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झारखंडीबच्चियों की घर वापसी

ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शिकार झारखंडी बच्चियों की बहन बता घर वापसी, रोजगार व आर्थिक मदद देंगे सीएम

आंक़ड़ों के मुताबिक अब तक 70 के करीब बच्चियों को ह्यूमन ट्रैफिकिंग के चंगुल से मुक्त कराया जा चुका है

कोरोना संकट में अन्य राज्यों में फंसी बच्चियों के मदद के लिए भी संबंधित राज्य के मुख्यमंत्रियों से बात कर राहत पहुंचा रहे हैं हेमंत

रांची। कोरोना संकट के इस दौर में झारखंड के दबे-कुचले, गरीब लोगों के समक्ष जीविका का संकट है। इस संकट में ह्यूमन ट्रैफिकिंग में लगे लोग सक्रिय हो उठे है। जीविका के संकट से जुझ ऐसे गरीब परिवार पर इन ह्यूमन ट्रैफिकिंग वालों की विशेष नजर हैं। वे इनके बच्चे-बच्चियों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्य में ले जाकर आर्थिक, मानसिक व शारीरिक शोषण करते रहे हैं। लेकिन अब इन ह्यूमन ट्रैफिकिंग के समक्ष ऐसे मुख्यमंत्री ने दस्तक दी हैं, जो न केवल झारखंडी बच्चियों को इनके चंगुल से बचाने का बीड़ा उठाये है, बल्कि उनकी घर वापसी कर रोजगार व आर्थिक मदद का भी दे रहे हैं। 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस तरह इन बच्चियों को बहन बताकर राज्य को ह्यूमन ट्रैफिकिंग की दंश से मुक्ति दिलाने का बीड़ा उठाया है, वह काबिले तारीफ है। इसी का परिणाम है कि अपने प्रयासों से उन्होंने न केवल ह्यूमन ट्रैफिकिंग में फंसी 70 बच्चियों को एयरलिफ्ट कराया, बल्कि कोरोना काल में कई बच्चियों के मदद के लिए संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से बात कर उचित कार्रवाई की मांग तक कर दी है। 

रोजगार के साथ आर्थिक मदद का भरोसा

बीते कुछ माह पहले ह्यूमन ट्रैफिकिंग में संलिप्त दलालों ने रांची, गोड्डा, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, दुमका, लातेहार, सिमडेगा और गुमला की कई बच्चियों को दिल्ली काम करने के लिए भेज दिया था। मुख्यमंत्री को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने व्यक्तिगत प्रयासों से इनके घऱ वापसी का निर्देश अधिकारियों को दिया। सीएम के निर्देश के बाद करीब 45 बच्चियों को एयरलिफ्ट कर वापस उन्हें घऱ लाया। सीएम ने इन 45 बच्चियों में जो 18 साल के उपर की हैं, उनके रोजगार और इससे नीचे की उम्र वाली बच्चियों को 18 साल पूरा होने तक प्रतिमाह 2000 रूपये देने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं एयरलिफ्ट कराये इन समूहों में एक बच्चा है, जो पढ़ने में काफी तेज है, उसके जीवन भर की पढ़ाई का खर्च उठाने की पहल उन्होंने अपने सहयोगी राजमहल सांसद के साथ की। 

तमिलनाडु से मुक्त कराई गयी बच्चियों को सौंपा नियुक्ति पत्र

सीएम हेमंत का यह पहला प्रयास नहीं है। बीते माह उन्होंने तमिलनाडु से मुक्त कराई गई झारखंड की 22 लड़कियों को राजधानी के ओरमांझी स्थित टेक्सटाइल्स उद्योग मेसर्स किशोर एक्सपोर्ट में रोजगार हेतु नियुक्ति पत्र सौंपा। सीएम ने कहा कि झारखंड में कपड़ा उद्योग में व्यापक संभावनाएं है। आने वाले कुछ दिनों में इस सेक्टर में लगभग 8000 लोगों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है। यहां के युवक-युवतियों को अपने ही राज्य में रोजगार देने के इच्छुक कंपनियों को सरकार की ओर से सहयोग किया जाएगा।

111 छात्राओं को नर्स का काम करने के लिए दिया नियुक्ति पत्र

बीते 30 सितंबर को मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की SPV प्रेझा फाउंडेशन द्वारा संचालित चान्हो नर्सिंग कौशल कॉलेज में पढ़ाई कर चूकी 111 छात्राओं को नियुक्ति पत्र सौंपा गया। उन्होंने कहा कि झारखंड की यह बच्चियां अब मानव सेवा के जरिये खुद का आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करेगी। जहां पहले सभी बच्चियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के शिकार बनती थी, अब वे राज्य से बाहर जाकर बेहतर रोजगार कर सकेगी। सभी बच्चियां कुशल नर्सें बनेगी, जो पुणे, बेंगलुरु, मुम्बई, दिल्ली और झारखण्ड के अस्पतालों अपनी सेवाएं दे सकेगी। 

कोरोना काल में अन्य राज्यों में फंसी बच्चियों को पहुंचाया मदद

कोरोना संक्रमण के चरम दौर में यानी मई माह में तमिलनाडु में फंसी राज्य की 135 लड़कियों ने हेमंत सोरेन ने मदद मांगी थी। उनके फरियाद पर सीएम ने तत्काल ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से मदद देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तत्काल पहल के कारण उन बच्चियों को सरकारी मदद मिल सकी।

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