Bhimrao Ambedkar Awas Yojana

झूठी सूचना के माध्यम से भाजपा कर रही है प्रचार!

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 प्रधानमंत्री मोदी कई योजनाओं के शिलान्यास आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत 25 मई को झारखंड पहुँच रहे है। मुख्य रूप से वे धनबाद आयोजित अनुष्ठान में सशरीर उपस्थिति रहेंगे बाकियों का ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से शिलान्यास होना है। इस सन्दर्भ में विपक्ष का मानना है कि मोदी जी झारखण्ड प्रदेश में हो रहे उपचुनावों को प्रभावित करने की मंशा से पधार रहे हैं। इस दौरे के दौरान ही वे राज्य की मात्र पांच महिलाओं के अनुभव भी सुनेंगे। उनके आने के पहले झारखण्ड प्रदेश कि स्थितियों पर एक नजर डाल लेते हैं।

डॉ भीमराव अम्बेडकर आवास योजना

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मई 2016 में ग्रामीण इलाकों के विधवाओं को आवास उपलब्ध कराने के सम्बंध में डॉ भीम राव अम्बेडकर आवास योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सरकार को राज्य के ग्रामीण इलाकों में दो साल की अवधि में कुल 11000 आवास देने थे, जबकि ये अबतक एक भी प्रतिशत आवास विधवाओं को नहीं दे पाए हैं।

इस योजना के अंतर्गत अबतक जहाँ मात्र 69 आवास ही बन पाए हैं जोकि योजना प्रगति दर का मात्र 0.62 प्रतिशत है वहीँ आवासों की स्वीकृति की स्थिति भी काफी दयनीय है। आंकड़े बताते हैं, अबतक मात्र 36.36 प्रतिशत आवासों को ही स्वीकृति मिल पायी है। निष्कर्ष ये है कि 11000 आवासों में मात्र 4000 आवास ही स्वीकृत हो पाए हैं।

प्राप्त सूचना के मुताबिक इस योजना का प्रगति स्तर तकरीबन प्रत्येक जिले में खराब है। इस योजना का हश्र दयनीय होने के पीछे सम्बंधित अधिकारियों का प्रत्येक जिले में सुस्त रवैये को माना जा रहा है। समीक्षा रिपोर्ट में भी यही माना जा रहा है कि जिला स्तर पर विधवाओं को चिह्नित करने का कार्य न ईमानदारी से संपन्न किया जा रहा है और न ही अधिकारी यह तय कर पा रहे हैं कि योजना के मूल उदेश्यों को पूर्ण करते हुए किन विधवाओं को आवास की नितांत आवश्यकता है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि इस योजना के अंतर्गत सरकार और अधिकारी अपनी अपनी ढपली बजा रहे हैं।

 

मनरेगा योजना की स्थिति

झारखण्ड में उपचुनाव जैसे अतिसंवेदनशील स्थिति में रघुवर सरकार पर विपक्ष आरोप लगा रहे हैं कि इनके द्वारा लगातार मिथ्या से भरी हुई सूचनाओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार हो रहा है। इससे यहाँ की जनता भ्रमित एवं चुनाव प्रभावित हो रहा है।

सरकार के गलत प्रचार के कुछ उदाहरण :

आप नीचे देख सकते हैं कि राज्य सरकार किस प्रकार अपने ही केंद्र सरकार के आंकड़े को दरकिनार कर झूठे आंकड़ों का प्रत्यारोपण कर जनता को भ्रमित कर रही है।

           सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े   vs  आंकड़े की सत्यता  
प्रखंड  वर्ष  कुल कार्य  कुल खर्च राशि  vs कुल कार्य  कुल खर्च राशि 
पेटरवार 2015-2018 9448 2807.5 vs 1598 140.5
गोमिया 2015-2018 8767 3786.88 vs 1033 94.26
कसमार 2015-2018 6305 3358.23 vs 610 36.98

 

ऐसे ही झारखण्ड राज्य में मनरेगा मज़दूरों को समय पर भुगतान न होने जैसे कई अधिकारों का व्यापक स्तर पर उल्लंघन हुआ है।

  • 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण की माने तो अन्य राज्यों में काम करने के लिए पलायन करने वाले 15-64 साल उम्र वर्ग के प्रवासियो में 2015 -16 में झारखंड में ही सबसे अधिक थे।
  • पिछले 3 सालों में मनरेगा के अंतर्गत केवल 2% परिवारों को छोड़ कर बाकी परिवारों को औसतन 40 दिन का ही रोजगार मिला।
  • पांचवें वार्षिक रोजगारी-बेरोजगारी सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार झारखंड मेंबेरोजगारी दर 7 प्रतिशत थी, जबकि देश का औसत दर 5.5 प्रतिशत थी।

ज्ञात रहे, अन्य रोजगारों के पर्याप्त अवसरों के अभाव में राज्य के ग्रामीण परिवारों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत 100 दिनों की अकुशल मजदूरी का अधिकार ही यहाँ एकमात्र जीवन रेखा है।

 

मजदूरों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान का सत्य

पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में भाजपा सरकार ने अपनी पीठ खुद थपथपा कर बताई कि 94% मजदूरों को 15 दिनों के भीतर ही उनकी मजदूरी का भुगतान हो गया था, परन्तु यह तथ्य सत्य से परे एवं निराधार है। भुगतान लेने में भी मजदूरों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। जैसे :-

  • आधार नंबर की अशुद्ध इंट्री।
  • बैंक अकाउंट का आधार से लिंक ना हो पाना।
  • मास्टर रोल में मजदूरों का गलत जानकारी का नामांकन होना।
  • मजदूरी भुगतान किए बिना योजना का बंद किया जाना शामिल है।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

बकायदा पोस्टर जारी कर इनके द्वारा गलत प्रचार किए गए, उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है।

भाजपा प्रचार
भाजपा का झूठा प्रचार

जैसा कि देखा जा सकता है कि पोस्टर के माध्यम से गोमिया उपचुनाव में भाजपा प्रचार कर रही है कि इनकी सरकार ने पिछले चार वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत 280.08 करोड़ के राशि के कार्य हुए जबकि सच्चाई यह है कि पिछले चार वर्षों में PMGSY के तहत गोमिया में मात्र 37.47 करोड़ राशि के ही कार्य हुए हैं।

भाजपा के  प्रचार का सच
भाजपा द्वारा किए गए झूठे प्रचार का सच (उपर दी गयी संख्या लाख में है)

क्या शिलान्यास एवं सिर्फ पांच महिलायों के अनुभव सुन लेने मात्र से ही झारखण्ड की जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी पूरी हो जाती है या फिर उन्हें यहाँ की जनता को यहाँ हुए घोटाले एवं पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में बेंतेहाँ वृद्धि के बारे में कुछ जवाब देना चाहिए? राष्ट्र चैनलों पर किरकिरी होने के वावजूद भी झारखण्ड सरकार जनता को क्यों लगातार गलत सूचनाएं परोस रही है? उनको यहाँ हुए घोटाले एवं योजनाओं की विफलता जैसे जनमुद्दों पर भी सफाई देनी चाहिए। आशा करते हैं कि वे झारखण्ड आने पर सभी सवालों के जवाब जरूर देंगें।

बहरहाल, देखते हैं वह जवाब देते भी हैं या फिर बिना कुछ कहे ही अपने विमान के तरफ रुख करते हैं, वैसे भी उनके पास जनता के सवालों के लिए वक़्त कहाँ, उन्हें विदेश जो जाना होता है!

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