झारखण्ड के भविष्य के दृष्टिकोण से नीति निर्धारण के मद्देनज़र जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण

सुदिव्य कुमार : अलग राज्य के लिए की गयी कुर्बानी को सार्थक करना. विजनरी राजनीतिक नेतृत्व और राजनीतिक चेतना की जरूरत. संसाधनों पर मूलवासियों का हो प्राथमिक हक. खनन नहीं पर्यावरण हो झारखण्ड की पहचान. स्थानीयता का परिभाषित होना अनिवार्य..

रांची : झारखण्ड के भविष्य के दृष्टिकोण से यह महीना कई मायने में महत्वपूर्ण है. एक तरफ कैबिनेट बैठक में निजी क्षेत्र नियुक्तियों में 75% पदों पर स्थानीय के आरक्षण नियमावली को पेश होना है. वहीं 29 जुलाई से 5 अगस्त होने वाली मानसून सत्र में उच्च शिक्षा से संबंधित विधेयकों को रखा जाना है. विधेयकों के फेहरिस्त में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी को यूनिट मानकर नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न करने से संबंधित संशोधन विधेयक, पंडित रघुनाथ मुर्मू ट्राइबल यूनिवर्सिटी के अलावा स्किल यूनिवर्सिटी से संबंधित विधेयक को पेश करने की तैयारी है.

ज्ञात हो, ट्राइबल यूनिवर्सिटी विधेयक पूर्व में विधानसभा से पारित कराया गया था, लेकिन इसके अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में भाषाई विसंगतियों के कारण राज्यपाल द्वारा लौटाया दिया गया था. त्रुटियों को दूर कर फिर से विधानसभा से पारित कराया जाएगा. इसी दौरान झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार द्वारा दिए गए इंटरव्यू बहुत हद तक हेमन्त सरकार की मंशा साफ़ करती है.

सुदिव्य कुमार द्वारा दिए गए इंटरव्यू के मुख्य बिंदु

  • अलग राज्य के लिए की गयी कुर्बानी को सार्थक करना 
  • विजनरी राजनीतिक नेतृत्व और राजनीतिक चेतना की जरूरत 
  • राज्य के संसाधनों पर मूलवासियों के प्राथमिक हक की स्थापना 
  • खनन नहीं पर्यावरण, बने झारखण्ड की पहचान 
  • हकों के लिए स्थानीयता का परिभाषित होना अनिवार्य

सुदिव्य कुमार –“स्पष्ट है कि झारखण्ड के लोगों का जीवन स्तर ठीक नहीं है. ऐसे में मानव संसाधन के क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की जरुरत है. मानव विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल, पर्यटन, कृषि, मत्स्यपशुपालन, अन्य व्यवसाय के क्षेत्र में काफी सुधार करने की जरूरत है. यहां के छात्र कई प्रतियोगिता परीक्षा में पिछड़ जाते हैं. अंग्रेजी बोलने लिखने में झिझक होती है. सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति बदलनी होगी. प्राइवेट स्कूलों की तरह सीबीएसई सिलेबस सरकारी स्कूलों में लागू करना होगा. प्रयोग के लिए अभी राज्य के 80 मॉडल स्कूलों का चयन हुआ है. अन्य स्कूलों में भी बदलाव लाया जायेगा. लघु व घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा.”

झारखण्ड अलग राज्य की लड़ाई जिन आंदोलनकारियों ने लड़ी है, उन्हें अब तक उनका सम्मान नहीं मिला है. स्थितियों का अध्ययन करने के बाद आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग पुनर्गठित हआ. इसमें झारखण्ड के ही एक पुलिस अधिकारी श्री दुर्गा उरांव को अध्यक्ष और गुआ गोलीकांड के अभियुक्त श्री भुनेश्वर महतो व देवघर के नरसिंह मुर्मू को सदस्य बनाकर गुणात्मक परिवर्तन किया गया है. ताकि झारखण्ड आंदोलन में सक्रिय भागीदारों को उचित सम्मान मिल सके. सल भर में व्यापक अभियान चलाकर असली आंदोलनकारियों को सम्मान दिलाने का प्रयास हेमन्त जी की सरकार कर रही है.

सपना देखा गया वह अब तक पूरा नहीं हुआ

विधायक सुदिव्य कुमार का मानना है कि अलग राज्य की परिकल्पना झारखण्ड राज्य बनने के 22 वर्ष बाद भी पूरे नहीं हुए हैं. अन्य झारखण्डियों की तरह मैंने भी खुशहाल झारखण्ड का सपना देखा था. उस वक्त मैने सुना था कि झारखण्ड की कमाई से बिहार चलता है. उस वक्त हमें भी लगा कि अलग राज्य बनेगा तो कोई भूखा नहीं रहेगा, भेदभाव के साथ-साथ गरीबी भी खत्म होगी और तमाम समस्याओं का समाधान हो पाएगा. आज हम सब वहीं खड़े हैं, जो सपना देखा गया वह पूरा नहीं हुआ. 

राजनीतिक नेतृत्व के साथ राजनीतिक चेतना की कमी

सपनों के अनुरूप झारखण्ड नहीं बन पाने के कारण व्यापक हैं. एक बात तो स्पष्ट है कि राजनीतिक नेतृत्व तो जिम्मेवार है ही, साराजनीतिक चेतना की कमी भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं है. हमारा सपना ‘अबुआ राज अबुआ दिशोम’ यानी हमारे देश पर हमारा राज. मतलब स्पष्ट था कि हमारे राज्य पर हमारा शासन हो और यही जेएमएम का लक्ष्य है. जेएमएम के समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ-साथ झारखण्डियों की जन भावनाओं की अभिव्यक्ति भी यही है. इसी लक्ष्य के साथ जेएमएम आगे बढ़ रहा है और अपन एजडा का चरणबद्ध तराक से पूरा करने में लगा हुआ है. 

