महामारी से दो-चार करते मुख्यमंत्री को रणनीति की थी आशा और प्रधानसेवक सुना गए उन्हें मन की बात

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मन की बात

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी प्रधानमन्त्री रणनीति व मदद के बजाय मन की बात सुना गए. और दूसरी तरफ भाजपा नेता मुख्यमंत्री को आईटी सेल के माध्यम से विफल बताना – दिलचस्प   

भाजपा के 14 बरस के शासन के बावजूद झारखंड गरीब राज्य है. जो प्रयाप्त संसाधन हैं, थके होने के बावजूद जनता की सेवा में लगे हैं. केन्द्रीय नीतियों के मद्देनजर संक्रमण का आलम यह है कि अस्पताल से ज्यादा मरीज है. ऐसे इससे इनकार नहीं कि कुछ असुधायें रेखांकित हो सकते हैं. राज्य का मुखिया सीमित संसाधन के बीच जीवन रक्षा के रास्ते तलाशा रहा है. उसकी आशा उस प्रधान सेवक हो जो संविधान के संघीय ढांचे का प्रधान गाँठ भी हो। और जंग के मैदान खड़े मुख्यमंत्री से वह प्रधानमंत्री रणनीति के बजाय मन की बात सुनाए। तो उस परेशान मुख्यमंत्री की मनः स्थिति समझी जा सकती है और उस संघीय विचारधारा की निर्लज्जता की पराकाष्ठा का भी आनकलन स्पष्ट रूप से हो सकता है. 

और मामला तब और गंभीर हो जाता जब राज्य की भाजपा इकाई, झारखंड धर्म के मद्देनजर उस केंद्र से राज्य की समस्या को मजबूती न रख, केंद्र का भोंपू बन उसी मुख्यमंत्री को विफल साबित करने पर तूल पड़े. वह भी तब जब उच्च न्यायालय झारखंड सरकार के कार्यों को सराहे. और भाजपा के सांसदों से सांसदों से सवाल भी करे, कि वह तमाम सांसद विपदा की घढ़ी में क्या कर रहे हैं? तो फिर सबसे बड़ा बड़ा सवाल यही हो सकता है कि केंद्र के लाशों पर खड़ा हो राजनीति करने के मद्देनजर, क्या मन की बात से देश को महामारी के मुसीबत से उबारा जा सकता है.

केंद्र झारखंड को लगभग उसके स्थिति पर छोड़ दिया है -ऐसे में भाजपा नेताओं का बयान हास्यास्पद

ज्ञात हो झारखंड में लगातार मरीजों को बेड मुहैया कराने के तमाम विकल्प मुख्यमंत्री द्वारा तलाशे जा रहे हैं. झारखंड रिम्स में 528 बेड की क्षमता वाले अस्थायी कोविड अस्पताल का ऑनलाइन शुभारंभ किया जा चूका है. स्वावलंबी हो OXYGEN का भी उत्पादन राज्य कर रहा है. जीवन रक्षक दवाओं को अन्य श्रोतों से उपलब्ध कराने के प्रयास भी शामिल है. और केंद्र अपने हिस्से के मदद के जगह साफ़ पल्ला झाड ले. और झारखंड को लगभग उसके स्थिति पर छोड़ दे। जहाँ पिछली सत्ता मे झारखंड के प्रति जवाबदेही केवल लूट हो। तो भाजपा के तमाम प्रयास के मातहत जनता के बीच उठने वाले सवाल में यह उसकी खीज भर हो सकती है.

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