दीपक प्रकाश को भाजपा राज के 1 लाख रोजगार देने के वादे की सच्चाई बताना चाहिए

1 लाख रोजगार

दीपक प्रकाश को भाजपा राज के झारखंडियो को 1 लाख रोजगार देने के वादे की सच्चाई जनता को बताना चाहिए, साथ ही बाबूलाल जब जेवीएम में थे तो इस मुद्दे पर कई सवाल उठाये थे, अब जब वह भाजपा में ही हैं, तो जाहिर है उन्हें जवाब मिल गया होगा – जनता के समक्ष लायें

मुख्यमंत्री के 15,000 झारखंडियो को रोज़गार देने की घोषणा से घबराई प्रदेश बीजेपी 

रांची। कोरोना काल से मौजूदा झारखंड सरकार जैसे-जैसे उबर रही है, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य के युवाओं के लिए रोज़गार के कई विकल्प के ठोस संकेत कई मंचों से दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने दुमका दौरे में साल 2021 को उम्मींदों का साल बताते हुए, मार्च 2021 तक 10,000 से 15,000 झारखंडी युवाओं को नौकरी मुहैया कराने की घोषणा की है। साथ ही स्वरोजगार से लोगों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे एक्शन प्लान भी अपने गति में है। 

हेमंत की प्रशासनिक कार्यशैली व घोषणाओं से प्रदेश बीजेपी सकते में है और उनके नेताओं की बेतुकी बयान-बाजी साफ़ तौर पर भाजपा के भीतर की घबराहट प्रदर्शित कर रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश शायद हेमंत सोरेन की तुलना अपने रघुवर साहेब से कर रहे हैं। यही वजह है कि वह 15 हजार युवाओं को रोज़गार देने के CM के वादे को छलावा बता रहे हैं। या फिर उनके पास जायज़ मुद्दा न होने की स्थिति में भ्रम की राजनीति कर रहे हैं।  

1 लाख रोजगार

तय तो अंततः उन्हें या राज्य के जनता को ही करना है, क्योंकि पूर्व की भाजपा सरकार ने जिस प्रकार राज्य से नक्सलवाद ख़त्म किया ठीक उसी प्रकार झारखंडियों को 1 लाख रोजगार भी दे दी थी! दीपक प्रकाश को आरोप लगाने से पहले जनता को जरूर बताना चाहिए कि जनवरी 2019 में बड़े तामझाम के साथ 1 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी देने का जो वादा उनकी पार्टी के रघुवर सरकार ने किया था, उसमें कितनी सच्चाई है। क्योंकि हेमंत सोरेन के वादे का फैसला तो मार्च के बाद ही संभव हो सकेगा।  

7000 से 8000 वेतन पर 1 लाख रोज़गार मिलना क्या किसी छलावा है? 

ज्ञात हो, पूर्व की रघुवर सरकार में, जनवरी 2019 में एक ग्लोबल स्किल समिट का आयोजन रांची के खेलगांव स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में हुआ था। समिट का उद्देश्य ने राज्य में कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए देश-विदेश की कंपनियों को आकर्षित करना बताया गया था। तत्कालीन सीएम ने इस दौरान मौखिक तौर पर एक लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्रों में नियुक्ति पत्र देने का रिकार्ड भी बनाया था! 

इस मौके पर रघुवर दास ने Global Skill Summit 2019 के महिमामंडन में बताया था कि राज्य के युवाओं को एक नई दिशा मिली है। राज्य के हुनरमंद युवा को अपने कौशल से विकास को एक नई गति देंगे। लेकिन, रघुवर दास का यह दावा एक बड़ा छलावा था और इसके आड़ में केवल राज्य की बहुमूल्य ज़मीनों की लूट हुई। 

क्योंकि, रघुवर सरकार ने कभी इतना रोज़गार युवाओं को कभी दिया ही नहीं दिया था। अगर किसी को रोज़गार मिला भी तो वह बड़े-बड़े मेट्रोपोलिटन सिटी में महज 7000 से 8000 की। नतीजतन  घर छोड़ नौकरी की तलाश में बाहर गये इन युवाओं की स्थिति और बदतर हो गयी। साथ ही इन युवाओं का हुनर के साथ भी कोई न्याय नहीं हुआ। 

हेमंत सरकार ने अब ऐसे हुनरमंदों को रोज़गार देने का लिया है ज़िम्मा

हेमंत सोरेन की सरकार ने अब रघुवर राज में छले गये हुनरमंद युवाओं को रोज़गार देने का ज़िम्मा उठा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर राज्य में शहरी और ग्रामीण इलाकों की ज़रूरतों के हिसाब से रोज़गार से जुड़ी योजनाएं तैयार हो रही है। हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा रोज़गार सृजन करना सरकार की विशेष प्राथमिकताओं में शामिल हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार कार्य योजना तैयार कर रही है। बीते दिनों सभी विभागों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को हर क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाएं तलाशने के कड़े निर्देश दिये गये हैं।

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