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fast track court लगाएगा महिलाओं के जख्मों पर मरहम 

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महिला दुस्कर्मियों का ट्रायल fast track court में चलाना झारखण्ड सरकार की अच्छी सोच

समाज में आये दिन स्त्रियों पर अत्याचार छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाएँ लगातार होती रहती है। कभी घरेलू हिंसा का शिकार होती है, कभी दहेज़ के लिए बलि चढ़ा दी जाती है। तो कभी लड़कियों के साथ गैंग रेप जैसी वीभत्स घटना घटती है। और समाज लड़कियों के पहनावे से लेकर उस भारतीय ‘संस्कृति और परंपरा’ का हवाला देती है जहाँ स्त्रियों को केवल गृहिणी होना चाहिए। लेकिन असल में में स्त्रियों पर बढ़ रहे अत्याचारों का सबसे बड़ा कारण पितृसत्तात्मक समाज, यानी कि पुरुष प्रधान समाज और उसकी मानसिकता को चालाकी से ढक लिया जाता है।

fast track court समाज की मानसिकता लगाएगा लगाम

जहाँ समाज की मानसिकता में स्त्रियों को भोग-विलास की वस्तु और बच्चा पैदा करने (यानी कि ‘यशस्वी पुत्र’) का यंत्र की समझ व्याप्त है। हमारे समाज में प्रभावी वही पुरुषवादी मानसिकता स्त्रियों को चाबी का खिलौना समझती है जिसे जैसे मर्ज़ी इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन लगता है कि झारखण्ड में हेमंत सरकार इस कोढ़ से लड़ने की तैयारी कर चुकी हैं। जमशेदपुर, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मरीज़ महिला दुष्कर्म के आरोपियों को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी), एसएसपी अनूप बिरथरे और सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट समेत पूरी पुलिस महकमे ने त्वरित कार्यवाई करते हुए जिस प्रकार गिरफ्तार किया, यही दर्शाता है।

साथ ही हेमंत सोरेन सरकार द्वारा आरोपी को fast track court द्वारा ट्रायल करवा त्वरित गति से सजा दिलवाने का फैसला सुकून देने वाली तस्वीर पेश करती है। ज्ञात हो कि सरकार स्त्री-विरोधी अपराधों को रोकने के लिए व दोषियों को तुरंत सज़ा दिलवाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन का फैसला सरकार में आते ही ले लिया था। बहरहाल, सरकार द्वारा उठाया गया यह सख्त कदम न केवल ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाएगी, समाज के पोर-पोर में बसी स्त्री-विरोधी मानसिकता पर भी चोट करेगी। साथ ही इससे हमारी माँ-बेटियों को इस त्रासदी से डट कर मुकाबला करने की ताक़त व प्रेरणा भी मिलेगी। 

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