भयंकर महामंदी देश के दहलीज़ पर दस्तक देती हुई

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भयंकर महामंदी

एक तरफ मोदीजी बहुमत से सरकार में आ चुके हैं तो दूसरी तरफ 2008 से भी भयंकर महामंदी भी दस्तक दे रही है। कहा जा रहा है कि बार आने वाला इस भयंकर महामंदी का केंद्र (epicenter) और कोई अन्य महादेश नहीं बल्कि एशिया रहने वाला है और भारत व चीन जैसे देश इसके चपेट में आने वाली है। इन ख़बरों के बीच सरकार जिस निरंकुशता से केंद्र के साथ-साथ राज्यों को कर्ज में डुबो  चुकी है और साथ ही तमाम क़ानून को ताक पर रखते हुए कर्ज़ाखोर धन-पशुओं की मदद के लिए वित्त की लूट के रास्ते प्रसस्त कर चुकी है कि कुछ ही महीनों में यह स्थिति आ सकती है (आएगी) कि आप बैंक खुद के पैसे निकालने जाएँ और आपको बताया जाए कि आपके पैसे आपको नहीं मिल सकते, बैंक डूब चुका है। यकीन कीजिये, अर्थव्यवस्था की स्थिति मोदी, राहुल, मायावती, अखिलेश, ममता विमर्श से कहीं अधिक गंभीर  हो चुका है। नतीजतन गरीब जनता तो तबाह होगी ही, अच्छे ख़ासे स्थिति में चल रहे मध्यवर्गीय लोगों की हालत भी दयनीय होने वाली है, जो कि अति गंभीर विषय है।

उदाहरण के तौर पर झारखंड के दैनिकों में छपे शीर्षक “बजट आकार के करीब पहुंचा झारखंड पर कर्ज का बोझ” के अंतर्गत अंकित आंकड़े को देख कर भलीभांति समझ सकते हैं। जिसमे साफ़ दिखता है कि वित्तीय वर्ष (2018-19) तक राज्य सरकार पर कर्ज बढ़ कर चालू वर्ष (2019-20) के बजट आकार के करीब पहुंच गया है। साथ ही राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मुकाबले कर्ज बढ़ कर 29.74 प्रतिशत हो गया है। वर्ष के अंत तक कर्ज बढ़ कर बजट आकार से ज्यादा हो सकता है। जो कतई  अच्छे संकेत नहीं कहे जा सकते हैं। ज्ञात हो कि 2019-20 के लिए सरकार ने बजट का आकार 85429 करोड़ रुपये तय किया था। जबकि 31 मार्च 2019 तक कर्ज का कुल बोझ बढ़ कर 85234 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि आने वाले भयंकर महामंदी हमारे लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है।

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