झारखण्ड में सदन से सड़क तक भाजपा की दबंगई

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp

 

क्या विडम्बना है की जिस समय माननीय सर्वोच्च न्यायालय भीड़तन्त्र के खिलाफ इजाज़त नहीं दिए जाने का ऐलान कर रहा था , लगभग उसी समय भगवा गुण्डे एक 78 वर्षीय वृद्ध भगवाधारी को पीट कर पाकुड़झारखण्ड में कानून और व्यवस्था के साथ सर्वोच्च न्यायलय की गरिमा की धज्जियाँ उड़ा रहे थे!  – सुदीव्य कुमार सोनू

 स्वामी अग्निवेश को झारखंड में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने  17 जुलाई के दिन को भीड़ की आड़ में हमला करना दिखाता है कि हिटलर के ये वारिस अब किस हद तक आगे बढ़ चुके हैं। एक 80 साल के बुजुर्ग को सड़कों पर गिरा कर मारना और उनके कपड़े फाड़ना यही शुद्ध संघी संस्कृति है। गांधी की हत्या से लेकर दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी, गौरी लंकेश और इसके अलावा प्रोफेसर सबरवाल से लेकर तमाम बुद्धिजीवियों की हत्याओं मे उग्र हिंदुत्ववादी ताकतों का हाथ था। और इन ताकतों का असली संचालनकर्ता कौन है सबको पता है।

कुछ लोग सोचते थे कि इन गुंडा गिरोहों के हाथ सिर्फ मुस्लिमों और दलितों तक पहुंचेंगे लेकिन फासीवादी हर उस व्यक्ति तक पहुंचते हैं जो मानवता का समर्थक होता है और तर्क का वाहक होता है। स्वामी अग्निवेश भगवा कपड़ा पहन कर भी सुरक्षित नहीं है तो सोचिए कि आम लोगों के हालात क्या होंगे? दलितों और मुस्लिमों के हालात तो पहले ही बद से बदतर हो चुके हैं। गौरक्षा के नाम पर उनको भीड़ के द्वारा गलियों में मारा जा रहा है। अब जो भी इन ताकतों की जनविरोधी नीतियों का विरोध करेगा वह तो मारा जाएगा या आतंकित किया जाएगा।

ख़ैर जो भी हो मोदी जी ने जिस मानसिकता से रघुवर दास का चयनित मुख्यमंत्री पद के लिए किया था वह सिद्ध हो दिख रहा है। क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप बस एक कंप्यूटर के बटन वाला ‘इंटर’ चाहिए था जिसको वे बिना कुछ कहे दबा सके और काम हो जाय। और रघु राज भी उसी हिटलर के वंसज के भांति सदन में भी बिना कुछ सुने बस अपना ही राग अलापते है। झारखंड की तमाम जनता एवं विपक्ष भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के बैकडोर से पारित होने से गुस्से में हैं। गुस्सा होना भी लाजमी है क्योंकि प्रदेश की जनता इस भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के कारण उनकी जमीने लूट जाने के खतरे से सरकार से परेशान एवं डरी हुई हैं। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के झारखंडी होने के कारण उनसे इस राज्य की जनता की परेशानी देखी नहीं जा रही है जिसे लेकर वे और उनके साथी सदन में अड़ गए हैं। तमाम विपक्ष भी उनके साथ खड़ा दिख रही है। इससे इतर रघुवर दास को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपने घमंड के नशे में चूर हो सोचने लगे हैं कि वह जो सोचते हैं वही सही और वाही इस प्रदेश के लिए विकास है।

सदन में आज इस घमंड के कारण फिर उनका जुबाँ फिसला और कह गए कि विपक्ष घड़ियाली आँसू बहा रही है। इसलिए इस बिल पर कोई चर्चा नहीं होगी। कहीं न कहीं ये अप्रत्यक्ष तौर पर जनता के जनमुद्दों पर कठोर प्रहार कर रहे हैं। अंत में हेमंत सोरेन को उनकी घमंडीपंथी को देख कर कहना पड़ा कि वे अनुकम्पा पर चुनाव जीत कर नहीं आये है उन्हें जनता ने जिम्मेदारी दी है और जनता के सवाल उठान उनका फर्ज है। हालांकि उन्होंने आज पीसी कर प्रेस को बताया कि योजना, वित्त एवं नगर विकास मंत्री ने मिलकर लूट मचायी है। आगे उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं सब तोड़ दो इतने दिनों से क्या वे सो रहे थे? 7 करोड़ रुपये का काम बिरसा मुंडा पार्क में हुआ था, सब तुड़वा दिया, क्या यह मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों के निजी पैसों से बना था? क्या वित्त और योजना मंत्री, मुख्यमंत्री नहीं हैं? क्या देखा था इन्होंने जब स्कीम स्वीकृत की थी? हरमू नदी के लिए हमारी सरकार ने 80 करोड़ दिए थे, उसे भी मंत्रीजी पी गए। सीएम को दिखाई नहीं दे रहा है कि 100 करोड़ खर्च कर इन्होने नदी को नाला बना दिया। लूट मची है पूरी राज्य में और मुख्यमंत्री मीडिया के सामने नौटंकी कर रहे हैं।

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.