मंदी का बोझ सरकार में चालान के रूप में अब आम लोगों कंधे पर डाला 

मंदी

नोटबन्दी व जीएसटी उत्पन्न मंदी का सबसे अधिक असर असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को झेलना पड़ा है, शहरों के कारख़ानों से बड़ी संख्या में मज़दूरों की छँटनी हुई है। उत्पादन कम होने से जो काम पहले शिफ्टों में होता था, वह अब केवल एक शिफ़्ट में, कहीं कहीं तो वह भी नहीं चल रहा है। … Read more

हरिवंश टाना भगत की प्रतिमा को उखाड़ फेका गया है

हरिवंश टाना भगत

रघुबर सरकार को न जाने क्यों झारखंडी महापुरुषों खुन्नस है, पहले भगवान बिरसा मुंडा जी के समाधि स्थल को अधूरा छोड़ बेइज्जती की, अब उनके शासनकाल में हरिवंश टाना भगत की प्रतिमा को उखाड़ फेका गया है। कई दिनों तक जब वह प्रतिमा खेत में फेंकी रही तो घरवालों से उनकी यह अपमान नहीं देखा … Read more

कर्माओं व धर्माओ जंगलों से निकाल फैंकने की स्थिति में क्या प्रकृति बचेगी?

कर्माओं व धर्माओं

कर्माओं व धर्माओ को झारखण्ड के जंगलों से निकाल फैंकने पर क्या प्रकृति बचेगी? भादों मास के एकादशी में झारखण्ड, छत्तीसगढ़, समेत  देश-विदेश में पूरे मनाये जाने वाला लोक कर्मा का सीधा संबंध प्राकृतिक व मानव के बीच अदृश्य डोर से है। प्रागेतिहासिक काल से हमारे समाज के कृषक व तमाम प्राकृतिक के गोद में … Read more

बिजली तो रघुबर सरकार सरकारी कार्यक्रमों में भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है 

बिजली

झारखण्ड में मौजूदा मुख्यमंत्री के जीरो कट मुहैया कराने जैसे जुमले के बावजूद हो रही बिजली कटौती के कारण कोई प्राकृतिक नहीं हैं। असल में यह विभाग में व्याप्त मुनाफ़ाख़ोरी और सरकार की मुट्टीभर चहेते पूँजीपतियों के पक्ष में जनता के ख़िलाफ़ अपनायी गयी नीतियों का नतीजा है। साथ ही DVC पर निर्भरता एवं करोड़ों … Read more

गौ-रक्षक की गुंडागर्दी वाली भूमिका अब लाइसेंस के साथ पुलिस को दे दी गयी है 

गौ-रक्षक की भूमिका में पुलिस

फासीवादियों ने गौरक्षा की आड़ में जो गुण्डागर्दी व क़त्लोगारत देशभर में मचा रखी है, वह अब जग जाहिर है। यह “गौ-रक्षक” गुण्डे मोदीजी की सत्ता में बेख़ौफ़ घूमते रहे और नित नयी घटनाओं को अंजाम भी देते रहे हैं। जब दुनियाभर में थू-थू होने लगी तो साहेब ने कह दिया था कि महात्मा गाँधी … Read more

यूएपीए क़ानून आज़ाद भारत का सबसे ख़तरनाक क़ानून

यूएपीए क़ानून

यूएपीए क़ानून को आज़ाद भारत का सबसे ख़तरनाक क़ानून माना जा रहा है। देश में काले क़ानूनों का लंबा इतिहास रहा है। इस फ़ेहरिस्त में 1950 का प्रिवेण्टिव डिटेंशन एक्ट, 1958 का ऑर्म्ड फ़ोर्सेज़ (स्पेशल पावर्स) एक्ट (आफ्स्पा), 1967 का अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (‘यूएपीए’), 1971 का मेण्टिनेंस ऑफ़ इण्टरनल सिक्योरिटीज़ एक्ट (मीसा), 1980 का नेशनल … Read more