सोहराय बंधनमुक्त व स्वाधीनता के परिचायक 

सोहराय

पशु- प्रकृति समेत तमाम जीवों को बंधनमुक्त कर स्वाधीन रूप में विचरण करने की परंपरा अर्थात प्रेम और परोपकार का पर्याय है सोहराय पर्व। सोहराय शब्द की उत्पत्ति सोहारओ या सोहार से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ आदर सम्मान के साथ संवर्धन कराना है। यह पर्व संथाल संस्कृति का सर्वाधिक लोकप्रिय समाजिक उत्सव है। वैसे … Read more

कर्माओं व धर्माओ जंगलों से निकाल फैंकने की स्थिति में क्या प्रकृति बचेगी?

कर्माओं व धर्माओं

कर्माओं व धर्माओ को झारखण्ड के जंगलों से निकाल फैंकने पर क्या प्रकृति बचेगी? भादों मास के एकादशी में झारखण्ड, छत्तीसगढ़, समेत  देश-विदेश में पूरे मनाये जाने वाला लोक कर्मा का सीधा संबंध प्राकृतिक व मानव के बीच अदृश्य डोर से है। प्रागेतिहासिक काल से हमारे समाज के कृषक व तमाम प्राकृतिक के गोद में … Read more