पांच साल चलाई जिसके साथ सरकार -अब पता चला आजसू से उसे नहीं था कोई सरोकार!

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आजसू से उसे नहीं था कोई सरोकार

मधुपुर उपचुनाव : पीठ में छुरा घोंपने के परिस्थिति में आजसू ने किया किनारा, राज पलिवार की दुर्दशा देख भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह का अभाव – झामुमो जीत की अकेली दावेदार 

रांची : झारखंड के मधुपुर उपचुनाव के कैनवास में भाजपा के पस्त सिपाही अकेले झंडा ढोने को विवश हैं. भाजपा गठबंधन के साथी आजसू दूर तलक भी नजर नहीं आती. आजसू प्रवक्ता देवशरण भगत केवल इतना भर कह पलड़ा झाड लेते हैं कि भाजपा की ओर से बुलाया नहीं आया है. सांकेतिक तौर पर कहने से  यह भी नहीं चूकते कि अगर भाजपा अकेले ही चुनाव जीत जाती है तो इससे बढ़िया क्या हो सकता है? और मधुपुर में हमारा डंडा है जिसपर भाजपा ने अपना झंडा लगा दिया है. पर उनके पास यह जवाब नहीं है कि आजसू के डंडे में आजसू का झंडा क्यों नहीं? मसलन, आजसू के वरिष्ठ नेता में साफ़ तौर पर भाजपा के भीतरघात की टीस दिखती है. 

आजसू ने भाजपा को विजयी भवः नहीं बल्कि दिखाया है ठेंगा

गंगा नारायण सिंह के उपचुनाव नामांकन प्रक्रिया आजसू के नेता-कार्यकर्ता के अनुपस्थिति का भी सच लिए है. जिसके अक्स में साफ तौर पर भाजपा-आजसू गठबंधन में उत्पन्न खटास की झलक हो सकती है. पहले चर्चा थी कि गंगा नारायण सिंह के भाजपा में शामिल होने में आजसू की भी सहमति थी. पर अब आजसू का कहना है कि एक सहयोगी से ऐसे भीतरघात की उन्हें उम्मीद नहीं थी. लेकिन उसके द्वारा एकतरफा गठबंधन धर्म निभाने के क्या मायने है. इस सच से पर्दा अब तक नहीं उठ पाया। कोई इसे बंगाल में आजसू को मिली सीट की भरपाई मान रहा है. तो कोई शेर के जबड़े में फंसे गर्दन की छटपटाहट मान कर चल रहा है.

आजसू ने बेरमो और दुमका उपचुनाव में भी भाजपा के लिए सक्रियता दिखाई थी. लेकिन इस बार वह खामोश है. उन्हें शायद एक साथी के दुःख की इससे बड़ी और कोई पराकाष्ठ हो सकती है. जहाँ   परिणामों से उसे कोई सरोकार न रहे। ऐसा प्रतीत होता है कि आजसू ने भाजपा को विजयी भवः नहीं बल्कि ठेंगा दिखाया है. दिखाए भी क्यों ना? भाजपा ने अपनी मानसिकता के अनुरूप साथी बन झारखंडी पुत्र के पीठ पर एक बार छुरा घोंपा है. आप कोई और नाम दे सकते हैं, लेकिन आखिरी सच इससे परे नहीं हो सकता. 

उपचुनावों को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह नहीं 

भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी उपचुनावों को लेकर उत्साह नहीं है। उपचुनाव के परिणामों को लेकर आशंका उनके मन में अभी से ही है। मधुपुर में भाजपा के पुराने और अब दरकिनार कर दिए गए चेहरे राज पलिवार वनवास में चले गए हैं। भाजपा के लिए मधुपुर में सालों पसीना बहाने वाले पूर्व श्रम मंत्री राज पलिवार को यहीं इनाम मिला है। फेसबुक पर शेरो-शायरी कर अपना दर्द बयां कर रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा एक ऐसी परिस्थिति में है जहां वह लड़ाई से पहले ही खुद को हारी पा रही है। उसके समक्ष उप चुनावों के हार के साथ बिखरते कुनबे का सच है। साथ ही झामुमो के पक्ष में बने माहौल को देख वह घबराई हुए हैं। 

मसलन, भाजपा के पास गलतियों को सुधारने का वक़्त नहीं है। नतीजतन वह मधुपुर उपचुनाव में आहिस्ता-आहिस्ता हार की मुंडेर की ओर बढ़ रही है। जो कह रहे थे कि यह उपचुनाव का रेस झामुमो बनाम भाजपा का है। वही अब कहने लगे हैं कि मधुपुर विधानसभा में सिर्फ एक ही पार्टी है- झामुमो, जो बिना संशय के जीत की तरफ बढ़ चली है।

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