वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर भाजपा ने झारखंड सरकार को बदनाम करने का किया प्रयास

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बीजेपी नेता घर बैठे रच रहे हैं षड़यंत्र

निःशुल्क कफन योजना के मामले में वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर बीजेपी नेताओं ने नैतिक पतन की पराकाष्ठा पार करते हुए फिर दिखाई अपनी गंदी मानसिकता 

ज़मीनी हकीकत – बेहतर रणनीति व प्रबंधन से ही संक्रमण से निपटने के मामले में झारखंड पांच बेहतर राज्यों में हुआ है शामिल

रांची: भाजपा की असंवेदनशील नीतियों को लेकर सोशल मीडिया पर किरकिरी हो रही है. आमजन समेत बुद्धिजीवी व मीडिया जगत की आलोचनाओं से वह घिरी हुई है. कोरोना महामारी की दूसरी लहर में उसकी अपंग मानसिकता व कार्यशैली को लेकर सभी ने अपने सवाल तीखे कर लिए है. घबराई भाजपा को मजबूरन सोशल मीडिया पर नकेल कसने की चाल चलनी पड़ी है. Whatsapp को छोड़ तमाम सोशल मिडिया मुनाफे के मद्देनजर हथियार दाल भी दिए हैं. और सोशल मीडिया पर विपक्ष के पोस्ट यूजर्स तक कम, देर से या न के बराबर प्रसारित हो रहे हैं. जिसका फायदा उठा भाजपा के आईटी सेल रोज नया प्रोपेगेंडा या शिगूफा छोड़ लोगों को भरमाने के प्रयास में है. 

ज्ञात हो, केन्द्रीय सत्ता के शुरुआती काल से ही भाजपा अपने आईटी सेल के माध्यम से आधे अधूरे आंकड़े पेश करती आ रही है. जिसके कारण देश की स्थिति बुरी होते हुए भी ज़मीनी आंकड़े लोगों तक नहीं पहुँच पायी. पहले भी ऐसे वीडियो का प्रयोंग का भाजपा देश में आग लगा चुकी है. लेकिन तथ्य का जीता जागता उदाहरण झारखंड जैसे गरीब राज्य में देखा जा सकता है. झारखंड की गिनती देश में अति गरीब राज्य के रूप में है. यहाँ के अधिकाँश ग्रामीण जनता को दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए जूझना पड़ता है. यह वही राज्य है जहाँ भाजपा शासन में, सामान्य दौर में भी दर्जनों मौतें भूख से हुई. तो महामारी के दौर में उनकी स्थिति समझी जा सकती जा सकती थी.

लॉकडाउन से गरीब दोहरी आर्थिक तंगी की मार झेलने को विवश, भाजपा सत्ता को इससे कोई मतलब नहीं

राज्य में कोरोना संक्रमण के वेग को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से गरीब दोहरी आर्थिक तंगी की मार झेल रहे है. चूँकि झारखंड सरकार के बेहतर प्रबंधन में राज्य की स्थिति, बीजेपी शासित प्रदेश – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात सरीखी तो नहीं रही. जहाँ लोग गरीबी वश लाशों को नदियों में फेंकने को विवश हैं. जिसके वायरल वीडियो से देश सहम गया है. लेकिन इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि झारखंड में भी गरीबी अभिशाप बन जनता को घेरे हुए है. ऐसे में संक्रमण से किसी गरीब की मौत हो जाए, तो उसे कफन खरीदने में भी परेशानी हो सकती है. मसलन, झारखंड के मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों के लिए कफ़न मुफ्त मुहैय्या कराने की घोषणा की है.

लेकिन, जैसा कि सर्वविदित है झारखंड प्रदेश के बीजेपी नेताओं का काम केवल गाल बजाना या भ्रम फैलाना है. तो वह अपने एजेंडे पर संक्रमण के शुरुआती दौर से ही लगातार भिड़ी हुई है. और इस दफा भी सीएम के बयान के आधे-अधूरे डॉक्टर्ड वीडियो चलाकर व वैक्सीन वेस्टेज की झूठी सूचना फैला, सरकार को बदनाम करने की साजिश करती देखी गयी. ऐसा कर उन्होंने अपने नैतिक पतन की पराकाष्ठा पार की व फिर से एक बार गंदी मानसिकता का परिचय दिया है. जबकि ज़मीनी सच्चाई है कि मुख्यमंत्री की बेहतर प्रबंधन, बेहतर रणनीति का ही परिणाम है कि आज झारखंड कोरोना से निपटने में टॉप पांच राज्यों में शामिल हैं.

