शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मद्देनज़र बेहतर काम करती दिखती है हेमंत सरकार

न्याय के मामले में संकट दौर में भी भाजपा शासित राज्यों से आगे है हेमंत का झारखंड

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टाटा ट्रस्ट की इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2020 – झारखंड ने न्याय के मामले में लगायी 8 पायदान की छलांग, अधिकांश भाजपा शासित राज्य पीछे 

“एक्सेस टू जस्टिस फॉर ऑल” से भी मुफ्त कानूनी सहायता या मुकदमा लड़ने के लिए वकील की मदद मुहैया कराने की हुई है पहल

हेमंत सोरेन के प्रयास से लोगों की आवास से दूरी घटी – मिल रही है समस्यायों के हल 

रांची। अलग झारखंड की अलख की बुनियाद यदि न्याय व अधिकार न मिलने की अक्स की उपज हो। और झारखंड गठन के बाद राज्य की प्रथम भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री ही अपने बेटे के हत्यारों को, 14 वर्षों के भाजपा शासन में न्याय न दिला पाए…। ऐसे में मौजूदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का आवास के खुले दरवाजे के साथ जनता को सुव्यवस्थित समाज व समय पर न्याय दिलाने की कवायद, न केवल तारीफ़ के, बल्कि अलग झारखंड की संघर्षीय भावना को उसके अर्थ तक पहुंचाने की भी क्रांतिकारी पहल माना जा सकता है। साथ ही लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक मजबूत पहल भी। 

इससे इनकार नहीं, भाजपा की 14 वर्षों का शासन झारखंड राज्य में वह परिस्थिति पैदा करे , जहाँ न्याय प्रणाली से लोगों का विश्वास उठे। गरीब को न्याय के खातिर परेशानियां झेलनी पड़े। जहाँ संस्थागत भ्रष्टाचार के अक्स में न्यायिक व्यवस्था की जटिलता मकड़जाल से भी अधिक अवरोध उत्पन्न करे। वहां किसी मुख्यमंत्री का महज 13 माह के कार्यकाल में लोगों को न्याय दिलाने की ईमानदार प्रयास प्रदेश की सतह पर उभरे। और उसकी वह प्रयास किसी जिम्मेदार संस्था की सर्वे में झारखंड को 8वां स्थान दिलाये। जो भाजपा के अधिकांश शासित राज्यों को मात देती हो, तो निश्चित रूप से झारखंडियों को नयी सुबह की आस जगाएगी। 

महज एक साल में आठ पायदान की छलांग आसान नहीं

यह उस सर्वविदित का भी हिस्सा हो सकता है, कि कोरोना संकट के दौरान तमाम गतिविधियां ठप रहने के बावजूद भी गरीब, दलित व दमित की पुकार हेमन्त सोरेन तक पहुंची और निराकरण भी हुआ। ज्ञात हो कि टाटा ट्रस्ट की ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2020’ के अनुसार न्याय दिलाने वाले 18 बड़े व मध्यम राज्यों की सूची में झारखंड 8वें स्थान है। जो तुलनात्मक तौर पर 2019 के भाजपा शासन में 16वां रैंक था। यानी कोरोना संकट के दौर में भी 8 पायदान का इज़ाफा कई सत्यों पर मुहर लगाती है। हरियाणा, बिहार, कर्नाटक, उतराखंड, उत्तर प्रदेश जैसे अधिकांश भाजपा शासित राज्य का झारखंड से पीछे होना इसकी पुष्टि करती है। 

लोगों तक मुफ्त कानूनी सहायता पहुँचाने के लिए लांच हुआ ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर ऑल’

लोगों में न्याय मिलने में आसानी हो इसके पीछे का कारण हेमंत सरकार की जनता के प्रति निष्ठा व ईमानदार प्रयास है। 26 नवंबर, संविधान दिवस के अवसर पर झालसा के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देश के सुरक्षित भविष्य के लिए, संविधान के आदर्शों की मजबूतीकरण पर जोर दिया था। इस दौरान उन्होंने मजबूत न्याय व्यवस्था पर भी जोर दिया था। लोगों को न्याय मिले, इसके लिए हेमंत सोरेन झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की ओर से बनाए गए एप ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर ऑल” को लॉन्च किया था। इस एप का उद्देश्य लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता या मुकदमा लड़ने के लिए अधिवक्ता की मदद पहुंचाना था। 

सीएम हाउस से लोगों की घटी दूरी,न्याय के लिए लगाता रहा जनता दरबार 

लोगों को त्वरित न्याय मिल सके, इसके लिए मुख्यमंत्री आवास तक लोगों की पहुंच हेमन्त सोरेन ने आसान बानायी है। एक साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऐसे तमाम परेशान लोगों से अपने आवास पर लगातार मिलते रहे हैं। और मुख्यमंत्री इनकी समस्याओं के निपटारे के लिए अधिकारियों को ऑन द स्पॉट निर्देश भी देते रहे हैं। साथ ही राज्य के सुदूर इलाकों में मुख्यमंत्री जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी और न्याय दिलाने की दिशा में सराहनीय प्रयास किये हैं।

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