झारखण्ड के उन 8 सशक्त महिलाओं की कहानी, जिसने मुख्यमंत्री के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को किया सच साबित

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मुख्यमंत्री ने कहा था कि 1 रुपये में जमीन रजिस्ट्री की योजना बंद कर महिलाओं के लिए शुरू की फूलो-झानो आशीर्वाद योजना, जिसका मिल रहा राज्य के गरीब महिलाओं को लाभ. कहानी उन 8 सशक्त महिलाओं की…

रांची : पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित विपक्ष (भाजपा) मुद्दों के अभाव में झारखण्ड सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोपों यदा-कदा लगाती रही है. लेकिन, झारखण्ड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने जवाब जुबानी देने के बजाय हमेशा अपने फैसलों से दिया है. जो झारखण्डी महिलाओं के कल्याण व सशक्तिकरण में मील के पत्थर साबित हुए हैं. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय शुरू हुई “1 रूपये में महिलाओं की जमीन रजिस्ट्री योजना” के आलोक में विपक्ष का आरोप है कि हेमन्त सरकार में योजना को बंद कर दिया गया. 

लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उक्त योजना गरीबों के लिए नहीं बल्कि अमीरों के लिए थी. इसलिए सरकार ने गरीबी विरोधी योजनाओं को बंद कर गरीब महिला हितैषी कई योजनाओं को शुरू किया. जिसमे फूलो-झानो आशीर्वाद योजना, यूनिवर्सल पेंशन योजना प्रमुखता से शामिल हैं. फूलो झानो योजना से झारखण्ड की वैसी महिलाओं को सीधा फायदा पहुंचा है, जो हड़िया-दारू बेचकर जीवन यापन करने को अभिशप्त थी. हम यहां झारखण्ड की 8 वैसी सशक्त महिलाओं की तस्वीर रखने जा रहे हैं, जो फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ लेकर समाज में इज्जत से जीवन व्यतीत कर रही है अपने परिवार को एक स्तरीय जीवन भी दे पा रही है. 

मजबूरी वश कोई महिला हड़िया-दारू नहीं बेचे, इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा है कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के माध्यम से अबतक 18000 से अधिक महिलाओं को हड़िया-दारू के निर्माण और बिक्री से अलग कर वैकल्पिक रोजगार का साधन उपलब्ध कराया गया है. मजबूरी वश अब महिलायें हड़िया-दारू नहीं बेचे, इसी लक्ष्य के साथ झारखण्ड सरकार आगे बढ़ रही है. बता दें कि हेमन्त सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही है. और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही है. योजना के माध्यम से महिलाओं एवं उनके परिवार का विकास होगा. जिससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आएगा.

योजना का लाभ ले जीवन स्तर सुधरने वाली 8 सशक्त महिलाओं की कहानी

1. चिरेश्वरी देवी ने खोला खुद की साइकिल मरम्मत की दुकान 

खूंटी के अनिगड़ा गांव की रहने वाली चिरेश्वरी देवी आजीविका के श्रोत की कमी की वजह से मजबूरन दारु निर्माण का काम कर बाजारों में बेचा करती थी. पूंजी के आभाव में किसी प्रकार का व्यवसाय नहीं कर पा रही थी. ‘आपके अधिकार आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम’ के माध्यम से उन्हें त्वरित लाभ प्राप्त हुआ और चौक पर ही खुद की साइकिल मरम्मत की दुकान खोल ली.

2. 15000 रुपये का ब्याज रहित ऋण ले मिनोति देवी ने गांव में ही नास्ता का दुकान शुरू किया

गोड्डा के पथरथामा प्रखंड के वोहा ग्राम निवासी मिनोती देवी को भी फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ मिला. हड़िया शराब बेचकर दो वयस्क एवं तीन बच्चे के साथ किसी तरह से घर का गुजर-बसर करने वाली मिनोती देवी ने इस योजना का भरपूर फायदा उठाया. योजना के तहत मिनोती देवी को ब्याज रहित 15000 रुपये का ऋण मिला, जिससे उसने गांव में ही नास्ता का दुकान शुरू किया. 

3.  विनीता हेंब्रम की बदली दुनिया

साहिबगंज की महिला विनीता हेंब्रम से सीएम हेमन्त सोरेन से संवाद कर बताया था कि पहले वह दारू हड़िया बेच कर अपना पेट भरती थी. बाद में उन्हें फूलो-झानो योजना अंतर्गत 10000 का ब्याज रहित ऋण दिया गया. मिली राशि से वह बकरी पालन एवं खेती से जुड़े कार्य कर रही है. सरकार की योजना एवं जेएसएलपीएस से जुड़कर उन्होंने टुकटुक खरीदा जिसके माध्यम से अब अच्छी कमाई कर रहीं है. उनका जीवन स्तर सुधर गया है.