भाजपा क्यों नहीं मानती कि गंगा में बहते लाशों का एक वाजिब कारण गरीबी है 

ज्ञात हो, बीते दिनों गंगा नदी में कई संक्रमित बहती लाशें मिली. लाशें उत्तर प्रदेश से बहकर बिहार तक आयी थी. लोगों का मानना था कि कोरोना महामारी में लोग अपनों को खो रहे हैं. और गरीबी के हालात में अंतिम संस्कार के लिए कफन तक जुटा पाने की स्थिति में नहीं हैं. इसलिए उन्हें मजबूरन ऐसे कदम उठाने पड़े हैं. चूँकि लॉकडाउन जैसे कष्टदायक निर्णय से कपड़ों की दुकानें बंद है. लकड़ी की कीमत बढ़ने से अंतिम संस्कार का खर्च भी बढ़ गया है. इसलिए गरीब शवों को नदी में बहा रहे हैं. हालांकि भाजपा नेता का इसे जल समाधि का नाम दे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना, उसकी अपंग मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करते है.

मसलन, झारखंड में गरीबों के बीच ऐसी स्थिति न बने, इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा मुफ्त कफन योजना की घोषणा की गई. स्वंय मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन भी कह चुके है कि बीजेपी राज्यों की तरह झारखंड सरकार न ही अपने लोगों की लाश नदी में बहाने देगी और न ही बालू में जैसे-तैसे गाड़ने देगी. जिन्दगी तो कोरोना ने लील ही ली, लेकिन उसके शवों की अंतिम विदाई सम्मान पूर्वक अवश्य होगी.  

बाबूलाल भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की कर चुके हैं तारीफ, लेकिन अपंग संघी विचारधारा की राजनीति से ऊपर न उठ सके 

बीजेपी नेता मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पर लाख बेतुके आरोप लगाये, लेकिन उनके प्रमुख नेता बाबूलाल मरांडी अप्रत्यक्ष रूप से सीएम की रणनीति की तारीफ कर चुके हैं. उन्होंने खुद एक ट्वीट कर कहा है कि झारखंड में संक्रमितों की संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है. गिरावट में कमी आने का एक प्रमुख कारण मुख्यमंत्री की बेहतर रणनीति रही है. आज झारखंड देश के उन पांच राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जो कोरोना संक्रमण पर तेजी से काबू पाया है. राज्य की रिकवरी रेट करीब 93.2 प्रतिशत है. फिर भी भाजपा द्वारा आधा-अधुरा वीडियो पेश कर राजनीति करना क्या दर्शाता है?

निःशुल्क कफन और मौत पर आधी-अधूरी वीडियो चला गन्दी राजनीति करने वालों के लिए करारा जवाब है ऑडिट की घोषणा

झारखंड सरकार ने साहसिक फैसला लेते हुए राज्य के पांच प्रमुख शहरों में एक अप्रैल से हुए मौतों का ऑडिट कराने की घोषणा की है. इसके लिए दो अलग-अलग उच्च स्तरीय कमिटी गठित की गयी है. हेमन्त सरकार की यह घोषणा निःशुल्क कफन मुहैया और मौत पर गन्दी राजनीति करने वालों के लिए करारा जवाब हो सकता है. रांची, धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम और हजारीबाग उन शहरों में शामिल हैं. 

बता दें कि यह वहीं जिले है, जहां कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के प्रारंभिक चरणों में सबसे अधिक मौतें हुई. सरकार की इस घोषणा की तारीफ भी हो रही है. सीएम हेमन्त सोरेन का कहना कि हम अपने मृतकों को लावारिस नहीं मानेंगे, बल्कि पूरे रीति रिवाज व धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप सम्मानपूर्वक उन्हें विदाई देंगे. उनका जनता के प्रति संवेदनशीलता का स्पष्ट व इमानदार अभिव्यक्ति ही तो है. ऑडिट कराने का मुख्य उद्देश्य है कि सरकार जानना चाहती है कि क्या सरकारी आंकड़े वास्तव में जमीनी हकीकत से मेल खाती है या नहीं.

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