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20 सालों का विवाद

JPSC – हेमंत सरकार का निर्णय खत्म करेगा 20 सालों काअनसुलझे विवाद

JPSC – हेमंत सरकार का निर्णय खत्म करेगा 20 सालों का विवाद, आरक्षित समेत राज्य के तमाम छात्रों को अब मिल सकेगा लाभ 

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में, पिछले 20 सालों से चल रहे विवादों के जड़ में रही समस्याओं को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल कर लोकतंत्र की आत्मा को संरक्षण दिया है। बुधवार को हेमंत कैबिनेट ने जेपीएससी द्वारा आयोजित की जानेवाली सिविल परीक्षाओं के नये नियम को मंजूर कर लिया है। कैबिनेट ने ‘झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा रूल्स-2021’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 

नये नियम की मुख्य विशेषता – इस नए नियम में रिजर्व कैटेगरी को अनरिजर्व्ड कैटेगरी से वापस रिजर्व कैटेगरी में आने की विशेष सुविधा दी गयी है। यानी रिजर्व कैटेगरी के जो छात्र अनरिजर्व्ड कैटेगरी में चले जाने पर मनपंसद सेवा नहीं पाने से निराश होते थे, वे अब इस नये नियम के तहत मनपसंद सेवा न मिलने पर वे अनरिजर्व्ड कैटेगरी से रिजर्व कैटेगरी में लौट सकेंगे। ऐसा कर हेमंत सरकार ने पूर्व की परीक्षाओं के दौरान उभरे विवादों को सुलझाने का एक बेहतर प्रयास किया है।

प्रावधान में न्यूनतम उम्र और शैक्षणिक योग्यता कर दी गयी है निर्धारित

‘झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा रूल्स-2021’ में कई पहलुओं को अब स्पष्ट कर दिया गया है। इसमें मुख्य पहल यह है कि कैंडिडेट की न्यूनतम उम्र सीमा 21 वर्ष और शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गयी है। नियमावली में रिजर्व कैटेगरी के कैडिटेडों की संख्या 15 गुना करने का प्रावधान किया गया है। सामान्य प्रक्रिया के तहत अगर रिजर्व कैटेगरी के कैडिटेडों की संख्या 15 गुना नहीं हो, तो अनरिजर्व्ड कैटेगरी के चयनित अंतिम कैडिटेड को मिले अंक से 8 % प्रतिशत तक घटाकर रिजर्व कैडिटेडो की संख्या 15 गुना की जायेगी। 

भाषा के अंक की स्थिति को लेकर उपजे विवाद का निकाला गाया है हल 

नये नियमावली के तहत हेमंत कैबिनेट ने एक और अब्दे अनसुलझे विवाद को खत्म किया है। यह विवाद छठी जेपीएससी परीक्षा में काफी जोर-शोऱ से उठा था। दरअसल मुख्य परीक्षा में सामान्य हिंदी और अंग्रेजी के अंक को फाइनल मैरिट लिस्ट में जोड़े जाने या नहीं जाने को लेकर कई हंगामा हुआ था। लेकिन अब हेमंत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाषा की परीक्षा में मिले अंक को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जायेगा।

मनपसंद सेवा नहीं मिलने वापस जाने के प्रावधान 

कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को ब्रिफिंग में कार्मिक सचिव अजय कुमार सिंह ने सर्विस आवंटन में उभरे विवाद को सुलझाने के लिए किये गए प्रयासों को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया है कि अब इंटरव्यू के बाद तैयार अंतिम परिणाम में अनरिजर्व कैटेगरी के लिए एक कट ऑफ मार्क्स निर्धारित किया जायेगा। अगर ST, SC, OBC  वर्ग का कोई कैंडिडेट अनरिजर्व्ड कैटेगरी के बराबर अंक है, तो वह अनरिजर्व्ड कैटेगरी में चला जायेगा। लेकिन, अनरिजर्व्ड कैटेगरी में जाने के बाद अगर उसे मनपसंद सेवा नहीं मिलती है, तो वह फिर से रिजर्व कैटेगरी में वापस जा सकेगा।

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