एससी/एसटी व गरीब बच्चों को मिली स्वतंत्रता दिवस के पूर्व शिक्षा से आज़ादी मिली 

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एससी/एसटी छात्रों की सीबीएसई ने 24 गुना शूल बढ़ायी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अनुसूचित जाति (एसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए 10वीं व 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना बढ़ोतरी कर इन समाज के लोगों को यह संदेश दे दिया है कि भूल जाएँ गुणवत्ता वाली शिक्षा। अब एससी/एसटी तबके के छात्रों को 50 रुपये के बजाय 1200 रुपये का शुल्क देना अनिवार्य होगा। इनकी यह मंशा केवल एसी-एसटी के बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रति भी है, क्योंकि उनके भी शुल्क में दो गुनी बढ़ोतरी हुई है। 

यही नहीं अधिकारी के अनुसार 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अतिरिक्त विषयों के लिए भी अलग से एससी/एसटी छात्रों को 300 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। पहले अतिरिक्त विषय के लिए इन वर्गों के छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को भी अतिरिक्त विषय के लिए अब 150 रुपये के बजाय अब 300 रुपये का शुल्क देना अनिवार्य होगा। अधिकारी का कहना है कि, ‘‘जो छात्र अंतिम तारीख से पहले नई दर के अनुसार शुल्क जमा नहीं करेंगे उनका पंजीकरण नहीं होगा और वे 2019-20 की परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे।’’

हालांकि, ऑल इंडिया पैरंट्स एसोशिएसन ने सीबीएसई द्वारा परीक्षा फ़ीस में वृद्धि का विरोध करते हुए, इसे आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। एसोशिएसन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील अशोक अग्रवाल ने इसे असंवैधानिक और छात्रों की शिक्षा के अधिकार के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई का यह कदम गरीब जनता के शिक्षा पर प्रतिकूल असर डालेगा। कई छात्र संगठनों ने भी इसका विरोध किया और इसे आर्थिक और सामजिक रूप से पिछड़े समुदाय के छात्रों पर गंभीर हमला बताया। 

बहरहाल, ऐसा प्रतीत होता है कि एससी-एसटी व गरीब तबके के छात्रों को स्वतंत्रता दिवस से पूर्व ही शिक्षा से पूरी तरह आज़ाद कर देने की या तैयारी है। जहाँ झारखण्ड जैसे राज्य में एक तरफ हज़ारों सरकारी स्कूलों को बंद कर दिए जाने के बाद अब सीबीएसई के द्वारा ऐसा कदम उठाया जाना निश्चित तौर पर एससी/एसटी व गरीब छात्रों को शिक्षा से महरूम कर देने की एक साज़िश हों सकती है। एससी/एसटी तबके के बच्चे जो बमुश्किल अब किसी प्रकार स्कूली शिक्षा ले रहे हैं, वह भी सरकार खटक रही है, वह नहीं चाहती कि ये तबका पढ़े। केंद्र सरकार पहले तो एससी/एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृति का फंड कट किया और अब उनके फीस में लगातर वृद्धि कर रही है। ऐसे में इस सरकार को एससी/एसटी विरोधी न कहा जाए और क्या कहा जाए!

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