हेमन्त सरकार 2021 : गोपालकों व पशुओं के लिए हुए बेहतर काम, गाय राजनीति विषय नहीं कुपोषण मुक्ति व विकास का द्योतक …मिली सीख

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हेमन्त सरकार में गोपालकों व पशुओं के कल्याण में हुए कार्य तथकथित गौभक्त पार्टी के लिए जहाँ सिख हो सकती है. वहीं गाय पर राजनीति करने वाले नेताओं के लिए चिंतनीय विषय कि पशु कल्याण में हुए काम राज्य-देश को कुपोषण मुक्ति के अलावे विकास के राह पर भी ले जा सकती है…

रांची : पूर्व की भाजपा की डबल इंजन सरकार में, गाय एक राजनीतिक विषय रहा और झारखण्ड को कथित तौर पर मॉब लिंचिंस्तान के रूप में जाना जाता रहा. हालांकि, राज्य में ऐसी घटना दोबारा न घटे, हेमन्त सरकार में मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून बनाया गया. शीतकालीन सत्र के दौरान विधेयक भी पास किया गया है. वर्ष 2021 में गोपालकों, गाय और गौशालाओं को लेकर झारखण्ड प्रदेश में सराहनीय कार्य हुए. पशुओं के विकास और कल्याण को लेकर हेमन्त सरकार पूरी तरह कृत-संकल्पित रही. मुख्यमंत्री पशुधन योजना की सफलता तथ्य की पुष्टि करती है. 

वहीं, पशुओं के विकास के लिए प्रति पशु 100 रूपये, गौशालाओं के रख-रखाव के लिए हर वर्ष 36,000 रुपये, गौशाला के लिए रेस्क्यू वाहन, प्रमंडलीय स्तर पर गौ मुक्तिधाम सहित गौशाला में ही गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद्य बनाने की पहल इसी संकल्प का हिस्सा भर है. साफ संकेत है कि हेमन्त सरकार द्वारा पशुओं के कल्याण में हुए कार्य तथकथित गौभक्त पार्टी के लिए जहाँ सिख हो सकती है. वहीं गाय पर राजनीति करने वाले नेताओं को सोचने पर मजबूर कर सकती है कि राजनीति से ज्यादा पशु कल्याण में हुए काम राज्य-देश को कुपोषण मुक्ति के अलावे विकास के राह पर भी गति से ले जा सकती है. 

गो मुक्ति धाम :मृत्यु के बाद गायों के शरीर का हो सकेगा पवित्र तौर पर निष्पादन

साल 2021 के फरवरी माह में हेमन्त सरकार द्वारा लाये बजट प्रावधान 2021-22, पशुपालकों के साथ-साथ पशुओं के लिए अहम हैं. सरकार द्वारा राज्य के प्रत्येक प्रमंडल में गो मुक्ति धाम बनाने का फैसला लिया गया. उद्देश्य साफ था कि मृत्यु के बाद गायों के शरीर का पवित्र तरीके से निष्पादन किया जा सके. बजट में ही मुख्यमंत्री द्वारा पशुधन योजना लाने की बात हुई. योजना के तहत पशुपालन क्षेत्र में बकरा विकास, शुकर विकास, बैकयार्ड लेयर कुकुट, बॉयलर कुकुट पालन, बत्तख चूजा वितरण, गव्य विकास क्षेत्र में दो दुधारू गाय का वितरण की पहल हुई. योजना में पशुओं के विकास को कई सुविधाओं व अनुदान को जोड़ा गया. जिससे पशुपालन के क्षेत्र में झारखण्ड निश्चित रूप से आगे बढ़ा है. 

जोड़ा बैल वितरण योजना से किसानों का होगा मुनाफा

बजट 2021-22 में ही राज्य सरकार जोड़ा बैल वितरण योजना लेकर आयी. इसके तहत गोपालकों द्वारा प्राप्त नर बाछाओं को बैल के रूप में तैयार कर इन्हें सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत किसानों को वितरित किया जा रहा है. इससे किसान को खेती में सहयोग मिलेगा और वे कम लागत में खेती कर सकेंगे. इससे उत्पादन लागत कम होगी और किसानों को मुनाफा अधिक होगा.

गौशालाओं के लिए रेस्क्यू वाहन और प्रति पशु 50 रुपये से बढ़ाकर किया 100 रुपये

राज्य के पशुओं की देखभाल और उसके संरक्षण को लेकर हेमन्त सरकार ने फैसला किया कि गौशालाओं में पशुओं के आहार के लिए एक वर्ष तक प्रति पशु प्रतिदिन 100 रुपये दिया जाएगा. इससे पहले प्रति पशु हर दिन 50 रुपये हर छह माह के लिए दिया जाता था. फिर फैसला हुआ कि राज्य के रजिस्टर 21 गौशालाओं को 10 रेस्क्यू वाहन दिया जाएगा. ताकि लावारिस पशुओं को रेस्क्यू किया जा सके. जो पशु सड़क पर बीमार अवस्था में रहते हैं, उन्हें रेस्क्यू कराया जा सके. 

गौशालाओं के रख-रखाव के लिए 9000 रुपये की राशि को बढ़ाकर किया 36,000

वर्ष 2021 के अंतिम दिन रांची स्थित गौशाला पहुंचे कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने घोषणा कर कहा कि सरकार राज्य के सभी गौशालाओं को सुदृढ़ एवं मजबूत करने के लिए कृतसंकल्पित है. इसलिए सरकार ने पूर्व में दिए जाने वाले पशुओं के भरण-पोषण के अनुदान की अधिकतम 9,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अधिकतम 36000 प्रति वर्ष कर दिया है. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार प्रमंडलीय स्तर पर गौ मुक्ति धाम की दिशा में कार्यरत हैं. साथ ही राज्य के सभी गौशाला के बकाया राशि का भी भुगतान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रांची गौशाला को भी 927000 की राशि भुगतान कर दिया गया है.

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