हशिये पर पहुँच चुके बाबूलाल को पता नहीं,“प्रतिभावान खिलाड़ी पीछे न छूटे, इसलिए हेमंत सरकार द्वारा दिया था एक माह का अतिरिक्त समय”

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp

हेमंत सरकार के चुनावी घोषणा पर सवाल उठाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री आखिर केंद्र की नीति पर सवाल क्यों नहीं उठाते?

रांची। कभी राजनीति के शिखर पर पहुंचने वाले भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी को यह आभास हो चुका है कि उनका राजनीतिक हशिये पर जा चुका है। ऐसे में उनका किसी भी तरह मीडिया में बने रहने की कोशिश जायज है। दुमका उपचुनाव के प्रचार के दौरान यह बात स्पष्ट तौर पर देखी गयी थी। जब विकास की बात करने की जगह उन्होंने केवल सोरेन परिवार पर इसलिए निशाना साधा, ताकि वे मीडिया की सुर्खियों में बने रहे। हालांकि जनता ने उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दे दिया। अपने पास कोई काम बचा नहीं देख बाबूलाल अब हेमंत सरकार के कार्यशैली व चुनावी घोषणा पर सवाल उठाने के प्रयास में है। ठीक ऐसा ही एक पोस्ट बाबूलाल ने अपने सोशल मीडिया “ट्विटर” पर किया है। उन्होंने कहा है कि एक माह पूरे हो गये, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के किये किये वादों के बाद भी राज्य के खिलाड़ियों की सीधे नियुक्ति नहीं हो पायी। लेकिन बाबूलाल को शायद यह पता ही नहीं कि सीधे नियुक्ति में राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियो छुट नहीं जाए, इसके लिए सीएम हेमंत सोरेन ने आवेदन करने के लिए ऐसे खिलाड़ियों को एक माह का अतिरिक्त समय दिया था।  

पारदर्शी तरीके से नियुक्ति व पोस्टिंग करने के साथ दिया एक माह का अतिरिक्त समय

राज्य गठन के बाद पहली बार बीते 8 अक्टूबर को सीएम हेमंत ने खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 24 जिलों में खेल पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपा था। सबसे बड़ी बात यह था कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने लॉटरी द्वारा पारदर्शी तरीके से इन पदाधिकारियों को जिलावार पोस्टिंग भी की थी। सीएम ने इस दौरान खिलाड़ियों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की थी। इसमें खिलाडियों के लिए नई खेल नीति और पोर्टल लाना शामिल था। सीएम का मानना था क इससे जहां युवा खिलाड़िओं को अपने हुनर को दिखाने का अवसर मिलेगा। वहीं पोर्टल पर मौजूदा खिलाड़ी, प्रशिक्षक रेफरी, सेवानिवृत्त खिलाड़ी अपना पूर्ण विवरण दर्ज करा सकेंगे, ताकि सरकार को इनकी सही जानकारी मिल सके। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि कुछ बच्चे सीधी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। पूर्व में सीधी नियुक्ति हुई थी। लेकिन इस दरमियान कई बच्चों ने अपना जौहर दिखाया हैं, ऐसे वे छूट ना जाये। इसलिए सरकार ने एक माह का अतिरिक्त समय दिया है ताकि बच्चे अपना आवेदन दे सकें।

जब राज्य की इतनी चिंता है, तो केंद्र के नीतियों पर सवाल क्यों नहीं उठाते बाबूलाल

बाबूलाल मरांडी को राज्य की इतनी ही चिंता है, तो झारखंड के साथ मोदी सरकार जिस तरह की नीतियां अपना रही है, उसपर वे सवाल क्यों नहीं खड़ा करते। यह जगजाहिर है कि राजनीतिक द्वेष के कारण केंद्र आज झारखंड को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। पूरे कोरोना काल में तो केंद्र ने राज्य को कोई आर्थिक मदद नहीं दी। उपर से जीएसटी मद के एक बड़ा हिस्से को नहीं देकर और डीवीसी के करोड़ बकाया राशि के लिए नाम पर करीब 1400 करोड़ रूपये काट कर मोदी सरकार ने सहकारी संघवाद पर भी चोट किया गया। लेकिन झारखंडी जनता के खिलाफ भाजपा के इस राजनीतिक षड्यंत्र को देखकर भी बाबूलाल अपनी आंकहें बंद किये हुए है।

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.