झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत

हेमंत सरकार में झारखंड भी देश के साथ 72वें गणतंत्र दिवस पर मजबूती से ताल ठोकेगा

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युवा झारखंड सृजन के हवन की वेदी में ओच्छी राजनीति के सृजनकर्ताओं की मंशा को स्वाह करते हुए झारखंड बनाने में अहम भूमिका निभायें। क्योंकि 72वें गणतंत्र दिवस साक्ष्य होगा, बस अगले कदम पर सपनों का झारखंड है

झारखंड भी देश के साथ 72वें गणतंत्र दिवस की भावना को जीने को है। छोटानागपुर के पठार के नाम से जाना जाने वाला प्रदेश आदिवासियों व कई मूल-जातियों का संरक्षण व निवास क्षेत्र रहा है। यहां का अधिकतर क्षेत्र पठारीय होने के कारण अधिकाँश जमीनें कृषि योग्‍य नहीं रही, खनिज व प्राकृतिक सम्पदा से लबा-लब भरा है। खनिजों का दोहन अंग्रेजों के दौर से ही झारखंड का पहचान रहा। लेकिन अलग झारखंड के बाद राज्य की पहली भाजपा सरकार के दोहन को मुख्य नीतियों के मातहत कानून शामिल कर लिया गया। 

वनों पर पूरी तरह निर्भर आदिवासी-मूलवासियों से उस सरकार ने कहा कि औगोगिक घरानों के उद्योग धंधे शुरू होंगे, स्‍थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा। भूमि अधिग्रहण के एवज में मुआवज़े उनके जीवनस्‍तर में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। लेकिन चुनावी मांदर बजाकर हाशिये पर पड़े समाज में सपना जगाने वाले सारे वादे, लूट की डुगडुगी तले गुम हो गयी। जमीनें अधिग्रहित तो हुई, लेकिन मुआवजा और कल कारख़ानों में नौकरी के लिए वे तरसते रहे।

नीति आयोग की नजर में जिन पांच राज्यों के पिछड़ेपन ने देश के विकास का बेडागर्क कर रखा था, उसमे झारखंड का भी तो नाम था 

नीति आयोग की नजर में देश के जिन पांच राज्यों के पिछड़ेपन ने देश के विकास का बेडागर्क कर रखा था, उसमे झारखंड का भी तो नाम था। इस राज्य का मतलब पौने तीन करोड़ नागरिक। राजनीति लिहाज से एक महत्वपूर्ण राज्य तो औद्योगिक विकास के लिहाज से सबसे पिछड़ा। देश के टाप खनन और स्टील डस्ट्री से जुडे औगोगिक घराने के लिए सबसे ज्यादा लाभ वाला प्रदेश रहा। लेकिन, सबसे ज्यादा लूट की त्रासदी का गवाह भी यही प्रदेश बना। 

सबसे सस्ते मज़दूर प्रतिदिन यही मिलते हैं। सबसे ज्यादा मनरेगा मज़दूर यही राज्य सिमटे हुये है। पलायन का दर्द भी यही राज्य झेलती रही। राज्य का सच यही नहीं रुकता सबसे अधिक बेरोज़गारी का तमगा लिए कुपोषण का शिकार भी यही राज्य रहा। तो फिर दोष किसका है। तो फिर इस राज्य को ह्यूमन इंडेक्स में सबसे पीछे खड़ा करने का जिम्मेदार किसे माना जाए। जाहिर है इतिहास के पन्ने जब भी उलटे जायेंगे, तो मुख्य आरोपी भाजपा के 14 वर्ष शासन के गवाह, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा से लेकर रघुवर दास जैसे मुख्यमंत्रियों को ही माना जायेगा।  

14वें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुरुआत से शुरू कर सारी जटिलताओं के उलझे सिरे को सुझाना शुरू कर दिया है 

झारखंड की राजनीति ने करवट बदली और 14वें मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन ने शपथ लिया। हेमंत सरकार में शुरात से शुरू कर सारी जटिलताओं के उलझे सिरे को सुझाना शुरू किया है।  कोरोना ने गति धीमी ज़रुर की, लेकिन इस सरकार ने पूर्व की धूमिल लकीरों से परे जनता के पक्ष में, निश्चित रूप से बड़ी लकीर खीचने में सफलता पायी है। इस सरकार की शुरुवाती नीतियाँ किसी बड़ी संरचना की नीव की भांति है। जहाँ राज्य सुगठित व सुनहरे भविष्य का अक्स देख पा रहा है। 

इस सरकार ने बता दिया है कि लूट से इतर यह राज्य प्राचीन परम्परा के अनुरूप अपना विकास करेगा। जहाँ प्राकृति का दोहन कर नहीं बल्कि संरक्षण कर न केवल राजस्व, रोगार अर्जित करेगा, राज्य पर लगी कुपोषण का कलंक भी मिटाएगा। अब राज्य खनन व पर्यावरण को परस्पर संतुलित करते हुए इक्को पर्यटन की ओर बढ़ेगा। राज्य की आर्थिक ताकत का प्रसार पूरे राज्य में रेल नेटवर्क बिछा कर होगा। 

राज्य की बेटियां आत्मनिर्भर बनेगी, शिक्षित हो झारखंड का नाम रौशन करेगी। खेल-नीति राज्य के बेटे-बेटियों के खेले-कूद को नया आयाम देगा, वे अब विश्व भर में देश का नाम रौशन कर सकेंगे।   जेपीएसी के विवादों को सफलता से सुलझाते हुए, राज्य के युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध होने के रास्ते खोलना, झारखंड की एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। प्रवासी व गरीब जनता के मामलों में सरकार ने लक्षित मानव दिवस सृजन को पार कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है।

बस एक कदम दूर सपनों का झारखंड है

बहरहाल, सरकार का झारखंडी मांदर की पारंपरिक थाप के लय पर सत्ता का बिछी विसात निश्चित रूप से झारखंड को एक नयी राह पर ले जा रही है। जहाँ शिक्षा, रोजगार, गरीबी, मानवता, प्रकृति, महिला सुरक्षा, पर्यावरण, वृद्ध-विधवा को पनाह मिलेगी। राज्य के तमाम युवाओं को भ्रम की की धुंध के परे झारखंड के इस सृजन में अहमभागिदारी निभाना चाहिए। और इस हवन की वेदी में ओच्छी राजनीति के सृजनकर्ताओं की मंशा को स्वाह कर देना चाहिए। क्योंकि झारखंड के युवा जितनी जल्दी हो समझ लें, 72वां गणतंत्र दिवस साक्ष्य होगा, बस अगले कदम पर सपनों का झारखंड है।           

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