घरेलू उत्पाद को बढ़ावा -सीएम का एक सराहनीय पहल, ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के खुलेंगे द्वार 

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झारखण्ड : घरेलू उत्पाद के मद्देनजर ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान व रोजगार के मार्ग प्रसस्त करने के लिए सिदो-कान्हो कृषि एवं वनोपज सरकारी संघ, पलाश ब्रांड, दूध उत्पादों की सब्सिडी, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना में अंशदान की हुई सरकारी पहल…

रांची : झारखंड राज्य में सालों तक खनन को बढ़ावा दिया जाता रहा है. नतीजतन तमाम सरकारी नीतियां खनन के इर्द-गिर्द घुमती रही और राज्य में अवैध खनन की संस्कृति को बढ़ावा मिला. जिससे न केवल बहुमूल्य वनोपज की उपेक्षा हुई, खनन लूट के अक्स में जंगलों का विनाश भी होता रहा. और वनोपज पर आश्रित आबादी लगातार पिछड़ते चले गए. ज्ञात हो, झारखण्ड अपने सघन जंगल के लिए भी प्रसिद्द है. चूँकि यहाँ गाँव में जंगल नहीं जंगल में गाँव है तो वनोपज और घरेलू उत्पादों की क्षति का अर्थ समझा जा सकता है. 

मौजूदा दौर में हेमन्त सरकार, विशेष कर व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा इस दिशा में बड़ी पहल करते हुए फिर से इसे सवारने का काम शुरू किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर वनोत्पाद को रोजगार से जोड़ने के लिए कई बेहतरीन पहल की गयी है. जिससे न केवल झारखण्ड के इन इलाकों में रोजगार के द्वार खुले हैं, ग्रामीनों के आर्थिक उत्थान के नयी परिधि का निर्माण भी संभव हुआ है. जो आर्थिक दृष्टिकोण से झारखंड की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा.

राज्य और जिला स्तर पर गठन होगा कृषि एवं वनोपज सरकारी संघ 

घरेलू उत्पाद की दिशा में हेमन्त सरकार की सबसे बड़ी पहल सिदो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सरकारी संघ लिमिटेड एवं सिदो-कान्हो कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ लिमिटेड का गठन करना है. यह संघ राज्य में धान-गेहूं, फल-सब्जी, लाह, इमली आदि उत्पादन के संकलन, प्रसंस्करण, अनुसंधान तथा विकास की विभिन्न गतिविधियों को बढावा देगा. इन उत्पादों को खरीद-बिक्री को यह सहकारी संघ मजबूती देगा. इसका एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को सर्वोत्तम लाभ देना भी है. नतीजतन किसानों को कृषि व वनोपज से मेहनत अनुरूप अच्छी आमदनी मिल पाएगी. 

सीएम ने माना कि खामियों की वजह से ग्रामीण किसान वनोपज जैसे आय के स्रोतों से पिछड़ते चले गए

मुख्यमंत्री का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपारिक आय के साधनों में कमी आयी है. कई खामियों की वजह से ग्रामीण किसान वनोपज जैसे आय के स्रोतों पिछड़ते गये. वर्तमान सरकार की सोच यह है कि वन उपज की व्यवस्था दुरुस्त की जाए. किसानों को वनोपज के लिए बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध हो सके इस निमित्त प्रतिबद्धता के साथ कार्य किए जा रहे हैं. इसके लिएसंघ का गठन किया गया है. 

पलाश ब्रांड से ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

झारखण्ड में सखी मंडल के नाम से बनी स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने हेतु हेमन्त सरकार द्वारा पलाश ब्रांड लॉन्च किया गया है. ज्ञात हो, वर्तमान में दो लाख से अधिक ग्रामीण महिला उद्यमी पलाश ब्रांड के तहत अपने उत्पादों का निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री कर रही हैं. सरकार द्वारा इस ब्रांड को लाने का उद्देश्य राज्य के स्वंय सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका के अवसर प्रदान करना एवम उन्हें सम्मानित आय सुनिश्चित करना करना है है. 

पलाश ब्रांड जैसे सोच का ही नतीजा है कि आज राज्य की ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद देश के साथ विदेशों तक में बिक्री हो रही है. यही नहीं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा पलाश के बैनर तले निर्मित स्वदेशी उत्पाद अब अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफोर्म पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं.

दूध उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए हेमन्त सरकार क सब्सिडी देने का फैसला

घरेलू उत्पाद के तहत दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हेमन्त सरकार द्वारा बड़ा फैसला लिया गया है. झारखण्ड मिल्क फेडरेशन को आपूर्ति करने वाले ग्रामीण दूध उत्पादकों को दूध के लिए एक रुपये प्रति लीटर की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. यह राशि झारखण्ड मिल्क फेडरेशन के माध्यम से किसानों के खाते में भेजी जाएगी. पहली बार किसी राज्य सरकार की तरफ से दूध उत्पादकों के लिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है. इस पहल से राज्य के ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 40,000 रजिस्टर्ड दूध उत्पादकों को लाभ मिलेगा.

केंद्र की वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना में हेमन्त सरकार देगी अंशदान

केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट में भी हेमन्त सरकार ने बड़ा अंशदान करने का फैसला किया है. योजना के तहत राज्य में अगले पांच वर्षों में 275 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसके माध्यम से जिला आधारित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे. योजना में राज्य सरकार 110 करोड़ और केंद्र 165 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

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