राज्य में चरम पर बेरोजगारी, शोषण व अत्याचार, फिर भी रघुवर को चाहिए 65 पार  

झारखंड राज्य

एक तरफ झारखंड में महँगाई, अनाचार, अराजकता, बेरोज़गारी, ग़रीबी आदि का जो आलम है वह किसी से छुपी नहीं है। दूसरी तरफ रघुबर जी लोकसभा चुनाव के नतीजों से इतने जोश में हैं कि खुद को झारखंड के मालिक समझ रहे हैं। ज़ाहिर है ऐसे में हर किसी को ये सरकार और “देशद्रोही’’ घोषित कर … Read more

बेरोज़गार युवा ने झारखंड में एक बार फिर हताश हो जिंदगी हारी

बेरोज़गार युवा

रघुबर दास के मुख्यमंत्री बनने के बाद से झारखंड में बेरोज़गारी तेजी से बढ़ी है। शरीर और मन से दुरुस्त लाखों पढ़े-लिखे युवा जो डीग्री से भी लैस हैं, बेरोज़गार हैं। उन्हें काम के अवसर से वंचित कर दिया गया है। जिसके वजह से ये बेरोज़गार युवा मरने, भीख माँगने या अपराधी बन जाने के … Read more

रामचरण मुंडा की भूख से हुई मौत को बीमारी से हुई बताने की जुगत में सरकार

रामचरण मुंडा

रामचरण मुंडा की पत्नी का ब्लडप्रेशर जांच कर एसडीओ साहेब ने बता दिया कि मौत भूख से नहीं हुई  गरीबी रेखा और ग़रीबों का मज़ाक उड़ाना ही झारखंड सरकार की सच्चाई बन गयी है। मूल प्रश्न तो यह है कि देश में अनाज की बहुलता होने के बावजूद भूख से क्यों मर रहे हैं? अधिकतर … Read more

मुख्यमंत्री जी के लिए अच्छा होता यदि दूसरों के बजाय अपने कार्यकाल का ब्यौरा देते

मुख्यमंत्री जी

प्रतीत ऐसा होता है कि केंद्र में भाजपा की सरकार फिर बनने से झारखंड के प्रवासी मुख्यमंत्री जी कुछ और अधिक अहंकारी होते दिख रहे हैं और इसी की आड़ में अपना भी बेड़ा पार कर लेना चाहते हैं। मुख्यमंत्री जी ने अपने बयान में कहा है कि झारखंड के तमाम विपक्षी दल विकास विरोधी … Read more

डीजीपी डी.के. पांडेय को रघुवर भजन के फल में मिली 50.9 डिसमिल झारखंडी जमीन

डीजीपी डी.के. पांडेय

डीजीपी डी.के. पांडेय ने खरीदी न बिक पाने वाली झारखंडी जमीन  पूँजीपति वर्ग ने पूरा जोर लगा कर मोदीजी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक इसीलिए पहुँचाया कि, आर्थिक मंदी दौर में वह उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों को तेज़ी और सख्‍ती से आगे बढ़ायेगा। इसके लिए उन्होंने  श्रम क़ानूनों और कम्पनी क़ानूनों में भारी बदलाव किया व … Read more

सरयू राय द्वारा पर्यावरण पर लिखा गया ख़त केवल मगरमच्छ के आँसू भर है

सरयू राय

सरयू राय जी पर्यावरण पर पत्र लिखकर आखिर क्या जाताना चाहते हैं? बताने की ज़रूरत नहीं है कि पर्यावरण के विनाश का नुकसान सबसे ज्यादा ग़रीब आम जनता को ही उठाना पड़ता है। 12-14 घण्टे रोज़ खटते हुए प्रदूषित हवा से लेकर प्रदूषित भूजल का सीधे उपयोग करते हुए, बीमारी तक ग़रीब जनता ही झेलती … Read more