झारखण्ड : 21 वर्षों में गांव-गांव तक पहुंचने वाली पहली सरकार बनी ‘हेमन्त सरकार’

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हेमन्त सरकार में सम्मान के साथ रोजगार कर जीवन जी रहे राज्य के युवा व महिला. सहाय योजना से अपराध जगत के वातावरण से विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे युवा.

रांची : राज्य गठन के करीब 21 वर्षों के बाद हेमन्त सोरेन सरकार झारखण्ड की ऐसी सरकार बनी है, जिसने पहली बार गांव-गांव तक पहुँच सकी है. हेमन्त राज में पहली बार ग्रामीण क्षेत्र की महिलायें  और सभी युवा सम्मान के साथ रोजगार कर जीवन जी रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कई मौको पर कहा है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्र में विकास पहुंचाने के साथ-साथ सभी को आत्मनिर्भर बनाना है. 

इसी कड़ी में बीते दिनों ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरूआत की गयी है. सरकार अब “सहाय योजना” की शुरूआत करने जा रही है. इससे पहले ग्रामीण क्षेत्र के कई युवाओं को सीधी नियुक्ति देकर रोजगार का साधन उपलब्ध कराया गया है. ग्रामीण क्षेत्र में खेल-कूद को बढ़ावा दिया जा रहा है. कई कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतार कर क्षेत्र का विकास किया जा रहा है. 

वैसी जगहों पर पहुंची सरकार की आवाज़ और विकास की रोशनी, जो आज तक रहा अछूता

ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए बीते 15 नवंबर को मुख्यमंत्री ने ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरूआत की है. कार्यक्रम के तहत पंचायतों में विशेष कैंप लगाकर जन समस्याओं का निदान किया जा रहा है. सरकारी आकंड़ो के मुताबिक अबतक ग्रामीण क्षेत्रों से मिले 5 लाख शिकायतों में से 2.80 लाख का समाधान कर दिया गया है. लोगों के घरों तक राज्य सरकार की योजनाएं पहुंचायी जा रही है. 

सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ अब काफी संख्या में ग्रामीण ले रहे हैं. कार्यक्रम का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि पिछले 21 वर्षों में वैसे पंचायत के साथ गांव जहां सरकार की आवाज और नजरें नहीं पहुंची थी, वहां विकास की रोशनी सीधी पहुंचायी जा रही है. 

नक्सल, मानव तस्करी, बाल विवाह, डायन कुप्रथा जैसी समस्याओं के अंत के लिए “सहाय योजना”

पिछले 21 वर्षों से झारखण्ड की ग्रामीण जनता नक्सलवाद, बाल विवाह, डायन कुप्रथा, मानव तस्करी, शिक्षा की आवश्यकता, कुपोषण और पलायन की समस्या से जुझ रही हैं. इसको खत्म करने के लिए सरकार के निर्देश पर खेल विभाग अब स्पोर्ट्स एक्शन टूवर्डस हार्नसिंग एस्परेशन ऑफ यूथ (सहाय) नाम की योजना शुरू करने जा रही है. आगामी 15 दिसम्बर को चाईबासा से मुख्यमंत्री स्वंय सहाय योजना को धरातल पर उतारेंगे. योजना के तहत सरकार उग्रवाद प्रभावित इलाकों के पुलिस स्टेशनों और प्रखंड कार्यालयों की ओर से खेल प्रतियोगिताएं करायी जायेगी. 

नक्सल से ग्रसित पांच जिलों के 55 प्रखंडों और 65 पुलिस थानों में 4 खेलों का होगा आयोजन

सहाय योजना के तहत उग्रवाद प्रभावित पांच जिलों सरायकेला-खरसावां, चाईबासा, खूंटी, सिमडेगा व गुमला के 55 प्रखंडों और 65 पुलिस थानों में फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे खेलों की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा. प्रतियोगिताओं में 14 से 19 वर्ष के युवा (लड़के-लड़कियां) हिस्सा ले सकेंगे. इस दौरान लोगों को मानव तस्करी, बाल विवाह, शिक्षा की आवश्यकता, डायन कुप्रथा, कुपोषण और पलायन के बारे में भी जागरूक किया जायेगा. पहले चरण में प्रतियोगिताओं का आयोजन थानों और प्रखंड कार्यालयों में किया जायेगा. उसके बाद जिला और फिर राज्यस्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी. 

कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत कर सुदूर ग्रामीणों को पहुंचाया जा रहा लाभ

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक राज्य सरकार अपने द्वारा शुरू की गयी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी पहुंचाना चाहती है. ऐसी योजनाओं में मुख्यमंत्री पशुधन योजना, झारखण्ड राज्य कृषि ऋण माफी योजना, झारखण्ड राज्य फसल राहत योजना, झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना सहित कई योजनाएं शामिल हैं. ग्रामीण क्षेत्र में रहकर खेल-कूद में नाम कमा रही तीन दर्जन खिलाड़ियों को सीधी नौकरी दी गई है. जिन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं, उनमें अधिकतर खिलाड़ियों को राज्य सरकार के स्तर से गृह विभाग में नौकरी दी गयी है. 

सीएम की सोच है कि नौकरी पाकर सम्मान के साथ जीवन जी पाएंगे ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी

मुख्यमंत्री का मानना है कि नौकरी पाकर ऐसे खिलाड़ी सम्मान के साथ रोजगार कर अपना जीवन जी पाएंगे. इसी तरह ग्रामीण इलाकों में खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना लायी है. वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना के तहत राज्य भर के ग्रामीण इलाकों में 5000 खेल के मैदान का निर्माण किया जाना है.

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