोवेश तमाम संगठनों ने भारत बंद का समर्थन किया। इस दौरान किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। 

झारखंड की जनता ने अंहिसात्मक तरीके से इस काले कानून के विरोध में अपना विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़े, इसके लिए झारखंड पुलिस ने भी हर संभव तैयारी कर रखी थी। लेकिन पुलिस को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मसलन, झारखंड की जनता ने जिस प्रकार हेमंत सोरेन का साथ दिया, निश्चित रूप से माना जा सकता है कि राज्य मे उनकी साख और वृद्धि हुई है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में तो कमोवेश सभी लोगों ने स्वेच्छा से किसानों भाईयों के लिए अपने काम-काज को प्रभावित रखा। 

बीजेपी छोड़ तमाम राजनीतिक पार्टियों ने दिया हेमंत का साथ, बंद को सफल बनाने के लिए उतरे सड़कों पर

हेमंत सोरेन के अपील पर सुबह 10 बजे से ही नये कृषि कानून के विरोध में राजनीतिक और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतरे। उद्देश्य केवल एक था किसानों के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम को सफल बनाना। इस दौरान जेएमएम नेताओं ने ट्रैक्टर पर चलकर राजधानी के प्रमुख अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचे और किसान बिल का विरोध किया। उनका विरोध शांतिपूर्ण तरीकों से किया गया। 

कांग्रेस कोटे से मंत्री बादल पत्रलेख, ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी राजधानी के मेन रोड में पैदल मार्च कर किसान बिल पर विरोध जताया। महागठबंधन के एक अन्य सहयोगी राजद सहित वाम दल, डेली मार्केट इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन, फल मंडी विक्रेता संघ, डेली मार्केट टेड्रर एसोसिएशन, ट्रक एसोसिएशन व सभी संगठनों ने हेमंत की अपील पर साथ दिया। कमोवेश सभी का यही कहना था कि जब तक यह कानून नहीं बदलेगा तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

संसद से पास किये गये तीन कानून के विरोध में था भारत बंद

बता दें कि देश भर के किसान इस साल मानसून सत्र में पास किए गए तीन कृषि कानूनों पर नाराज हैं। वे चाहते हैं कि ये कानून रद्द कर दिए जाएं। हालांकि केंद्र सरकार कानून वापस लेने की जगह इस पर उचित संशोधन की बात कर रही है। वहीं किसान संगठन इस बात पर अडिग हैं कि वे कानून को रद्द करने से कम पर राजी नहीं होंगे। अबतक किसान और सरकार के बीच पांच दौर की वार्ता हो चुकी है और छठे दौर के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय है। इससे पहले किसानों के भारत बंद की सफलता ने केंद्र सरकार को पसोपेश में डाल दिया है।

MSP  लागू होने के साथ किसानों की यह हैं मांगे

पिछले 12 दिनों से सड़कों पर आंदोलनरत किसानों की मांग है कि 

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP हमेशा लागू रहे।
  • किसान चाहते हैं कि 21 फसलों को MSP का लाभ मिले। फिलहाल किसानों को सिर्फ गेहूं, धान और कपास पर ही MSP मिलती है।
  • किसानों की मांग है कि अगर कोई कृषक आत्महत्या कर लेता है तो उसके परिवार को केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मिले।
  • किसान चाहते हैं कि केंद्र द्वारा मानसून सत्र में पारित कराए गए तीनों कानून वापस लिए जाएं।
  • मांग है कि इस आंदोलन के दौरान जितने भी किसानों पर मामले दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।

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