भीड़ की आड़ में आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है
भीड़ तंत्र के रूप में समाज में बढ़ती हिंसा का सामाजिक संरचना से क्या रिश्ता है? दार्शनिक-वैचारिक स्तर पर हिंसा रक्तपात का समानार्थी शब्द नहीं है। पुराण कथाओं में भी तपस्या, वैराग्य और हृदय-परिवर्तन के प्रसंग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के संदर्भ में ही आते हैं। सामाजिक स्तर पर न्याय-अन्याय के बीच के फैसले निर्णायक हिंसात्मक … Read more