संथाल परगना के आठों अस्पताल बिना डॉक्टर के चल रहे हैं 

संथाल परगना के अस्पतालों की ज़मीनी हक़ीकत

संथाल परगना झारखंड राज्य की प्रशासनिक ईकाईयों में से एक है। यह झारखंड का एक प्रमंडल है जिसका मुख्यालय दुमका में है। इस इकाई में झारखंड के छह जिले – गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ आते हैं। ब्रिटिश राज में पहले संथाल परगना नाम से ही संयुक्त बिहार में एक जिला हुआ करता … Read more

नशे के आदि होते जा रहे हैं झारखंड के बेरोजगार युवा !

नशे का डॉज

नशे के लत में धकेली जा रही है झारखंड के भविष्य विज्ञान मानव का सेवक है लेकिन आज यह मात्र मुनाफ़ा कूटने का एक साधन बनकर रह गया है। मौजूदा व्यवस्था मानव के मानवीय मूल्य और मानवीय संवेदनाओं को निरंतर निगलती जा रही है। विज्ञान की ही एक विधा चिकित्सा विज्ञान ने पिछले कुछ दशकों … Read more

बेटी बहु व बच्ची कोई भी आज झारखंड में सुरक्षित नहीं!

बहु बेटी व बच्ची कोई सुरक्षित नहीं

बेटी बहु व बच्ची क्यों सुरक्षित नहीं हैं झारखंड राज्य में ? जागो मृतात्माओ ! बर्बर कभी भी तुम्हारे दरवाज़े पर दस्तक दे सकते हैं। भागकर अपने घर पहुँचो और देखो तुम्हारी बेटी कॉलेज से लौट तो आयी है सलामत, बीवी घर में महफूज़ तो है। बहन के घर फ़ोन लगाकर उसकी भी खोज-ख़बर ले … Read more

बच्चों को पैदल नदी पार कर जाना पड़ता है स्कूल 

झारखंड के बच्चों के लिए कठीन डगर

झारखंड चरही के तरिया टोला के बच्चों के लिए विद्यालय तक सात किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। राँची से हज़ारीबाग़ जाने के रास्ते से बिल्कुल सटे प्रखंड के इस गाँव के बच्चे हर दिन ढेबागढ़ा नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। वो कहते हैं, “सरकार के लोग … Read more

स्कूल बंद कर देश में कौन सी नयी भविष्य गढ़ी जा सकती है? -जनता बेहाल -2

स्कूल बंद

झारखंड में बीजेपी सत्ता के 5 साल और जनता बेहाल की अगली कड़ी में स्कूल बंद…  इसी प्रकार इन्होंने मोमेंटम झारखंड के अंतर्गत राजकीय पशु हाथी तक को नहीं बख़्शा -कहा गया कि हाथी उड़ेगा -मतलब इस योजना के तहत ये नौकरी लायेंगे, नए रोज़गार का सृजन करेंगे, लेकिन ना नए रोज़गार आये ना ही … Read more

बीजेपी सत्ता के झारखंड में 5 साल और जनता बेहाल

बीजेपी सत्ता

आज झारखंड में भाजपा का जो रूप देखा जा रहा है, वह बीसवीं सदी के यूरोप के फ़ासीवाद से मेल खाता मालूम पड़ता है। भिन्नता केवल यह है कि इन्होंने (बीजेपी सत्ता) जनवाद के आवरण को औपचारिक तौर पर हटाया नहीं हैं। इन्होंने इसके दायरे को संकुचित कर दिया है, जिससे जनवाद का भ्रम तो … Read more