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झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

स्कूल बंद

स्कूल बंद कर देश में कौन सी नयी भविष्य गढ़ी जा सकती है? -जनता बेहाल -2

झारखंड में बीजेपी सत्ता के 5 साल और जनता बेहाल की अगली कड़ी में स्कूल बंद… 

इसी प्रकार इन्होंने मोमेंटम झारखंड के अंतर्गत राजकीय पशु हाथी तक को नहीं बख़्शा -कहा गया कि हाथी उड़ेगा -मतलब इस योजना के तहत ये नौकरी लायेंगे, नए रोज़गार का सृजन करेंगे, लेकिन ना नए रोज़गार आये ना ही किसी को नौकरी मिली,  अब यह कहा जा सकता है कि यह सब झूठ था जितनी भी कंपनियाँ लगी उनमें से ज्यादातर बंद हो गयी हैं और जो बचे हैं वह भी बंद होने के कगार पर है इस योजना के आयोजन के पीछे का मकसद भी केवल यही प्रतीत होता है कि यहाँ की जमीन लूटों व अपने चहेतों को कौड़ियों के भाव लुटाओ 

लेबर ब्यूरो के हाल में जारी आँकड़ों ने भी इनके लम्बे-चौड़े दावों की पोल खोली और सच्चाई को आँकड़ों की शक्ल में हमारे सामने रखी। जिसे आम लोग अपने अनुभवों से लगातार महसूस कर रहे हैं। कहा गया कि झारखंड समेत भारत ने दुनिया भर में सबसे अधिक बेरोज़गारों वाला देश होने का गौरव हासिल कर लिया है।  दुनिया भर में समावेशी विकास सूचकांक में भारत को साठवाँ स्थान मिला, यानी अपने पड़ोसियों से भी काफ़ी नीचे। आँकड़े बताते हैं जहन एक तरफ रोज़गार लगातार घट रहे हैं वहीँ स्व-रोज़गार के अवसर कम हुए हैं। साथ ही सामाजिक-आर्थिक असमानता भी बढ़ती जा रही है।  

बीजेपी सरकार ने 12,000 से अधिक स्कूल बंद कर किया झारखंड के भविष्य का किया अतिक्रमण 

इतनी लूट और यहाँ के अस्मिता से खिलवाड़ किये जाने के भी इनके द्वारा झारखंड के भविष्य पर भी अतिक्रमण किया गया विलय के नाम पर राज्य के लगभग 12,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिया जाना झारखंड के अगली पीढ़ी को बर्बाद करना ही तो हुआ। दलील यह दी गयी कि सरकार के इस कदम से राजस्व को 13,000 करोड़ का फायदा होगा। इसे एक असंवेदनशील फैसले से अतिरिक्त कुछ और नहीं कहा जा सकता, क्योंकि सरकार के लिए राजस्व बढ़ाना राज्य/देश के भविष्य से कहीं अधिक जरूरी है। यही नहीं इसके अतिरिक सरकार के राजस्व बढाने के इस शौक ने उन्हें जगह-जगह शराब की दुकानों को खोलने पर मजबूर किया लेकिन यहाँ भी सरकार की नियत को देखिये खुद ही 600 करोड़ का शराब पी गयी। विडंबना देखिये जब सरकार के पास कोई जवाब नहीं दिखा और चुनाव को सर पर देखते हुए फिर से फैसला लिया कि शराब को निजी व्यापारियों के हाथों में दे दिया। …अगले  लेख में युवाओं की बात होगी …!

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