होली की बधाई के बीच झारखंड में नक्सली सरेंडर अपील के मायने

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नक्सली सरेंडर अपील के मायने

एसपी नक्सली के घर पहुँच नक्सली के माता-पिता होली के बधाई दे. और उसे सरकार की नई सरेंडर नीति से अवगत कराए. तो यह पहल सरकार व उसकी संवेदनशीलता और मानवीय पहलू को दर्शा सकता है.

रांची : चंद दिनों पूर्व, होली के अवसर पर सरायकेला-खरसावां के एसपी एम अर्शी द्वारा की गयी पहल की काफी सराहना हो रही है. एसपी ने हार्डकोर नक्सली महाराज प्रमाणिक के दारूदा गांव स्थित घर पर पहुँच, उसके माता-पिता को मिठाई के साथ होली की बधाई दी. और महाराज प्रमाणिक के सरेंडर करने की अपील भी की. इस दौरान एसपी ने महाराज प्रमाणिक के माता-पिता को सरकार की नई सरेंडर नीति से अवगत कराया. ज्ञात हो इस नीति के तहत कई नक्सलियों ने सरेंडर किया और मुख्यधारा में लौट आये हैं. 

महाराज प्रमाणिक के माता पिता ने भी माना कि उनका बेटा भटक गया है और उसे सरेंडर कर सामान्य जिंदगी में वापस आना चाहिए. किसी एसपी द्वारा किया गया यह पहल उसकी व सरकार की संवेदनशीलता और मानवीय पहलू को दर्शा सकता है. ज्ञात हो कि फिलहाल के दिनों में झारखंड पुलिस ने अलग-अलग तरीकों से नक्सलियों पर दबाव बनाया है. जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आये हैं.

कुछ उदाहरणों –

  • 16 मार्च 2021, गया व औरंगाबाद के सीमावर्ती क्षेत्र में चार नक्सलियों को सुरक्षाबलों के जवानों ने मार गिराया. इनमें, नक्सलियों के जोनल कमांडर अमरेश भोक्ता उर्फ टुनटुन सिंह, श्रीकांत भुइंया, उदय पासवान और शिवपूजन शामिल है. इनके पास से तीन एके 47 और एक इंसास राइफल भी बरामद हुए.
  • 2021 – 16 मार्च, खूंटी में पीएलएफआई का एरिया कमांडर सैमुअल कंडुलना गिरफ्तार हुआ. उसके ऊपर दो लाख का इनाम था.
  • 16 मार्च 2021, चतरा में पुलिस पार्टी को निशाना बनाने के उद्देश्य से बिछाया गया शक्तिशाली लैंडमाइनस बरामद किया गया.

इसे झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान की सफलता का बड़ा उदाहरण माना जा सकता है. जो राज्य के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ मिली बड़ी सफलता का सच लिए हुए है. इन अभियानों में एक की गिरफ्तारी व चार नक्सलियों को मार गिराया गया, भारी मात्रा में लैंडमाइन व हथियार बरामद हुए. ऐसे में उम्मीद जताई जा सकती है कि महाराज प्रमाणिक सरेंडर कर बाकी की जिंदगी शांति के साथ गुजरेगा। 

नक्सलियों को बंदूक छोड़ मुख्यधारा से जुड़ना ही होगा 

सरकार की मंशा साफ है कि नक्सलियों को बंदूक छोड़ मुख्यधारा में आना ही होगा। ऐसा न करने पर या तो वे मारे जाएंगे या फिर दर-बदर जिंदगी जीने को विवश रहेंगे। नक्सलियों के तमाम दावों के बावजूद उनकी शाख राज्य में कमजोर होने का सच लिए है। सरकार एक तरफ नक्सलियों का सफाया कर रही है। और दूसरी तरफ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज कर, संगठन के पनपने के बुनियादी सच पर चोट कर रही है। हाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ी है। नक्सली सड़कों को निशाना बना तो रही है, लेकिन पुलिस के मुस्तैदी के कारण वह मंसूबे नाकामयाब रही है। 

राज्य सरकार की नई सरेंडर पॉलिसी के मद्देनजर साल के शुरुआत में ही कई प्रमुख नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया था। अब यह माना जा सकता है कि नक्सली विचारधारा की मृगमरीचिका सूखने लगी है। नक्सली जिन सिद्धांतों की वकालत कर गरीबों को भटकाते थे। उस विचारधारा पर हेमंत सरकार ने वार कर जंगल में उनकी उपयोगिता को ही ख़ारिज कर दिया है। उन्हें जनसमर्थन अभाव में वह अपनी संगठन को बिखरने से बचा पाने में लगातार असमर्थ होते जा रहे हैं।

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