मोबलिंचिंग पर कानून बनाने वाला पहला राज्य बना झारखण्ड. बिल सदन में पारित…

भारत 2014, सरकार बदलने के लिए सभी ने अपना मत दिया था. समस्याएं तो जस की तस रही, लेकिन मोदी सत्ता में भीड़ तंत्र सांप्रदायिक चोला ओढ़ वीभत्स रूप में समाज के सामने आया. मौतें तो हुई लेकिन हत्यारा कोई नहीं. इस दिशा में हेमंत सरकार ने देश भर में सबसे पहले मोबलिंचिंग पर कानून लाना एक सराहनीय व मानवीय प्रयास…

2014, भारत में सरकार बदलने के लिए सभी ने अपना मत दिया था. कारण थे घोटाले, महंगाई जन सरोकार इत्यादि. स्पेक्ट्रम घोटाला एक बड़े घोटाले के रूप में सामने था. अदालत का निर्णय आ चुका है. दोषी कोई नहीं पाया गया. मसलन, मोदी सत्ता के न्याय में दिखा कि यूपीए के शासन में घोटाला नहीं हुआ. लेकिन इस बीच भीड़ तंत्र ने सांप्रदायिक चोला ओढ़ वीभत्स रूप में समाज के सामने आया. मोबलिंचिंग ने कई जानें ली. कोई राज्य अछूता नहीं रहा. भाजपा शासित राज्यों में इसका तांडव चरम पर दिखा. झारखंड में तो भाजपा विचारधारा को न मानने वाले योगी पर भी प्रहार हुए. 

हेमन्त सरकार ने द झारखंड (प्रिवेंशन ऑफ लिंचिंग) बिल 2021, तैयार किया ड्राफ्ट 

इस मामले में झारखंड देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां मॉब लिंचिंग से मौत होने पर दोषी को मौत की सजा मिलेगी. मॉब लिंचिंग की घटना रोकने के लिए हेमन्त सरकार ने द झारखंड (प्रिवेंशन ऑफ लिंचिंग) बिल 2021 का ड्राफ्ट तैयार किया और सदन में पारित भी किया गया. राज्य सरकार झारखंड के लोगों की संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह बिल लायी है.

इसमें दोषियों के विरुद्ध तीन तरह की सजा का प्रावधान है. लिंचिंग की घटना में मौत होने पर दोषी को मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान है, ताकि राज्य में हिंसक भीड़ द्वारा गैर कानूनी ढंग से तोड़-फोड़, मारपीट की घटना में किसी को क्षति पहुंचाने या हत्या जैसी कृत्य का कोई दुस्साहस न करे. ड्राफ्ट को गृह विभाग द्वारा स्वीकृति दिए जाने के बाद, कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही यह जल्द कानून का रूप ले लेगा.

मोबलिंचिंग – गंभीर चोट पर दोषी को उम्रकैद तक की सजा  

  • लिंचिंग में किसी को चोट आती है तो दोषी को तीन साल तक की सजा और एक लाख रुपए से तीन लाख रुपए तक का दंड दिया जा सकेगा.
  • अगर किसी को गंभीर चोट आती है तो दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा और तीन से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकेगा.
  • अगर लिंचिंग की घटना में किसी की मौत हो जाती है तो दोषी को उम्रकैद से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकेगा.

साजिशकर्ता-उकसाने वालों को भी सजा का प्रावधान 

  • अगर कोई साजिश रचता है या किसी को लिंचिंग करने के लिए उकसाता है, किसी ढंग का मदद पहुंचाता है तो उसे उसी ढंग की सजा दी जाएगी.
  • अगर कोई आरोपी को गिरफ्तार करने में या सजा के दौरान बाधा पहुंचाता है, तो उसे तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना हो सकेगा.
  • लिंचिंग के अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वाले को भी अपराधी मान कर एक साल की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा.

मोबलिंचिंग का माहौल बनाया तो भी मिलेगी सजा 

  • अगर कोई लिंचिंग का माहौल तैयार करने में सहयोग करता है तो वैसे व्यक्ति को तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना होगा. 
  • दंडिता प्रक्रिया संहिता के तहत जांच के जो प्रावधान बताए गए हैं, वही प्रक्रिया यहां भी अपनाई जाएगी. 
  • इस अधिनियम से जुड़े अपराध गैरजमानतीय होंगे. इंस्पेक्टर से नीचे का कोई जांच अधिकारी नहीं होगा. विशेष परिस्थिति में सब इंस्पेक्टर को अधिकृत किया जा सकता है.

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