चमोली त्रासदी में फंसे झारखंडी मजदूर

चमोली त्रासदी में फंसे झारखंडी मजदूरों की सकुशल वापसी की आयी सुखद खबर

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लातेहार डीसी ने ट्विट कर चमोली त्रासदी में फंसे झारखंड के मजदूरों की सकुशल वापसी की खबर राज्य सरकार एवं @JharkhandCMO को देना व्यवस्था के प्रतिबद्धता 

चमोली त्रासदी के अक्स में जलवायु परिवर्तन है या विकास के मद्देनजर साधन संपन्न होने का सच। या फिर दुनिया को चेत जाने की हिदायत? जो भी हो लेकिन, सच यह भी हो सकता है। जहाँ जर्नल साइंस एडवांस 2019 में छपी रिसर्च पन्नों में, वैज्ञानिकों के 40 वर्षों का अध्ययन, सैटेलाइट सर्वेक्षण और तस्वीरों के विश्लेषण के नतीजे आगाह करे। जहाँ 2016 तक तापमान में एक डिग्री सेल्सियस बढ़ने का सच दिखे। दुनिया के तीसरे ध्रुव हिमालय मे ग्लेशियरों के पिघलने अंदेशा जताए। और अफसरान बेखबर रहे! और नतीजा रौद्र रूप में सामने आयें। तो सत्ता की व्यवस्था पर अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल हो सकता है। 

लातेहार डीसी ने ट्विट कर झारखंड के फंसे मजदूरों की सकुशल वापसी की खबर राज्य सरकार दी

धौलीगंगा नदी बाढ़ त्रासदी के तबाही के मातहत 170 से अधिक लोग लापता है। जिसमे देश भर के ऐसे मजदूर भी हों जो तपोवन में निर्माणाधीन हाइडल पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हों। खुद को सुरंगों में गर्म रखने के खातिर एक्‍सरसाइज व एक-दूसरे को गर्म कपड़े देते रहेन की कवायद कर रहे हों। उनके सुरक्षित बाहर आने की खबर देश को राहत दे सकती है। इसी बीच लातेहार डीसी ट्विट कर झारखंड के फंसे मजदूरों की सकुशल वापसी की खबर राज्य सरकार एवं @JharkhandCMO को  दे। तो निश्चित रूप से हेमन्त सरकार के तरफ उठी आँसू भरी आस के लिए राहत हो सकती है।  

जैसे भी समझे लेकिन एक सच यह भी उभर सकता है। झारखंड में सत्ता परिवर्तन के बावजूद,  भाजपा व्यवस्था की गर्दिशों का चक्रव्यूह झारखंडियों का पीछा उत्तराखंड तक छोडती नहीं दिखती। लेकिन, उसी कैनवास में यह सच भी उभरता है कि झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, उसी जिद्द के साथ झारखंडी भाई-बहनों को हर हद तक जा कर सुरक्षित बचा लाने से भी पीछे नहीं हटते। कोरोना त्रासदी में जहाँ देश रुक जाता है, वहां उनका प्रयास ट्रेन के चक्के घुमा प्रवासियों को झारखंड ले आती है। हवाई जहाजों को भी उसी मंशा के साथ उड़ने भरनी पड़ती है। और 8.5 लाख प्रवासियों की घर वापसी का सुखद खबर झारखंड के हिस्से आता है। 

मसलन, हेमन्त सत्ता के हाथ झारखंडी भाई-बहनों के कंधों से ना तब उठी और न अब। जब झारखंडियों ने तपोवन टनल से आवाज लगाई। इस बार भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड को निराशा हाथ नहीं लगी। उनकी सकुशल वापसी की खबर तथ्य के पुष्टि कर सकती है। 

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