प्राथमिक हक से मूलवासी वंचित 

झारखण्ड के संसाधनों पर अभी भी बाहरियों का कब्ज है और झारखण्ड के लोगों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है. झारखण्ड के संसाधनों यथा नोकरी, रोजगार, व्यवसाय समेत तमाम आर्थिक गतिविधियों से झारखण्डी अभी भी वंचित हैं. यही हक झारखण्डियों को दिलाना जेएमएम के एजेंडा की प्राथमिक सूची में शामिल है और चरणबद्ध तरीके से हम सब इसके लिए प्रयासरत हैं.

खनिज संपदा ही झारखण्डियों के लिए अभिशाप

जिस खनिज संपद पर झारखण्ड को नाज है, वह खनिज संपदा ही झारखण्डियों के लिए अभिशाप बनी हुई है. खनन से ही झारखण्ड के मूलवासियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. खनन के कारण पर्यावरण संकट में है और जंगल उजड़ते जा रहे हैं. विस्थापन, पलायन और प्रदूषण का दंश झारखण्डियों के हिस्से में है और आर्थिक संसाधनों का लाभ बाहरी कंपनियां उठा रही हैं. इसलिए बेहतर होता कि झारखण्ड की पहचान खनन से ना हो, बल्कि पर्यटन से हो. झारखण्ड में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं. हमें वन-पर्यावरण से समझौता किये बिना “फ्लोरा एंड फौना” (वनस्पति और जीवों का पालन) के साथ पर्यटन की संभावनाओं पर काम करना होगा. 

राज्य में स्थानीयता परिभाषित होना जरूरी 

राज्य में जब तक स्थानीयता परिभाषित नहीं होगी तब तक झारखण्ड के मूलवासी अपने हक से वंचित रहेंगे. स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए झारखण्डियों की मूल भावना को ध्यान में रखना होगा और लागू करना होगा. जेएमएम इस पर गंभीर चिंतन-मनन कर रहा है. इसका परिणाम शीघ्र ही दिखेगा. राज्य की सभी तरह की नौकरियों में झारखण्ड से 10 वीं और 12वीं पास होना अनिवार्य करना होगा. 

झारखण्ड का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा 

हमें स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है कि झारखण्ड में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की अभी भी कमी है. इस कमी के कारण लोग कई बनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. सरकार की चिकित्सा व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि को धरातल पर सही तरीके से नहीं उतारा जा सका है. हेमन्त सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में लगी है. विभागों में रिक्तियां भरी जाने लगी हैं, आने वाले दिनों में इसका लाभ यहां के लोग उठा सकेंगे. 

राज्य का मानव विकास सूचकांक बेहतर हो

मानव संसाधन में बढ़ोतरी कर देश के पैमाने पर मानव विकास सूचकांक को बेहतर करना होगा. वर्ष 2017 की राष्ट्रीय सूची में कुल 36 राज्यों में झारखण्ड का स्थान 34 वां है. पहले स्थान पर केरल है जिसका सूचकांक 0.784 है, जबकि झारखण्ड का सूचकांक 0.539 है. स्पष्ट है कि झारखण्ड के लोगों का जीवन स्तर ठीक नहीं है, ऐसे में मानव संसाधन के क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की जरूरत है. 

मानव विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल, पर्यटन, कृषि, मत्स्यपशु पालन, अन्य व्यवसाय के क्षेत्र में काफी सुधार करने की जरूरत है. यहां के छात्र कई प्रतियोगिता परीक्षा में पिछड़ जाते हैं. अंग्रेजी बोलने-लिखने में झिझक होती है. सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति बदलनी होगी. प्राइवेट स्कूलों की तरह सीबीएसई सिलेबस सरकारी स्कूलों में लागू करना होगा. प्रयोग के लिए अभी राज्य के 80 मॉडल स्कूलों का चयन हुआ है. मॉडल स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर फिर अन्य स्कूलों में भी बदलाव लाया जायेगा. 

लघु व घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा. खेल प्रतिभा से लेकर हर विशिष्ट क्षेत्र में झारखण्ड के बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी. इसके लिए खेल एकेडेमी का गठन किया जाएगा. हर संभावना पर काम करने होंगे, तभी मानव के जीवन स्तर में सुधार आएगा. 

नौकरियों की संविदा सेवा शर्त में स्पष्टता जरूरी 

विभिन्न संवर्गों की नौकरियों में संविदा की सेवा शर्त में स्पष्टता नहीं है. पिछली सरकारों ने स्पष्ट सेवा शर्त नहीं बनायी. फलस्वरूप हाल के दिनों में हमारी सरकार की काफी फजीहत हुई. विधानसभा चुनाव-2019 से पहले हेमन्त जी ने संविदा संवाद में ही विभिन्न कर्मचारी संगठनों से बात की थी और उन्हें भरोसा दिलाया था कि संविदा की सेवा शर्त सुधारी जाएगी. अब वक्त आ गया है कि संविदा की सेवा शतों में स्पष्टता लाई जाए. अगले एक वर्ष में विभिन्न संवर्ग के कर्मचारियों को हेमन्त सरकार बेहतर वातावरण देने में कामयाब होगी.

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