झारखण्ड भाजपा : अजब कहानी के गजब किरदार

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झारखण्ड भाजपा

झारखण्ड भाजपा : जब सदन में 27 मिनट की जगह 30 मिनट बोलने को दिया गया तब कीर्त्तन करती रही, मीडिया के समक्ष रोते हैं कि बोलने का मौका नहीं मिला 

रांची : झारखण्ड में प्रदेश भाजपा की कहानी बिलकुल जुदा व अजब है. और इस अजब कहानी के किरदार भी गजब हैं. भाजपा के इन किरदारों ने राजनीति को तमाशा बना दिया है. ज्ञात हो, झारखण्ड में विधानसभा का मानसून सत्र 3 सितंबर से नौ सितंबर तक चला. बीच में पड़ने वाले शनिवार व रविवार की छुट्टी भी रही. चार-पांच दिन ही थे जब राज्य हित में, जनता की जरुरी समस्याओं के मद्देनजर चर्चा या बहस होनी थी. पर भाजपा ने पूरे सत्र का तमाशा बना दिया. 

विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा का कोई नेता बेलपत्र पहनकर पहुंचा, कोई ढोल, झाल-मंजीरा लेकर पहुंचा और क्षेत्र की समस्या पर चर्चा करने के बजाय कीर्त्तन करते दिखे. शेष सत्र शोर-शराबा और हंगामें की भेट चढ़ गया. मजेदार बात यह रही कि बाबूलाल सरीखे बुजुर्ग नेता पूरे सत्र के दौरान धृतराष्ट्र बन लोकतंत्र का चीर-हरण होने दिया और विधानसभा अध्यक्ष का समय भाजपा को मर्यादा और अनुशासन की सीख देते गुजर गया. लोकतंत्र की मर्यादा की धज्जियां उड़ाते हुए भाजपा नेता भानु प्रताप शाही सदन के भीतर मीडिया टेबल पर चढ़ गए. मसलन, ऐसी हरकतें करते दिखे जो शायद स्कूल के बिगड़ैल बच्चें भी न करें. 

सोशल मिडिया पर जनता की प्रतिक्रिया देख भाजपा डरी, अपना दलित चेहरा, अमर कुमार बाउरी को घड़ियाली आंसू के साथ किया आगे

लेकिन, गंभीर सवाल तब उतपन्न होता है जब नौटंकी में सत्र काल गुजार देने के बाद, सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया देख भाजपा डर जाती है. और हड़बड़ी में भाजपा अपना दलित चेहरा, अमर कुमार बाउरी को घड़ियाली आंसू के साथ मीडिया समक्ष खड़ा कर देती है. जहाँ उनसे कहलवाया जाता है कि वह दलित हैं इसलिए उन्हें बोलने नहीं दिया गया. भाजपा विचारधारा के बहुरंग देख गिरगिट भी शर्मा जाए. ऐसे में, मीडियाकर्मी केवल उन्हें हैरतभरी निगाहों से ही देख सकते थे. भाजपा को भान हो चला था कि जनता उसे इस दफा नहीं बख्शेगी. लिहाजा उसके पास इसके सिवा कोई अन्य विकल्प शेष नहीं बचा था.

सीपी सिंह का मनुवाद चेहरा आया सामने – उनके अनुसार गरीब या शूद्र को विधानसभा चौखट लांघने का अधिकार नहीं 

बुजुर्ग नेता सीपी सिंह तो सामान्य शिष्टाचार भी भूल गए और अपना मनुवादी चेहरा सामने लाये. जिसके अक्स में उन्होंने मंत्री बन्ना गुप्ता पर निजी और आपत्तिजनक टिप्पणी की. जिससे झारखंड के समस्त टेंपो चालकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंची. दरअसल, उनका मानना है कि गरीब या शूद्र को विधानसभा चौखट पार करने का अधिकार नहीं. लिहाजा जनता ने सीपी सिंह का पुतला दहन किया. 

जनता को सत्र के दौरान नेताओं के मुखौटे के पीछे का चेहरा दिखा

राज्य की जनता को सत्र के दौरान नेताओं के मुखौटे के पीछे का चेहरा दिखा. जनता ने बुजुर्ग नेता सीपी सिंह का मनुवादी चेहरा देखा. बुजुर्ग नेता बाबूलाल मरांडी को इच्छाओं की लालसा में धृतराष्ट्र बनते देखी. नेता सुदिव्य कुमार का निष्पक्ष चेहरा भी देखा. तो मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन का मर्यादित आचरण भी दिखा. उन्होंने विधानसभा सत्र के समापन के अवसर पर बाकायदा कहा कि एक समय हमलोग भी विपक्ष में थे. पर ऐसा आचरण नहीं दिखाया.

तमाम घटनाओं के मद्देनजर राज्य की जनता भाजपाइयों जरुर आंकलन करना चाहेगी. कोरोना के कहर से ऊबरने के दौर में यह सत्र राज्य के लिए मायने रखता था. मिलकर कोशिश की जाती तो जनप्रतिनिधियों जनता को राहत दे सकते थे. मगर भाजपा ने एक बार फिर सिद्ध किया कि उसे जनता के समस्याओं से कोई मतलब नहीं. उसे तो केवल हिन्दू-मुसलमान कर व अपने चहेते कॉर्पोरेट को लाभ पहुंचाने के एवज में मिलने वाले चंदे से चुनाव जीतना है. उनके हवा-हवाई एजेंडे तो केवल जनता-युवा को भरमाने भर के लिए होती है.

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