झारखण्ड : खनन क्षेत्र में स्थानीय को 75% रोजगार, तय टेंडर सहित पर्यावरण संरक्षण पर फोकस 

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खनन क्षेत्र में स्थानीय को 75% रोजगार

मुख्यमंत्री के प्रयास से अब खनन कंपनियों के लिए बाध्यकारी होगा कि वे 75% स्थानीय लोगों को दें रोजगार. तय टेंडर सहित पर्यावरण संरक्षण पर फोकस हो, हो रहा है काम

रांची :  ‘आपके अधिकार आपकी सरकार आपके द्वार’ के तहत प्रमंडल स्तरीय मेगा परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम को लेकर बीते दिनों सीएम दुमका पहुंचे थे. इस दौरान सीएम हेमन्त सोरेन ने खनन क्षेत्र के लोगों के हित में जो बातें कही, वह किसी को उम्मीद नहीं रही होगी. खनन क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों के रोजगार की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में कोयला कंपनियों को अब 75% स्थानीय लोगों को नौकरी देनी होगी. तभी राज्य सरकार द्वारा उन्हें कोल ब्लॉक में कोयला खनन करने दिया जाएगा. 

इसके अलावा कोयला खदानों में एक करोड़ तक का सारा ठेका स्थानीय विस्थापितों को देना होगा. ऐसा कर मुख्यमंत्री ने अपनी सोच को बता दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि खनन क्षेत्रों की स्थिति पर ध्यान में रखकर उनकी सरकार काम कर रही है. 

सामाजिक हित, पर्यावरण संरक्षण व आर्थिक विकास के बीच के संतुलन को भी जरूरी मानते हैं -सीएम

खनन क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के अलावा सीएम हेमन्त सोरेन “सामाजिक हित, पर्यावरण संरक्षण व आर्थिक विकास के बीच संतुलन” को भी जरूरी मान रहे हैं. पहले जब केंद्र सरकार कोयला खनन क्षेत्र में निलामी प्रक्रिया शुरू करने वाली थी, तब सीएम ने दो बातों पर फोकस किया था. पहला यह कि कोरोना संक्रमण और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक की वजह से नीलामी प्रक्रिया में रोक दें, क्योंकि कई देशी और विदेशी कंपनी भाग नहीं ले सकेंगी. 

दूसरा यह कि नीलामी प्रक्रिया को पूरा करने से पूर्व हमें “सामाजिक हित, पर्यावरण संरक्षण व आर्थिक विकास के बीच संतुलन करना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि एक अनुकूल नीतिगत ढांचा तैयार हो साथ ही विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जाए. 

पहली बार कोल कंपनियों में 75% स्थानीय को रोजगार, 1 करोड़ का टेंडर भी

14 नवंबर को अपने आवास पर सीएम ने केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कोल कंपनियों में 75% नौकरी स्थानीय को देने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड स्थित सभी कोल परियोजनाओं में नौकरी और एक तय की गयी राशि का टेंडर कांट्रैक्ट हर हाल में स्थानीय को मिले. इस पर केंद्रीय कोयला मंत्री ने घोषणा कर कहा कि राजमहल तालझारी कोल परियोजना में अगले 2 साल तक के लिए एक करोड़ रुपये तक का टेंडर स्थानीय को दिया जायेगा. इसके अलावा आनेवाले दिनों में इसे सभी कोल कंपनियों में भी लागू किया जाएगा. 

स्थानीयता को रोजगार नहीं देने पर पहली बार किसी सीएम ने दिखाया है हिम्मत

खनन क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों द्वारा स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देने की घटना कोई पहली नहीं है. लेकिन पहली बार किसी सीएम ने हिम्मत दिखाकर कहा है कि बाहरी को काम मिलता है, रैयत टुकुर-टुकुर देखते हैं. दुमका दौरे पर सीएम ने स्थानीय लोगों को नौकरियों से वंचित रखे जाने पर नाराजगी जताकर कहा है कि हमारे राज्य को लोगों ने चारागाह समझ रखा है. आउटसोर्स कंपनियों के लोग अपने मन पसंद लोगों को अलग-अलग जगहों से लाकर अपने मन मुताबिक काम कराते हैं. यहां के लोग जो रैयत होते है, जमीन देकर विस्थापित होते हैं और टुकुर-टुकुर देखते रह जाते हैं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा अब झारखंड में ऐसा नहीं होगा. मुख्यमंत्री का केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात के दौरान उठाये मुद्दों को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.

जमीन अधिग्रहण, रैयतों को मुआवजा, विस्थापितों के पुनर्वास की समस्या पर भी है सीएम का ध्यान

मुलाकात में सीएम ने खनन क्षेत्र में रहने वाले लोगों की कई समस्याओं को भी सामने रखा. उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राजमहल तालझारी कोल परियोजना, हुर्रा कोल परियोजना और सियाल कोल परियोजना के संचालन में कई तकनीकि समस्याएं आ रही है. इसके अलावा खनन क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण, रैयतों को मुआवजा, विस्थापितों के पुनर्वास की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. इसपर केंद्रीय कोयला मंत्री ने कोल खनन को लेकर राज्य सरकार की जो भी मांग है, उस पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया. 

सरकार का दावा, कोयला कंपनियों पर है 32,734 करोड़ रुपये बकाया 

बता दें कि राज्य सरकार का दावा है कि झारखंड में काम करनेवाली कोयला कंपनियों पर 32,734 करोड़ रुपये बकाया है. यह दावा कॉमन कॉज मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया है. राज्य सरकार कई बार कह चुकी हैं कि कोर्ट के नोटिस के बाद भी कोयला कंपनियां बकाया नहीं चुका रही हैं. राज्य में कोयला कंपनियों के नियंत्रण में 53064.25 एकड़ गैरमजरूआ भूमि है.

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