ऊर्जा के क्षेत्र में दूरदर्शी सोच

ऊर्जा के क्षेत्र में हेमन्त सोरेन की दूरदर्शी सोच – भविष्य के झारखण्ड में नहीं होगी बिजली की किल्लत

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का सौर ऊर्जा पर जोर, गांवों के फायदा के लिए भी खींचा गया है खाका 

सत्ता लोभ से परे हेमन्त की पूर्व मुख्यमंत्रियों से अलग सोच – झारखण्ड के पठारी इलाकों में उन्होंने जलविद्युत की दिशा में बढ़ाया ठोस कदम 

रांची : 20 वर्ष से झारखण्ड बिजली की मूल भूत समस्या से जूझता रहा है. इन 20 सालों में कई सरकारें आयी और गयी, लेकिन उर्जा की समस्या जस की तस रही. मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब 14 साल सत्ता सुख भोगने वाली भाजपा शासन में भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाए और राज्य पर डीवीसी का अरबों रुपये का कर्ज लद जाए. जिससे झारखण्ड विकास की लकीर से पिछड़ता चला जाए और एक संसाधन-संपदा से भरपूर झारखंड की हकीकत नितांत गरीब राज्य के रूप में उभरे. तो…

मौजूदा दौर में, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के कार्यकाल में, राज्य में बिजली की समस्या पर बुनियादी जोर दिया गया है. मुख्यमंत्री द्वारा भविष्य में बिजली की जरूरतों को देखते हुए सौर ऊर्जा पर विशेष जोर दिया गया है. निसंदेह यह दूरदर्शी सोच सत्ता लोभ से परे झारखण्ड को नयी दिशा देने वाला कदम है. जिसके अक्स में झारखण्ड बिजली की समस्या से मुक्ति पाते हुए उर्जा के क्षेत्र में नयी उर्जा के साथ अपना पाँव पसारेगा. ज्ञात हो, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल पर्यावरण के लिहाज से भी अनुकूल है और कम खर्चीला होने के कारण झारखण्ड आत्मनिर्भरता के तरफ भी मजबूती से कदम बढ़ा सकेगा. 

गैर-परंपरागत जल विद्युत-ऊर्जा में भी हेमंत सरकार तलाश रही है संभावनाएं 

ज्ञात हो, कोरोना संक्रमण काल में, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा गैर-परंपरागत ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जाना उपरोक्त तथ्य की पुष्टि करता है. इस फेहरिस्त में हरित ऊर्जा (सौर ऊर्जा और जल विद्युत ऊर्जा) प्रमुखता से शामिल हैं. शुक्रवार को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सीएम ने निर्देश दिया कि राज्य में सोलर पावर और जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में संभावनाएं तलाशे जाएं. हेमन्त सोरेन की यह अलग सोच उन्हें पूर्व के मुख्यमंत्रियों अलग खड़ा करता है. 

दरअसल, झारखण्ड सौंधी मिट्टी से जुड़े होने के कारण मुख्यमंत्री सोरेन को झारखण्ड के पठारी इलाकों की ताक़त का पता है. वह जानते हैं कि इन क्षेत्रों में दर्जनों जलप्रपात व झरना है, जिसका सदुपयोग जल विद्युत उत्पादन में किया जा सकता है. हुंडरू फॉल, दशम फॉल, गौतमधारा (जोन्हा), हेसातु फॉल, गोवा, सुनुआ जैसे जलप्रपात स्पष्ट उदाहरण हो सकते हैं. हुंडरू जलप्रपात जो, झारखण्ड राज्य में सर्वाधिक ऊँचाई से गिरने वाला प्रपात है, का लाभ राज्य को पनबिजली के रूप में विगत 50 वर्षों से प्राप्त होता आ रहा है. जिसे सिकिदिरी प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है.

कई सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं, हेमन्त सरकार का लक्ष्य अब गांवों को जोड़ना है

ज्ञात हो, झारखण्ड के 1400 सरकारी भवनों में 892 भवन पूरी तरह सौर ऊर्जा से ऊर्जान्वित हो चुके हैं. अपनी योजनाओं के बल पर झारखण्ड सौर उर्जा उत्पादन के मामले में 15वें पायदान पर है. अब हेमंत सोरेन सरकार का प्रयास विपरीत भौगोलिक परिस्थिति वाले गांवों को इससे जोड़ना है. सरकार का लक्ष्य है कि सघन वन क्षेत्रों और पहाड़ों के बीच बसे लगभग 300 गांवों में सौर ऊर्जा के जरिए बिजली की आपूर्ति हो. यहां सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जाने हेतु हेमन्त सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है. सुदूर गांवों में आफग्रिड बैटरी पैनल का उपयोग किया जाना है.

विभागीय समीक्षा के दौरान सीएम द्वारा सौर ऊर्जा के लिए दिये गए विशेष निर्देश 

ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मुख्यमंत्री द्वारा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम करने के कई निर्देश दिये. उनका मानना है कि राज्य में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में काफी संभावनाएं मौजूद हैं. चूँकि, इसमें बड़े पैमाने पर भूमि की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सोलर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के लिए राज्य में लैंड बैंक बनाया जायेगा. मसलन, विभागीय अधिकारियों को सोलर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने में जरुरत पड़ने वाली जमीन का ब्यौरा तैयार करने का निर्देश दिया है. 

भविष्य को ध्यान में रखकर ऊर्जा की दिशा में हेमन्त सरकार ने तैयार की है कई योजनाएं 

झारखण्ड में भविष्य में उर्जा की कमी न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा की दिशा में कई योजनाओं पर काम कर रही है. जिसके अक्स में झारखण्ड रिन्यूयेबल एनर्जी डेवलंपमेंट एजेंसी यानी जेरेडा द्वारा देवघर, सिम़डेगा, पलामू और गढ़वा  में 20-20 मेगावाट का सोलर ऊर्जा प्लांट स्थापित किया जाना शामिल हैं. इसके लिए सरकार के स्तर पर जमीन आवंटन कर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजा गया है. वहीं गिरिडीह जिला को सोलर सिटी के रुप में विकसित करने और एयरपोर्ट की खाली पड़ी जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित करने का फैसला लिया गया है.

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

This Post Has One Comment

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.