2 तस्वीर दर्शाता है – हेमन्त सरकार झारखण्ड के सभी वर्गों के समस्याओं के साथ खड़ी 

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हेमन्त सरकार सभी वर्गों के समस्याओं का स्थाई हल निकालने का पक्षधर. सरकारी सेवा में नियुक्त पदाधिकारियों-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना होगी बहाल. आँगनबाड़ी सेविका – सहायिका बहनों को भोजन करा न केवल झारखंडी परम्परा ने निहित महिला सम्मान की स्पष्ट तस्वीर उकेरी, कोरोना त्रासदी में माँ-अन्नपूर्ण के किरदार निभाने वाली माँ-बहनों को किया नमन… 

झारखण्ड/रांची : राज्य की हेमन्त गठबंधन सरकार सभी वर्गों की ज़मीनी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुलझाने की पक्षधर है और शुरुआती दौर से इस दिधा में अहम भूमिका निभाती दिखती है. ज्ञात हो, राज्य के पारा शिक्षक जैसी जाति समस्या, प्रवासी श्रमिक, महिलाओं की हडिया-दारू जैसी अभिशप्त जिन्दगी, विस्थापन, पलायन, कुपोषण, जेपीएससी नियमावली, स्थानीय खिलाड़ी, मानव तस्करी आदि तामाम समस्याओं के विरुद्ध सरकार न केवल मुखर रही, स्थायी हल निकालने में इमानदार प्रयास किया है. और सफलता भी पायी है. जो झारखण्ड के भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा.

2004 के बाद सरकारी सेवा में नियुक्त पदाधिकारियों-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल होगी – मुख्यमंत्री 

झारखण्ड हित में सरकार द्वारा किये जा रहे ऐसे प्रयासों की कड़ी में कल सरकार का एक और मानवीय व संवेदनशीलता से ओत-प्रोत बड़ा चेहरा सामने आया. ज्ञात हो देश में हो रही फ़ासी राजनीति से परे मुख्यमंत्री ने अपने आवास में सरकारी कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर झारखंडियत परम्परा की नीव मजबूत की. सीएम हेमन्त सोरेन का कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को कहना कि सरकार उनकी समस्याओं के साथ खड़ी है. दर्शाता है कि राज्यवासियों की समस्या के प्रति सरकार कितनी गंभीर है. 

साथ ही निश्चय पत्र 2019 में झामुमो द्वारा की गयी घोषणा – वर्ष 2004 के बाद सरकारी सेवा में नियुक्त पदाधिकारियों-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करेंगे, को प्रतिनिधियों के बीच दोहराना, कहना कि हम वायदे पर कायम हैं, मजबूत झारखंडी अभिव्यति की ऐतिहासिक तस्वीर पेश करती है.

आँगनबाड़ी सेविका-सहायिका बहनों की हेमन्त सरकार में हुई इज्जत अफजाई न केवल भाजपा सरकार में दिए जख्मो पर मरहम, महिला सम्मान जैसे झारखंडी परम्परा की स्पष्ट तस्वीर उकेरती है 

ऐसी झारखंडियत छाप रखने वाली एक ओर तस्वीर सामने आयी. निश्चित रूप से यह तस्वीर झारखंडी माँ-बहनों के पूर्व में भाजपा के डबल इंजन सरकार में दी गयी जख्मों पर मरहम है. ज्ञात हो,  आँगनबाड़ी में कार्यरत सेविका-सहायिका बहनें अपने मानदेय तथा अन्य मांगों के मद्देनजर शिक्षामंत्री के आवास, रांची पहुंची. लेकिन दुत्कार का अनुभव रखने वाली इन बहनों को पहली बार वहां शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो, मंत्री बादल पत्रलेख व गिरीडीह विधायक सुदिव्य कुमार द्वारा इज्जत अफजाई के साथ स्वागत से हुई. जो झारखण्ड में महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर महिला सम्मान के प्रति एक गौरान्वित करने वाली तस्वीर पेश करती है.

शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो, मंत्री बादल पत्रलेख व गिरीडीह विधायक सुदिव्य कुमार द्वारा उनें अपने हाथों से भोजन परोसना, न केवल झारखंडी परम्परा में निहित मान-बहनों के सम्मान को दर्शाता है, कोरोना त्रासदी के दौर में झारखंड के बहनों द्वारा माँ अन्नपूर्ण बन झारखण्ड के तमाम वर्गों का पेट भरने  वाली किरदार, उस कर्तव्यनिष्ठा को नमन भी किया है. भोजन करने के बाद झारखण्ड की माँ-बहनों का मांगपत्र के तमाम बिंदुओं पर वार्ता हुई. सरकार द्वारा उन्हें आश्वस्त किया जाना कि उनके सभी माँगों पर मुख्यमंत्री से वार्ता कर सकारात्मक निर्णय निकाला जाएगा, दर्शाता है कि हेमन्त सरकार शान्ति का पक्षधर है और तमाम वर्गों के झारखंडी समस्याओं के साथ मजबूती से खड़ी है.

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