4. संगीता दास ने किराना दुकान खोला और पति संग किया सब्जी का व्यापार

पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला प्रखंड अंतर्गत उत्तरी मऊभंडार पंचायत के तुमाडुंगरी की रहने वाली संगीता दास अब शराब बेचनी थी. पति की बेरोजगारी और परिवार की जिम्मेवारी के कारण यह काम करना पड़ता था. इससे घर में तनावपूर्ण माहौल बनता था जिसका असर बच्चों पर पड़ता है. बाद में फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से संगीता को बिना ब्याज का 10,000 का ऋण मिला. इससे उसने घर में ही किराना दुकान खोल लिया, साथ में पति को भी सब्जी का व्यापार कराने लगीं.

5. अंजू देवी को राशन की दुकान से प्रतिदिन 400 से 500 रुपये की होने लगी आमदनी

बोकारो के पेटरवार प्रखंड की अंजू देवी बताती है कि परिवार के भरण पोषण के लिए गांव में ही वह हड़िया बेचती थी. पति मजदूरी करता है पर रोज मजदूरी नहीं मिलने से परिवार को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था. वह शराब बेचने का काम छोड़ना चाहती थी. इस काम में मदद मिला, फूलो-आशीर्वाद योजना से. 10,000 रुपये के ऋण से उसने चाय-नाश्ते की दुकान खोली. जब दुकान में ग्राहकों की भीड़ बढ़ी तो अंजू ने दोबारा 20,000 रुपये का ऋण लिया. उसने चाय दुकान के बगल में किराना (राशन) की दुकान खोल ली. अब उसे प्रतिदिन 400 से 500 रुपये की आमदनी हो जाती है.

6. दूध बेचकर परिवार का पालन अच्छे से कर रही गुड़िया देवी

हजारीबाग जिले के दारू प्रखण्ड के रचंका गांव की निवासी गुड़िया देवी की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. घर काफी मुश्किल से चल पाता था. जरूरत पड़ने पर गांव के महाजन एवं माईक्रो फाइनांस से ऋण लेना पड़ता था. ऐसे ही समय में गुड़िया देवी को फूलो झानो आर्शीवाद अभियान के तहत महिलाओं की काउंसेलिंग कर हड़िया-दारू की बिक्री छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया. उसे 15,000 रुपये का लोन मिला. लोन से गुड़िया देवी ने गाय और बकरी खरीदी. अब गुड़िया देवी गाय तथा बकरी का दूध बेचकर परिवार का पालन अच्छे से कर रही है.

7. लोगों के बुरे व्यवहार झेलने से मिली सोमनी देवी को मुक्ति

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के कोम्बाकेरा गांव की सोमानी देवी पहले हड़िया और शराब बेचती थी. इससे उसे लोगों के बुरे व्यवहार को झेलना पड़ता था. आज उसी हाट-बाजार में अपने होटल का संचालन कर रही हैं. सोमानी बताती है कि बिना ब्याज के 10000 का ऋण उसे फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ मिला. इससे उसने यह काम शुरू किया.

8, बदली किरण देवी की जिंदगी.

खूंटी के तोरपा के कोचा पाकरटोली की महिला किरण देवी कभी हड़िया-दारू बेचा करती थी. इससे उसकी जिंदगी जिल्लतों से भर गई थी. लेकिन आज फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से उसका जीवन बदल गया है. आज किरण देवी बेबाक होकर कहती है कि जब वह हड़िया-दारू बनाकर बेचा करती थीं, तब लोग उससे गंदे तरीके से मजाक किया करते थे, लेकिन आज उसे सम्मान की नजर से देखा जाता है.

मसलन, राज्य के लिए यह 8 सशक्त महिलाओं की कहानी बदलाव की जीवंत तस्वीर हो सकती है. साथ ही महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर एक मजबूत व ठोस कदम भी माना जाना चाहिए. साथ ही ये 8 सशक्त महिलाओं की कहानी राज्य के उन मेहनती महिलाओं को हेमन्त सरकार के योजनाओं से जुड़ अपनी अलग पहचान गढ़ने को प्रेरित भी करती रहेगी जो आत्मनिर्भर व सशक्त बनना चाहेगी.

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