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झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

हरिवंश टाना भगत

हरिवंश टाना भगत की प्रतिमा को उखाड़ फेका गया है

रघुबर सरकार को न जाने क्यों झारखंडी महापुरुषों खुन्नस है, पहले भगवान बिरसा मुंडा जी के समाधि स्थल को अधूरा छोड़ बेइज्जती की, अब उनके शासनकाल में हरिवंश टाना भगत की प्रतिमा को उखाड़ फेका गया है कई दिनों तक जब वह प्रतिमा खेत में फेंकी रही तो घरवालों से उनकी यह अपमान नहीं देखा गया तो वे प्रतिमा उठाकर घर ले आये जब ठेकेदार से इस स्थापित करने को कहा तो उसके पास इस झारखण्ड के मालिक के लिए ज़मीन नहीं है। लिहाजा आज हरिवंश टाना भगत जैसे महापुरुष की प्रतिमा चावल के बोरों में रखी हुई है 

आज सरकार गाँधीजी के 150वीं जयंती की तैयारी जोर-शोर से करने का दिखावा तो कर रही है, लेकिन क्या वह यह नहीं जानती कि टाना भगत गाँधीजी के सत्याग्रह में काँधे से काँधे मिलाकर चले थे। जिसके कारण वे जेल भी गए थे। क्या सरकार यह भी नहीं जानती कि हरिवंश टाना भगत ही वह आदमी थे, जिन्होंने 23 जनवरी 1943 को आज़ादी का ऐलान करते हुए पीपल पेड़ पर तिरंगा फहराया था। आज हरिवंश टाना भगत के घर की यह स्थिति है कि उनके दो बेटों में बड़े का निधन हो चुका है। जबकि छोटे बेटे विश्वनाथ टाना भगत के पास शौचालाय तक नहीं है।

हरिवंश टाना भगत की आखिरी निशानी उनकी एक साइकिल थी, जिससे उनका पोता चना बेचने बाजार जाता था। उसकी तबियत खराब होने से उस साइकिल को उसके दावा-दारू के लिए कबाड़ में बेचना पड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना का ढिंढोरा खूब पीटा गया, फिर भी इस परिवार का घर अब तक कच्चा है। जबकि भाजपा के स्थानीय विधायक गंगोत्री कुजूर, जो यह तो कबूल करती है कि है कि प्रतिमा स्थापना के वक़्त मौजूद थी, लेकिन यह कह कर अपना बचाव भी कर लेती है कि इन बातों से वह अब तक अनजान है। वाह री सरकार …

आज हरिवंश टाना भगत के घर की यह स्थिति है कि उनके दो बेटों में बड़े का निधन हो चुका है। जबकि छोटे बेटे विश्वनाथ टाना भगत के पास शौचालाय तक नहीं है। हरिवंश टाना भगत की आखिरी निशानी उनकी एक साइकिल थी, जिससे उनका पोता चना बेचने बाजार जाता था। उसकी तबियत खराब होने से उस साइकिल को उसके दावा-दारू के लिए कबाड़ में बेचना पड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना का ढिंढोरा खूब पीटा गया, फिर भी इस परिवार का घर अब तक कच्चा है। जबकि भाजपा के स्थानीय विधायक गंगोत्री कुजूर, जो यह तो कुबूल करती है कि है कि प्रतिमा स्थापना के वक़्त मौजूद थी, लेकिन यह कह कर अपना बचाव कर लेती है कि इन साड़ी बातों से अब तक अनजान है। वाह री सरकार …

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