खाद्य सुरक्षा: आरोप लगा रहे बीजेपी नेता भूल चुके हैं – जरूरतमंदों को 6 माह तक खाद्यान्न देने की सबसे पहली मांग हेमंत ने ही की थी

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खाद्य सुरक्षा

खाली बैठे प्रदेश बीजेपी नेता कर रहे नकारात्मक राजनीति, खाद्य सुरक्षा को लेकर सक्रियता से काम कर रही हेमंत सरकार 

रांची। राज्य के गरीब व वंचित लोगों को सही तरह से राशन मिलना सुनिश्चित हो, इसके लिए हेमंत सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है। मुख्यमंत्री को जैसे ही किसी जिले में राशन से वंचित लोगों की जानकारी मिलती है, वे संबंधित जिला प्रशासन को तत्काल निर्देश देते है। निर्देश के बाद त्वरित कार्रवाई भी होती दिखती है। वंचितों को राशन मिलना भी सुनिश्चित होता है। छूटे लाभुकों को खाद्य सुरक्षा मिले, इसके लिए हेमंत सरकार खाद्य सुरक्षा कानून भी लेकर आयी है।

लगता है मुख्यमंत्री की यह बढ़ती लोकप्रियता से प्रदेश जपा परेशान है। यही कारण है कि बीजेपी नेता खाद्य सुरक्षा को लेकर नकारात्मक राजनीति करने से बाज नहीं आते। बीते दिनों राजधानी के मलार कोचा (वार्ड- 37) में छूटे हुए लोगों का आधार और राशन कार्ड बनाकर खाद्य सुरक्षा देने की पहल के बाद ही बीजेपी पूरी तरह से परेशान दिख रही है।

प्रदेश बीजेपी नेता यह भूल गये है कि कोरोना काल में झारखंड का कोई जरूरतमंद भूखे नहीं रहे, इसलिए मुख्यमंत्री ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने मांग की थी कि संकट की इस घड़ी में जरूरतमंदों को अगले 6 महीने के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। हेमंत सोरेन गरीबों के हित में पत्र लिखने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री या नेता थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सुझाव को मान देशभऱ में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर तक जारी रखने की घोषणा भी की थी।

बीजेपी कहती है कि राज्य सरकार संवेदनहीनता से काम कर रही है

प्रदेश बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार पर संवेदनहीनता से काम कर रही है। सरकार गरीबों की खाद्य सुरक्षा के प्रति बिलकुल गंभीर नही है। कोविड महामारी मे राशन कार्ड धारक राशन के लिए इंतज़ार में बैठे हैं। झारखंड की जनता को इस महीने केंद्र सरकार की योजना का लाभ मिल पाया है। फिर बीजेपी कैसे आरोप लगा सकती है कि सरकारी गोदाम में रखे जिस अनाज कुव्यवस्था की भेंट चढ़ता रही है।

जानकारी मिलते ही 100 लोगों का बना राशन व आधार कार्ड

बीते दिनों मुख्यमंत्री से वीडियो साझा कर जानकारी दी गई थी कि मलार कोचा के लोग राशन और आधार कार्ड से वंचित हैं। बस्ती के कम से कम 100 ऐसे परिवार हैं, जिनके पास आधार या राशन कार्ड नहीं है। जिंदगी बमुश्किल गुजर रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने त्वरित गति से जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे सभी परिवारों को उचित मदद एवं सरकारी अधिकारों से जोड़ा जाए। निर्देश मिलते ही मलार कोचा में छूटे लोगों के आधार और राशन कार्ड बनवाने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। मलार कोचा के योग्य लाभुकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल से मुख्यमंत्री की लोकप्रियता काफी बढ़ी। 

बीजेपी के सताए लोगों को हेमंत सरकार देने वाली है खाद्य सुरक्षा, 15 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ

राज्य के 15 लाख लाभुकों को प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न 1 रुपये प्रति किलो की दर देने के लिए सरकार ने राज्य खाद्य सुरक्षा योजना की घोषणा पहले ही कर दी है। कैबिनेट की बैठक में भी इस योजना की स्वीकृति मिल चुकी है। सरकार का मानना है कि जिन गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ नहीं मिल रहा था, वैसे 15 लाख परिवारों को इस योजना से लाभ मिलेगा। आज इन लाभुकों को इसलिए भी खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता है क्योंकि पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में कुल 11.30 लाख परिवारों का राशन कार्ड बिना कारण बताये रद्द किया गया था। बीजेपी के पूर्व दिग्गज नेता सरयू राय ने इस पर सवाल भी खड़े करते रहे थे।

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