“न कठर पात झड़ते न भूत भागते”!

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झारखण्ड के सुदूर देहातों में एक कहावत है “न कठर पात झड़ते न भूत भागते”! लगता है इसी कहावत के अनुकूल ही  झारखण्ड प्रदेश में रघुवर सरकार चल रही है। क्योंकि इस प्रदेश में जब भी किसी गरीब की मौत भूख से होती है तो रघुवंश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री श्री… सरयू राय बड़ी मार्मिक मुद्रा का स्वांग बना बार-बार बस एक ही बेसुरा राग तीन वर्षों से अलाप रहे हैं कि अब अनाज बैंक इस प्रदेश खुल जायेगा और  किसी भी झारखंडी की मौत भूख से नहीं होगी! उनके इस स्टेटमेंट पर झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हमंत सोरे अपने facebook वाल के माध्यम से गंभीर सवाल उठाते है।  

  

 

प्रस्तुत लिंक में जनता के चुनिन्दा जवाब खुद ही पढ़ लें किस प्रकार जनता इनके झूठे स्टेटमेंट से दुखी हैं और इनके प्रोपगेंडा को भी भली-भांति समझ रहे हैं। बाकी के कमेंट्स नीचे पढ़ा जा सकता  हैं।

Kanhaiya Pandey “बड़े भैया जोहार इनका काम ही है झूठ बोलना और लोगों को दिग्भ्रमित करना आम जनता की परेशानी को यह क्या समझें की भूख से उनकी क्या स्थिति होती है केवल अन्य दलों के नेता गनो के पीछे हमेशा की तरह एक दुश्मन की तरह लगे रहना काम कुछ नहीं केवल एक सच्चे ईमानदार जनप्रतिनिधि को परेशान करना और आम लोगों को दिग्भ्रमित करना इनका पुराना विकास कार्य है और भाजपा कहती है कि विकास की गंगा झारखंड में बहाएंगे एवं राज्य के शिक्षा रोजगार सड़क बिजली इन सारी मूल जरूरतों को बर्बाद करेंगे!”

Susobhit Jha “झूठ फरेब और जुमलेबाजी की राजनीति पर ही आधारित है पूरी पार्टी तो यह तो एक छोटा सा नमूना है पार्टी के l मुख्यमंत्री गोबर का बैंक खोलना चाहता है , कोई भूख मिटाने का l खोलेगा कोई नहीं l क्योंकि सब जुमला है, मोदी जी जुमला है रघुवर जी जुमला है पूरी पार्टी जुमला है, यह सब माहिर है एक विश्वस्तरीय खेल में उसका नाम भी जुमला है l जनता को भूख से मरने वाले और शर्मसार करने वालों के पास सत्ता चली गई है वह जल्दी से वापस आ जाए तो बाबा बैद्यनाथ का लाख-लाख शुक्र होगा l”

रघुवर सरकार को अपनी असफलताओं को दरुस्त करने के वजाय ये कहने में  तनिक भी लाज नहीं आती है कि झारखण्ड प्रदेश के ग्रामों में जो मौते हुई है उनका आधार भूख  नहीं बल्कि बीमारी  है। तो फिर ये सवाल उठता है कि फिर इनका स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा था? इनका झूठ तो अखबार में छपे सुर्खियों “पुत्र ने कहा -भूख से मौत के कलंक को छुपाने के लिए एसी ने गलत रिपोर्ट सौंपी” से उजागर हो जाती है। अगर ऐसा नहीं है तो जरा ये जनता को बतायें कि वो कौन सी परिस्थिति थी जिसके अंतर्गत जाँच टीम को ग्रामीणों ने अपने इलाके में प्रवेश ही नहीं करने दिया। जबकि वहां के ग्रामीण खुद ही कह रहे हैं कि ये मौत भूख से हुई है न कि बीमारी से।  तो जाहिर है कि ये सारकार झूठ बोल रही है और इनकी रिपोर्ट भी झूठी है।

आशा करते हैं कि इस साल सरयू जी का अनाज बैंक जल्दी खुलेगा ताकि यहाँ के जनता की मौत कम से कम भूख से तो नहीं होगी लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली को देख कर यहाँ की जनता भली भांति समझ सकती है कि जबतक झारखण्ड में बीजेपी की सरकार रहेगी तबतक कठहर पात तो नहीं ही झड़ने वाला!

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