हेमंत सरकार बच्चों के हितैषी बन कर उभरी हैं

“बच्चों” के हितैषी हेमंत सोरेन झारखंड के भविष्य, बच्चों के बेहतर विकास के प्रति गंभीर

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बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हेमंत सोरेन उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, बौद्धिक क्षमता, सम्पूर्ण पोषण जैसे क्षेत्रों में कर रहे हैं ईमानदार प्रयास – हेमंत सोरेन व्यक्तिगत रूप से कई बच्चों का उठा रहे हैं पढ़ाई का खर्च। साथ ही राज्य के कई बेटियों का वयस्क होने तक प्रतिमाह 2,000 रूपये देने की शुरुआत की है सराहनीय सरकारी पहल।

झारखंड देश का पहला राज्य बना, विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त के लिए छात्र-छात्राओं को सरकार देगी आर्थिक सहयोग- 10 बच्चों का चयन 

कहते हैं बच्चे देश का भविष्य होते हैं और उस देश या राज्य का भविष्य बच्चों के बेहतर विकास, शिक्षा और उनके उज्जवल भविष्य पर निर्भर करता है। इसलिए राज्य या देश के मुखिया के लिए जरुरी होता है कि वह बच्चों के सम्पूर्ण विकास के प्रति जागरूक व संवेदनशील हो। ताकि देश का सुदृढ भविष्य निर्माण संभव हो। मोदी कार्यकाल में आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के मामले में भारत इराक़ से भी पिछड़ चूका है। जो देश के भविष्य के मद्देनजर गंभीर खबर हो सकती है।

पूर्व की भाजपा के रघुवर सत्ता में झारखंड के बच्चों का भविष्य अति चिंतनीय रहा। बच्चों के विद्यालय, शिक्षा, स्कॉलरशिप से लेकर पोषक तत्व तक में कटौती हुई। लेकिन मौजूदा दौर में हेमंत सरकार द्वारा बच्चे के भविष्य संवारने के दिशा में बेहतर व गंभीर प्रयास हो रहे हैं। जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि झारखंड के हर वर्ग के बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित हाथों में है। और हेमंत सरकार बच्चों के हितैषी बन कर उभरी हैं। एक साल के शासनकाल में श्री सोरेन ने राज्य के बच्चों अशिक्षित, कुपोषण से लेकर संकटो तक से बचाने का प्रयास किया है। 

विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक मदद की पहल, 10,000 पाउंड तक की मदद देने का निर्णय

बच्चों को उचित और आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में हेमंत सरकार ने कई पहल की है। इसमें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहयोग देना शामिल हैं। और ऐसा करने वाला झारखंड देश का पहला राज्य है। बुधवार को कैबिनेट बैठक में ऐसे 10 चयनित छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का फैसला भी हो चुका है। 

अनुसूचित जनजाति के 10 छात्र-छात्राओं को विदेश के चयनित विश्वविद्यालयों में कोर्स कराने के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। सरकार ऐसे छात्र-छात्राओं को मास्टर व एमफिल की डिग्री देने के लिए आर्थिक रूप से मदद करेगी। कोर्स के लिए छात्रवृत्ति के रूप में 10,000 पाउंड तक की मदद दी जाएगी। साथ ही उनके वीज़ा शुल्क, एयर टिकट, मेडिकल इंश्योरेंस और अन्य जरूरी खर्चों के लिए अलग से पौंड में राशि देगी।

डिजी स्कूल व लर्नेटिक ऐप से बच्चों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री जानते है कि कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी में सबसे ज्यादा प्रभाव स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं पर पड़ा है। राज्यस्तर पर बहुत बड़े पैमाने पर अभी पढ़ाई के अन्य माध्यमों पर काम करने की आवश्यकता है। इसे ध्यान में रख सरकार ने डिजी स्कूल एवं लर्नेटिक प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। इससे छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में काफी लाभ मिलेगा। 

हर वर्ष टॉपरों को सम्मानित करने की हुई अनूठी पहल

राज्य में सीबीएसई, आईसीएसई जैक बोर्ड की मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में टॉपर आने के लिए मुख्यमंत्री ने एक अनूठी पहल शुरू की है। हेमंत ने घोषणा की है कि ऐसे सभी बच्चे जो मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में राज्यस्तर पर टॉपर होंगे, उन्हें सरकार हर वर्ष पुरस्कार के रूप में सहयोग राशि देगी। बीते दिनों ऐसे बच्चों को सम्मानित कर मुख्यमंत्री ने इस परंपरा की शुरुआत  कर दी है। 

बाल पत्रकारों से मिल हेमंत, – शिक्षा के साथ बच्चों को हुनरमंद बनाने हो रहा काम

बीते दिनों मुख्यमंत्री ने अपने आवास में बाल पत्रकारों से मुलाकात किये थे। इस दौरान उन्होंने पढ़ाई के बाद किसी विद्यार्थी के लिए रोजगार के अवसर और इसकी जरुरत पर हर तरह के मदद का आश्वासन दिया। बता दें कि यूनिसेफ झारखंड में बाल पत्रकारों के लिए कार्यक्रम चला रहा है। इसमें बाल अधिकारों के बारे में जानकारी के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है। हेमंत ने कहा था कि बाल पत्रकारों के सामने काफी चुनौतियां हैं। इन चुनौती को आसान करने के लिए हमें मिलकर प्रयास करते रहना होगा।

संकटग्रस्त बच्चों को मदद पहुंचाने को बनाया सरकार ने अपनी जवाबदेही

मुख्यमंत्री शायद बच्चों को शिक्षित करने था उनके विकास में बाधक हर संकट को दूर की जवाबदेही अपनी प्राथमिकता बना चुके है। तमिलनाडु से राज्य की 22 लड़कियों को मुक्त कराने, मानव तस्करों द्वारा दिल्ली काम करने भेजी गईं रांची, गोड्डा, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, दुमका, लातेहार, सिमडेगा और गुमला की 45 बच्चियों के सकुशल घर वापसी कर उन्हें हरसंभव मदद पहुंचाना इसी का हिस्सा है। 

एक बच्चे का संपूर्ण पढ़ाई वहन करना और कई बच्चियों को व्यस्क होने तक 2,000 रूपये की मदद 

बच्चों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने कई बार आगे बढकर प्रयास किये हैं। बीते दिनों उन्होंने राजमहल सांसद के साथ मिंलकर सुंदरपहाड़ी में रहने वाले 9वीं कक्षा के एक बच्चे की पढ़ाई का खर्च वहन करने की जिम्मेवारी ली थी। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा मुक्त करायी बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में भी ठोस निर्णय लिये। जहाँ उन्होंने इन बच्चियों को वयस्क होने तक प्रतिमाह 2,000 रुपये देने का फैसला लिया।

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