झारखंडी जनता

झारखंडी जनता में हाहाकार ,फिर भी रघुबर को अहंकार

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झारखंडी जनता पस्त मुख्मंत्री रघुबर दास अहंकार में मस्त

झारखंड राज्य के मुखिया रघुबर दास जहाँ एक तरफ लोकसभा चुनाव के नतीजे से इतने अहंकारी हो गए हैं कि मीडिया के समक्ष ताल ठोकने से नहीं चूक रहे हैं कि, वे भले इस राज्य में जनता के लिए कुछ भी क्यों न करे लेकिन फिर भी आगामी विधानसभा में दो तिहाई बहुमत से जीतेंगे जबकि प्रदेश की हालत एक तरफ रख भी दें तो, राजधानी रांची की जनता मौजूदा वक़्त में भाजपा सरकार के नीतियों के अलावे अन्य कई मोर्चे पर एक साथ लोहा ले रही है     

बढती तापमान ने तो यहाँ की जनता को पहले से ही परेशान कर रखा है, ऊपर से सरकारी तंत्रों द्वारा बिजली कटौती व पानी की किल्लत ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है बिजली की आंख मिचौली का यह सिलसिला लगातार तकरीबन पूरे रांची जारी है जिसके वजह से जहाँ एक तरफ घरों के इन्वर्टर तक ने जवाब दे दिया है तो वाही लोग ( झारखंडी जनता ) बोरिंग से पानी भी नहीं भर पा रहे हैं राजधानी के कई हिस्से सप्लाई जल संकट झेल रहे हैं और नगर निगम का टैंकर भी पानी नहीं पहुंचा पा रही है

स्थिति यह है कि लोग पो फटते ही पानी के तलाश में निकल रहे हैं। मौजूदा सरकार के नीतियों ने तो पहले ही नदियों को मार दिया या मरने पर मजबूर कर दिया है, तालाब तो मार्च-अप्रैल में आखरी सांसे गिन चुकी है। सरकार के डोभा ने बच्चों के लीलने के कीमत पर भी न ही पानी दिया और न जल स्तर को ही बढाने में कामयाब रही। पूरी योजना विफल रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री जी द्वारा 62 सीट जीतने का दंभ भरना जरूर सवाल के घेरे में आता है। अब तो जनता ही जवाब दे इनके अहंकार को तोड़ सकती है।  

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