किसानों का मसीहा कहने वाले सरकार के राज में फिर किसान ने की ख़ुदकुशी

किसानों का मसीहा के राज्य में किसान ने की आत्महत्या

खुद को किसानों का मसीहा कह शेखियां बघारने वाली सरकार के दावों वादों के बीच, गढ़वा के किसान ने आखिरकार सपरिवार मौत को गले लगाया  झारखण्ड राज्य में खुद को किसानों का मसीहा कह शेखियां बघारने वाली सरकार के दावों वादों के बीच, गढ़वा के धुरकी में कर्जे में फंसे किसान शिव कुमार बैठा ने … Read more

एससी/एसटी व गरीब बच्चों को मिली स्वतंत्रता दिवस के पूर्व शिक्षा से आज़ादी मिली 

एससी/एसटी छात्रों की सीबीएसई ने 24 गुना शूल बढ़ायी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अनुसूचित जाति (एसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए 10वीं व 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना बढ़ोतरी कर इन समाज के लोगों को यह संदेश दे दिया है कि भूल जाएँ गुणवत्ता वाली शिक्षा। अब एससी/एसटी तबके के छात्रों को 50 रुपये के बजाय … Read more

रेमोन मैगसेसे अवार्ड रवीश कुमार को देने की घोषणा क्यों?

रेमोन मैगसेसे

मशहूर पत्रकार रवीश कुमार को रेमोन मैगसेसे अवार्ड देने की घोषणा हुई है, लेकिन इस विषय पर उनका अभी तक कोई बयान आधिकारिक नहीं आया है। हाँ उनके तमाम प्रगतिशील दोस्तों ने मुबारकबाद देनी शुरू कर दी है। सवाल है कि क्या खुद को पत्रकार कहने वाले लोग रमन मैगसेसे पुरस्कार की पृष्ठभूमि से वाक़िफ़ नहीं … Read more

स्वायत्त संस्थाएँ जब सत्ता के लिए काम करती हैं तब शुरू होती है लोकतंत्र की लिंचिंग  

स्वायत संस्थाएँ

सत्ता के इशारों पर नाचते स्वायत्त संस्थाएँ  “लोग कहते हैं आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्या होता है…? इससे यह सिद्ध होता है कि हम जीवित हैं, अटल हैं और मैदान से हटे नहीं हैं। हमें अपनी हार ना मानने वाले स्वाभिमान का प्रमाण देना था। हमें ये दिखाना है कि गोलियों और अत्याचारों … Read more

बिरहोर के प्रति रघुबर सरकार का रवैया उदासीन 

आदिम जनजाति के बिरहोर समुदाय का हालत झारखंड में बदतर

बिरहोर, भारत की एक प्रमुख जनजाति है। बिरहोर जनजाति के संबंध में ये मान्यता है कि ये जिस पेड़ को छू देते हैं उस पेड़ पर कभी बंदर नहीं चढ़ते। बिरहोर जनजाति में परिवार सामाजिक संगठन की मूल इकाई है। साधारणतह बिरहोर परिवारों की प्रकृति पितृसत्तात्मक होती है। एक परिवार में पति-पत्नी व उनके बच्चे … Read more

जनता के पैसे से खड़े रेल संसाधनों से निजी पूँजीपति मुनाफ़ा बटोरेंगे 

जनता के पैसे पर खड़े संसाधनों पर मौज उड़ाते पूंजीपति

जनता के पैसे पर खड़े संसाधनों पर मौज उड़ाते पूंजीपति निजीकरण के दृष्टिकोण से भाजपा सरकार द्वारा अब अपनी कुदृष्टि रेलवे पर बुलेट ट्रेन की गति से दौड़ा दिया गया है। हालांकि किश्तों में तो रेलवे का निजीकरण का दौर पहले ही शुरू हो चुका था, पर इस कार्यकाल में उसे और तेज़ कर दिया … Read more