झारखण्ड : पेंशनधारियों के सम्मान का साक्षी एक निशान तीर-कमान 

झारखण्ड : 15 जुलाई को हेमन्त सरकार ने पुरानी पेंशन लागू करने के प्रस्ताव स्वीकृति दे देश भर में इतिहास रचा है, वादा निभाया है. भविष्य संरक्षण के अक्स में कर्मचारी वर्ग में हर्ष माहौल है, होली-दीवाली एक साथ मना रहे हैं.

रांची : झारखण्ड सहित कई राज्यों के सरकारी कर्मीं, Old Pension Scheme लागू करने को लेकर लम्बे समय से आंदोलनरत रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कर्मचारियों की पीड़ा को नजदीक से समझा. और चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन लागू करने के अपने वादे को, पेंशन ख़त्म करने के दौर में, 15 जुलाई को स्वीकृति दे देश भर में इतिहास रच दिया है. जिससे कर्मचारी वर्ग में हर्ष माहौल है. लोग होली और दीवाली एक साथ मना रहे हैं, झूम रहे हैं.

ज्ञात हो, हेमन्त सरकार में नई अंशदायी पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने के संबंध में कुछ शर्तों के साथ स्वीकृति दी गई. पुरानी पेंशन योजना लागू करने के संबंध में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 3 सदस्य समिति का गठन किया जाएगा. इस समिति में प्रधान सचिव वित्त विभाग एवं प्रधान सचिव कार्मिक विभाग होंगे. यह समिति एसओपी बनाकर पुरानी पेंशन योजना लागू करने संबंधी सुझाव राज्य सरकार को देगी. समिति द्वारा दिए गए सुझाव को मंत्रिपरिषद की बैठक में रखा जाएगा.

मसलन, राज्य भर में सरकार के इस कदम को मानवीय पहल माना जा रहा है. जिसके अक्स में न केवल राज्य के लाखों सरकारी कर्मियों का बुढ़ापा आसान होगा, राष्ट्रीय स्तर पर सूत्र धार मुद्दा बन देश भर के कर्मचारियों की लड़ाई को मज़बूती प्रदान करेगा. ज्ञात हो, 2004 में तत्कालीन एनडीए सरकार में पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) बंद की गयी थी. झामुमो ने चुनाव में राज्य के कर्मचारियों से वादा किया था कि उनकी सरकार बनेगी तो इस स्कीम को दोबारा लागू करेगी.

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