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छात्रवृत्ति और नियोजन नीति

भाजपा के पाप को धोने फिर उतरी हेमंत सरकार, झारखंडी छात्रों के हित में उठाया बड़ा कदम

हेमंत सरकार का छात्रवृत्ति और नियोजन नीति को लेकर लिया गया निर्णय बचाएगा झारखंडी छात्रों का भविष्य

रांची। पूर्व भाजपा सरकार द्वारा सत्ता के घमंड में की गयी राजनीति का परिणाम आज झारखंड के सामने है। पहले ही पूर्व भाजपा सरकार द्वारा घोटाले को शह देने के कारण, राज्य की चौपट आर्थिक स्थिति आज हमारे सामने है। साथ ही उस सरकार में झारखंडी छात्रों के हितों के साथ कई बार खिलवाड़ हुआ। इसमें भाजपा सरकार के गलत तरीके से बनाए नियोजन नीति और अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्गों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति योजना में हुई घोटाला प्रमुखता से शामिल है। भाजपा की गलत नियोजन नीति का परिणाम यह हुआ कि हाईकोर्ट ने पूरी तरह से असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया। और अब तत्कालीन सरकार के नीचे से कल्याण विभाग द्वारा छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि में बंदरबाट का मामला सामने आया है। लेकिन झारखंडी छात्रों के मद्देनजर भाजपा के पाप को धोने के लिए हेमंत सरकार ने कमर कसी है। और इस बाबत सरकार द्वारा कई अहम व ठोस फैसले लिए गए हैं।  

छात्रवृत्ति लेने के लिए मानदंड हुआ निर्धारित, भौतिक सत्यापन को दी गयी प्रमुखता

छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति घोटाले की ACB जांच की अनुशंसा तो कल्याण विभाग ने पहले ही कर दी है। लेकिन अब राज्य सरकार ने एक अहम फैसला फैसले लेते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से ऐसा घोटाला दोबारा नहीं हो, इसके लिए सभी संस्थानों व छात्रों के आवेदनों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य होगा। इस काम के लिए विभाग ने कुल 17 मापदंड को निर्धारित किया है। इन्हें पूरा करने के बाद ही अब छात्रों को भविष्य में विभाग से छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिल सकेगा। इतना ही नहीं, अगर किसी भी शिक्षण संस्थान से कोई भी आवेदन या दस्तावेज फर्जी पाया जाता है, तो उस संस्थान को खारिज कर दिया जाएगा। संस्थान व छात्रवृत्ति के आवेदनों के सत्यापन के लिए सरकार पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की भी नियुक्ति करेगी। वहीं कोई भी छात्र अगर गलत तरीके से छात्रवृत्ति लेता है, तो पकड़े जाने पर उनसे छात्रवृत्ति की पूरी राशि भी वसूल की जाएगी।   

नियोजन नीति पर आए निर्णय के खिलाफ दायर एसएलपी से मिलेगी राहत

ज्ञात हो कि बीते दिनों नियोजन नीति पर हाईकोर्ट के आए फैसले को, छात्रों के हित में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। झारखंडी छात्रों के हित में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की है। यह एसएलपी हाईकोर्ट द्वारा नियोजन नीति को असंवैधानिक घोषित करने व अधिसूचित जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के आदेश के खिलाफ की गयी है। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पहले ही कई शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने  उन्हें अंतरिम राहत प्रदान कर दी है। लेकिन हेमंत सरकार का झारखंडी छात्रों के हित में लिया गया फैसला उन्हें भविष्य में और राहत प्रदान कर सकता है।

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