पारा-शिक्षकों के समर्थन में हेमंत के तीखे तेवर से रघुवर सरकार के नेताओं के बदले सुर

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पारा-शिक्षक

पारा-शिक्षकों के आन्दोलन पर रघुबर दास के तानाशाही रवैय्ये के विरुद्ध झामुमो के तीखे तेवर से सरकार घबराती दिख रही है। रघुवर दास को दरकिनार कर भाजपा खुद इस मामले को अपने हाथ में लेकर निपटारा करने का प्रयास में जुटी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने निवेदन करते हुए पारा शिक्षकों को काम पर वापस लौट आने की अपील की है। साथ में यह भी कहा है कि सरकार के साथ-साथ भाजपा स्वयं पारा शिक्षकों के शीर्ष नेताओं से बातचीत करना चाहती है।

पारा-शिक्षकों
पारा शिक्षकों के समर्थन में झामुमो

गौरतलब है कि झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर पारा-शिक्षकों को रघुबर सरकार के प्रशासन की बर्बरता का शिकार होना पड़ा था। इन्हें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने और सरकारी काम में बाधा डालने सहित अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले को शांतिपूर्वक निपटाने की जगह रघुबर दास ने तानाशाही रुख इख्तियार करते हुए शिक्षकों को गुंडे शब्द से नवाज चुके थे। सारे फैसले यही दर्शा रहे थे कि मानो यह महोदय पारा शिक्षकों से व्यक्तिगत प्रतिशोध लेना चाह रहे हों।

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पारा शिक्षकों के समर्थन में झामुमो

पारा शिक्षकों के इस विकट परिस्थिति में हेमंत सोरेन समेत पूरा झामुमो दल रघुबर दास के नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वे इन शिक्षकों के हकों को लेकर लगातार इस सरकार को आन्दोलन की चेतावनी दे रहे थे। उनके इस कदम की सराहना भी हो रही थी। शायद आवाम के साथ-साथ पारा-शिक्षकों का उनपर बढ़ते विश्वास को देखते हुए घबराकर रघुबर सरकार को अपनी रुख नरम करने को विवश होना पड़ा।

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पारा शिक्षकों के समर्थन में झामुमो

बहरहाल, गिरफ्तार महिला पाराशिक्षकों ने कुछ दिनों पूर्व निचली अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर की थी लेकिन वहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गयी। पारा शिक्षकों पर से मुकदमे वापस लेने, गिरफ्तार पारा शिक्षकों की रिहाई की मांग पर को लेकर भाजपा सरकार की मंशा अबतक साफ़ नहीं है।

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