एकीकृत पारा शिक्षक संघ इकाइयों ने सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर बोला हल्ला

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एकीकृत पारा शिक्षक संघ

एकीकृत पारा शिक्षक संघ इकाइयों ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रघुवर सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर बोला हल्ला, जागरूक कर रहे हैं सभी कर्मचारी व कर्मियों को… 

झारखंडी बेरोज़गार युवावों की तरह अब राज्य के एकीकृत पारा शिक्षक संघ के इकाइयों ने भी सोशल मीडिया पर रघुवर सरकार के खिलाफ जंग छेड़ दिया है। वे सोशल के प्लेटफार्म के माध्यम से तमाम कर्मचारियों व अन्य कर्मियों से आग्रह कर रहे हैं कि वे आज से ही अपने ग्रुपों व रिश्ते-संबंधी से बीजेपी के खिलाफ उनके जो मुद्दे हैं, के खिलाफ सरकार की पोल खोलना शुरू कर दें। जैसे -झारखंड में 13-11 जिलों के रिजर्वेशन के खिलाफ, गलत स्थानीय नीति के खिलाफ, पारा शिक्षकों, आँगन बाड़ी सेविका-सहायिका व पोषण सखियों पर प्रशासन के बर्बरता के खिलाफ, LPG सिलेंडर की सब्सिडी को सीधा खातेदार के नाम डेबिट करने के आड़ में किये गए मूल्य वृद्धि के खिलाफ, पेट्रोल डीजल को महंगा करने के लिए GST से बाहर रखने के खिलाफ।

सरकारी विद्यालयों को मर्जर के नाम पर बंद करने के खिलाफ, शराब का ठेका देना व बालू घाटों के लाइसेंस अंतर्गत लाने के नाम पर बालू के मूल्य वृद्धि किये जाने के खिलाफ, जातीय प्रमाण की मान्यता एक साल करने के खिलाफ, आवासीय प्रमाण पत्र की मान्यता 3 साल करने के खिलाफ, ( वे कहते हैं कि क्या मानव का जाति और आवासीय इतनी जल्दी बदलती है ?), समय पर मानदेय का भुगतान न किये जाने के खिलाफ, मुख्यमंत्री जी का पूरे झारखंड में आशीर्वाद यात्रा, जन चौपाल जैसे चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी ख़ज़ाना खाली कर सकते हैं, लेकिन हम कर्मचारियों के वेतन की मांग पर इनके पास हमारे लिए न बजट है न पैसा। 

स्कूलों में बायोमेट्रिक उपस्थिति के दौरान मुख्यमंत्री जी का भाषण शुरू करना कहां तक उचित है? छात्रवृत्ति राशि कम बच्चों को भेजना कहाँ तक उचित है, बिजली बिल में वृद्धि, पानी की समस्या, चिकित्सा के लचर व्यवस्था व बीमा के नाम पर अपने चहेते पूँजीपतियों को फायदा पहुंचाना, सड़क की समस्या, नाली की समस्या, वाहनों के लाइसेंस के नाम पर जबरदस्ती बूढों तक के चमड़ी उधेड़ कर फ़ाइन वसूलना, झारखंड  सरकार की नियुक्तियों में दूसरे राज्यों की 80% बहाली, आदि तमाम समस्याओं से अपने क्षेत्र में लोगों अवगत कराने का अपील करते देखे जा रहे हैं। 

मसलन, राज्य के सभी वर्गों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, ताकि भाजपा सरकार का 65 पार का नारा, नारा ही बन कर रह जाए! ये यह भी सलाह दे रहे हैं कि अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में सम्मेलन करें ताकि ये सभी एक हो सके। 

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