मोबलिंचिंग पर कानून बनाने वाल पहला राज्य बनने जा रहा है झारखण्ड

भारत 2014, सरकार बदलने के लिए सभी ने अपना मत दिया था. तमाम समस्याएं तो जस की तस रही, लेकिन इस बीच मोदी सत्ता में भीड़ तंत्र ने सांप्रदायिक चोला ओढ़ वीभत्स रूप में समाज के सामने आया. मौतें तो होती रही लेकिन हत्यारा कोई नहीं था. इस दिशा में हेमंत सरकार ने देश भर में सबसे पहले मोबलिंचिंग पर कानून लाने के लिए सराहनीय प्रयास किया है…

मोबलिंचिंग ने कई जानें ली. कोई राज्य अछूता नहीं रहा लेकिन हत्यारा कोई नहीं

भारत 2014, सरकार बदलने के लिए सभी ने अपना मत दिया था. कारण थे घोटाले, महंगाई, जन सरोकार इत्यादि. स्पेक्ट्रम घोटाला एक बड़े घोटाले के रूप में सामने था. हालांकि, अदालत का निर्णय आ चुका है. बस जान लीजिए दोषी कोई नहीं पाया गया. मसलन, मोदी सत्ता के न्याय में दिखा कि यूपीए के शासन में कभी कोई घोटाला नहीं हुआ. तमाम समस्याएं तो जस की तस रही, लेकिन इस बीच इसी सत्ता में भीड़ तंत्र ने सांप्रदायिक चोला ओढ़ वीभत्स रूप में समाज के सामने आया. इस मोबलिंचिंग ने कई जानें ली. कोई राज्य अछूता नहीं रहा. भाजपा शासित राज्यों में इसका तांडव चरम पर दिखा. झारखंड में तो तो भाजपा विचारधारा को न मानने वाले योगी पर भी प्रहार हुआ. 

देश भर में पहलू खान का मामला तो ज्यादा स्पष्ट है. मौत तो हुई, डाइंग स्टेटमेंट भी है, लेकिन अदालत ने किसी को दोषी नहीं पाया. निष्कर्ष क्या निकाला जाए तो हत्या ही नहीं हुई. दोनों मामलों में जिम्मेदार नागरिक को चिंतित होना चाहिए. हत्या ऑन कैमरा होती है, हत्यारे बाद में भी टेलीविजन पर कहते हुए दिखते हैं कि किस कारण मारा. लेकिन सजा किसी को नहीं होती. कहीं तो गड़बड़ी हुई. गड़बड़ी दोनों मामले में कहां है सभी को मालूम है. स्पेक्ट्रम घोटाले और पहलू खान मामले में फैसला हमारी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है. और जिम्मेदार नागरिक के रूप में इसमें सुधार की अपेक्षा की जानी चाहिए. लेकिन देश में पहली बार मोबलिंचिंग पर कानून लाने की दिशा में झारखण्ड सरकार ने पहल की है.

हेमन्त सरकार ने द झारखंड (प्रिवेंशन ऑफ लिंचिंग) बिल 2021, तैयार किया ड्राफ्ट 

इस मामले में झारखंड देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां मॉब लिंचिंग से मौत होने पर दोषी को मौत की सजा मिलेगी. मॉब लिंचिंग की घटना रोकने के लिए हेमन्त सरकार ने द झारखंड (प्रिवेंशन ऑफ लिंचिंग) बिल 2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. मसौदा में कहा गया है कि राज्य सरकार झारखंड के लोगों की संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह बिल ला रही है.

इसमें दोषियों के विरुद्ध तीन तरह की सजा का प्रावधान है. लिंचिंग की घटना में मौत होने पर दोषी को मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान किया गया है, ताकि राज्य में हिंसक भीड़ द्वारा गैर कानूनी ढंग से तोड़-फोड़, मारपीट की घटना में किसी को क्षति पहुंचाने या हत्या जैसी कृत्य का कोई दुस्साहस न करे. ड्राफ्ट को गृह विभाग द्वारा स्वीकृति दिए जाने के बाद, कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही यह जल्द कानून का रूप ले लेगा.

गंभीर चोट पर दोषी को उम्रकैद तक की सजा  

  • लिंचिंग में किसी को चोट आती है तो दोषी को तीन साल तक की सजा और एक लाख रुपए से तीन लाख रुपए तक का दंड दिया जा सकेगा.
  • अगर किसी को गंभीर चोट आती है तो दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा और तीन से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकेगा.
  • अगर लिंचिंग की घटना में किसी की मौत हो जाती है तो दोषी को उम्रकैद से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकेगा.

मोबलिंचिंग पर कानून – साजिशकर्ता-उकसाने वालों को भी सजा का प्रावधान 

  • अगर कोई साजिश रचता है या किसी को लिंचिंग करने के लिए उकसाता है, किसी ढंग का मदद पहुंचाता है तो उसे उसी ढंग की सजा दी जाएगी.
  • अगर कोई आरोपी को गिरफ्तार करने में या सजा के दौरान बाधा पहुंचाता है, तो उसे तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना हो सकेगा.
  • लिंचिंग के अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वाले को भी अपराधी मान कर एक साल की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा.

लिंचिंग का माहौल बनाया तो भी मिलेगी सजा 

  • अगर कोई लिंचिंग का माहौल तैयार करने में सहयोग करता है तो वैसे व्यक्ति को तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना होगा. 
  • दंडिता प्रक्रिया संहिता के तहत जांच के जो प्रावधान बताए गए हैं, वही प्रक्रिया यहां भी अपनाई जाएगी. 
  • इस अधिनियम से जुड़े अपराध गैरजमानतीय होंगे. इंस्पेक्टर से नीचे का कोई जांच अधिकारी नहीं होगा. विशेष परिस्थिति में सब इंस्पेक्टर को अधिकृत किया जा सकता है.

मोबलिंचिंग पर कानून – नोडल अफसर सह स्टेट कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति करेंगे डीजीपी

डीजीपी लिंचिंग को लेकर एक नोडल अफसर सह स्टेट कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति करेंगे, जो आईजी रेंक से नीचे के अधिकारी नहीं होंगे. नोडल अफसर लिंचिंग की घटना की मॉनिटरिंग करेंगे. नोडल अफसर हर महीने लोकल इंटेलिजेंस के साथ बैठक कर समीक्षा करेंगे. इसके अलावा प्रत्येक जिले में एसपी या एसएसपी कोऑर्डिनेटर होंगे, जिन्हें डीएसपी स्तर के अधिकारी सहयोग करेंगे. डीसी को अधिकार होगा कि लिंचिंग की आशंका हो तो वे लिखित आदेश जारी करेंगे.

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