15 नवंबर विशेषांक : भगवान बिरसा के नाम पर राजनीति केवल करती रही भाजपा, आज भी विकास की बाट जोह रहा उलिहातू गांव

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भगवान् विरसा का गाँव उलिहातू

तीन केंद्रीय मंत्री (अमित शाह, राजनाथ सिंह और अर्जुन मुंडा) व पूर्व मुख्यमंत्री (रघुवर दास) उलिहातू का दौरा कर वादे तक किए, लेकिन काम आज तक नहीं हुआ शुरू 

राँची । झारखंड राज्य के बने आज 20 साल पूरे हो गए। जहाँ तमाम झारखंड वासीयो को राज्य गठन से बहुत उम्मीदें थी, वहीं उन परिवार के लोगों को भी उम्मीद थी जिनके कारण झारखंड अस्तित्व में आया। लेकिन जिस धरती आबा “बिरसा मुंडा” के जन्मतिथि को राज्य अस्तित्व में आया उनके परिवार तक के सपने पूरे न हो पाए। 20 सालों के इतिहास में करीब 16 वर्ष का राज्य में भाजपा की सत्ता रही, लेकिन जिस तरह भाजपा ने बिरसा मुंडा समेत राज्य के तमाम शहीद महापुरुषों के नाम पर राजनीति किया, वह निंदनीय के साथ चिंतनीय भी है। 

जिसके लिए भाजपा के तीन वर्तमान केंद्रीय मंत्री सहित पूर्व के मुख्यमंत्री लगाए गये। कमोवेश सभी ने धरती आबा के जन्म स्थल के उलिहातू को विकसित करने  के नाम पर गांव का दौरा भी किया। शहीद बिरसा मुंडा के गांव के विकास के वादे भी किये, केवल ढपोरशंखी वादे व वोट उगाही की राजनीति ही साबित हुई। उस गांव न तो आज तक विकास हुआ और न परिस्थितियां बदली। विडम्बना यह है वैसे भाजपा नेता को आखिर क्यों आज भी बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर श्रद्धांजलि देने में जरा भी हिचक महसूस नहीं होती। श्रद्धासुमन अर्पित करते वक़्त जब धरती आभा की आत्मा राज्य के प्रति उनके द्वारा देखे सपने की त्रासदी पर सवाल पूछती होगी तो इन नेताओं का ज़मीर क्या जवाब देती होगी?

अमित शाह का शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने का वादा झूठा साबित हुआ है 

ज्ञात हो कि भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में गृह मंत्री अमित शाह 17 सितंबर 2017 को धरती आबा के गांव पहुंचे थे। इस मौके पर अमित शाह ने कहा था कि ”राज्य के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों की जन्मभूमि, उनके गांव को आजादी के 75 साल तक किसी ने विकसित करने का कभी नहीं सोचा, लेकिन मोदी सरकार ने उन तमाम स्वतंत्रता सेनानियों के गांव को विकसित करने की योजना बनाई है। जिसके तहत आज वीर शहीद बिरसा मुंडा के गांव को विकसित करने की योजना शुरू हुई है। पूरे राज्य में शहीदों के 19 गांवों को विकसित करना उन स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा के आंगन में शहीद ग्राम विकास के अंतर्गत आवास योजना के लिए भूमि पूजन भी किया था। लेकिन अब तक एक घर का निर्माण तो दूर एक ईंट भी जोड़ी नहीं जा सकी है। और विकास बात जोहते जोहते रोजगार की तलाश में उलिहातू के कई युवा पलायन भी कर चुके हैं।

उलिहातू के विकास से ज्यादा राजनाथ ने भाषण बाजी ही की

13 अगस्त 2016 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी ‘जरा याद करो कुर्बानी’ कार्यक्रम के तहत उलिहातू पहुंचे थे। बिरसा मुंडा को नमन करते हुए उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए कहा था कि बिरसा मुंडा के बलिदान को देश कभी नहीं भूलेगा। लेकिन भाषणबाजी के अलावा उन्होंने गांव के विकास ज़मीन पर कोई ठोस कार्य नहीं की। 

वंशजों को शॉल देकर सम्मानित करने के नाम पर केवल राजनीति ही हुई 

5 जून 2019, विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री अर्जुन मुंडा उलिहातू गांव गाजे-बाजे के साथ पहुंचे। सांसद अर्जुन मुंडा ने भगवान बिरसा के वंशजों को शॉल देकर सम्मानित किया और मीडिया को दिखाया कि वे सभी इस मुद्दे पर काफी गंभीर हैं। भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों को संबोधित करते हुए कहा था कि धरती आभा के आंदोलन का मूल संदेश था कि प्रकृति के साथ सामंजस्य मिलाकर चलता जिससे जीव जंतुओं का अस्तित्व बरकरार रहेगा। लेकिन दुखद है कि बातों के अलावा सरकारी तो दूर व्यक्तिगत स्तर पर भी धरती आबा के गांव को विकसित करने में उनकी कोई विशेष प्रयास आज तक नहीं दिखा। 

रघुवर दास ने उलिहातू के 136 परिवारों को आवास देने की योजना बनायी थी, जो केवल कागज़ी साबित हुई 

इसी तरह रघुवर सरकार के समय कल्याण विभाग द्वारा राज्य के शहीदों के गांवों में आवास दिये जाने की बातें कही गयी थी। झारखंड के आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी, जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातू का ही था। जिसकी शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातू से की थी। योजना के तहत  8*9 फीट के दो कमरे, 6*6.6 फीट का एक किचन, 7*6.6 फीट का एक बरामदा, 4*4 का बाथरूम और 4*3 फीट का शौचालय की मॉडल वाली मकान बनाकर दिया जाना था। और उलिहातू के गांववालों के बीच बांटने के लिए कुल 136 आवास बनने थे। लेकिन यह काम केवल कागज़ी बन कर ही रह गया।

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