फर्जी डॉक्टयूमेंट से हेमंत सरकार को बदनाम कर रहे हैं रघुवर दास, जिलावार नियुक्ति में भाषा को लेकर अबतक नहीं हुआ कोई निर्णय

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हेमंत सरकार की स्थानीय नीति का विरोध करने वाले रघुवर भूल गये कि उनके अनूसचित और गैर अनुसूचित जिलों को बांटने की नीति से हजारों झारखंडी बच्चों का जीवन आज अधर में।

रांची। हेमंत सरकार को बदनाम करने के लिए भाजपा नेता हर तरह के आरोप लगाते रहे हैं। इसमें हेमंत सरकार में लगातार बढ़ रहे अपराध, ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल जैसे आरोप प्रमुखता से शामिल हैं। लेकिन भाजपा नेता के लगाये सभी आरोप जब निराधार साबित हुए, तो विधायकों के खरीद-फरोख्त का सहारा लिया गया। जब इसमें भी काम नहीं बना, तो भाजपा नेता अब फर्जी कागज के बल पर सरकार को बदनाम करने का साजिश रच रहे हैं। ठीक ऐसा ही एक नजारा रविवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में देखने को मिला। जब पू्र्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रेस वार्ता के दौरान वायरल एक कागज के सहारे हेमंत सरकार को बदनाम करना चाहा। पू्र्व मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों को बताया है कि जिलावार नियुक्ति में हेमंत सरकार ने जिन क्षेत्रीय भाषाओं का चयन किया है, उससे झारखंड के बेरोजगार युवक-युवतियों, आदिवासी-मूलवासी को नुकसान पहुचेगा। प्रेस वार्ता के दौरान पू्र्व सीएम ने एक फर्जी कागज भी दिखाया। लेकिन वाकई यह शर्म की बात हैं कि पूर्व सीएम को यह पता ही नहीं कि उनकेा दिखाया हुआ वायरल कागज पूरी तरह से फर्जी है.

हेमंत सरकार के लाये स्थानीय नीति की बुराई से पहले खुद की नीति की भी बात करते रघुवर दास।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य में पहली से दसवीं तक की पढ़ाई करने वाले बच्चों को झारखंड का स्थानीय निवासी माना। लेकिन हेमंत सरकार के लाये नयी स्थानीय नीति में वैसे छात्र-छात्राओं को झारखंडी माना है, जो राज्य में मैट्रिक और इंटर की पढाई करते है। ऐसे में देश के किसी भी राज्य का कोई भी झारखंड का निवासी बन सकेगा। यह आरोप लगाने से पहले रघुवर दास यह बताना भूल गये कि उनके स्थानीय नीति के तहत राज्य के सभी 24 जिलों को 11 गैर अनुसूचित और 13 अनुसूचित जिलों में बांटने का काम किया। लेकिन आज यह सभी देख चुके हैं कि इसका कितना नकारात्मक परिणाम शिक्षक नियुक्ति की तैयारी कर रहे झारखंडी बच्चों पर पड़ा है। आज मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसका एकमात्र कारण रघुवर दास की गलत नियोजन नीति ही है। हजारों बच्चों का भविष्य आज पूर्व मुख्यमंत्री के एक गलत निर्णय के कारण फंसा हुआ है। लेकिन हेमंत सरकार की नयी स्थानीय नीति का विरोध कर रहे रघुवर दास अपनी बनायी नीति की खामियों का जिक्र तक नहीं करना उचित समझा। मुख्यमंत्री ने तो झारखंडी बच्चों के हित में जिलों को बांटने की नीति को बदलने का फैसला लिया है। राज्य में 2018 में बनी 11 गैर अनुसूचित जिलों में लागू नियोजन नीति रद्द हो चुकी है। वहीं, 13 अनुसूचित जिलों में नियोजन नीति को रद्द करने का फैसला फरवरी माह में ही लिया गया था,लेकिन संकल्प जारी नहीं हुआ था। अब सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि मामला रद्द करने की फाइल राजभवन के पास भेजी गयी है।

छठी जेपीएसएसी की पूरी प्रक्रिया रघुवर दास ने ही की विवादित

प्रेस वार्ता के दौरान रघुवर दास ने छठी जेपीएसएसी परीक्षा को लेकर हेमंत सरकार को घेरा। रघुवर दास ने आरोप लगाया कि आज इस परीक्षा को हेमंत सरकार ने विवादित बना दिया। परीक्षा से हेमंत सरकार ने गलत नियुक्ति करने का काम किया। हाईकोर्ट ने परीक्षा पर लेकर जो निर्णय नहीं लिया, उसपर भी हेमंत सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया न ही दोषी पदाथिकारियों के खिलाफ कोई शिकायत किया। इस तरह का आरोप लगाने से पहले रघुवर दास यह बताना भूल गये कि छठी जेपीएसएसी को विवादित तो उन्होंने ही सीएम रहते बनाया। उनके ही नियुक्त अधिकारियों ने परीक्षा को विवादित बनाने की सलाह उन्हें दी। उनके नेतरहाट कैबिनेट के फैसले से न केवल आरक्षण नीतियां की धज्जियां उड़ायी गयी, बल्कि झारखंडी छात्र-छात्राओं को धोखा दिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तो आपके विवादित परीक्षा को सही करके झारखंड के बेरोजगारों के साथ न्याय करने का काम किया है। हालांकि हाईकोर्ट ने अब परीक्षा परिणाम में सुधार करने का निर्देश दिया है, इसपर झारखंड लोक सेवा आयोग आगे की कार्रवाई कर रहा है।

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