केन्द्रीय शिक्षा मंत्री

छात्रवृत्ति और रोजगार में हुए दो बड़े स्कैम से झारखंड पर जो कलंक लगा, हेमंत नहीं चाहते कि वह दोबारा हो।

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रांची। पिछले तीन दिनों में राज्य में दो बड़े बड़े स्कैम उजागर हुए है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में हुए इन दोनों की स्कैमों का सीधा संबंध राज्य के बच्चों को मिलने वाले छात्रवृत्ति और रोजगार से हैं। दोनों ही मामलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दे दिये हैं। हालांकि प्रदेश की तमाम विपक्ष पार्टियां हेमंत के इस निर्देश को बदले की राजनीति से जोड़ सकते हैं। लेकिन हेमंत सोरेन ने यह बयान देना कि जांच का केवल एक उदेश्य यहीं है कि भविष्य में जो भी नौकरी और छात्रवृत्ति राज्य के बच्चों को मिलने वाली हैं, उसमें दोबारा कभी भी अनियमितता न हो। ऐसे आदेश देकर उन्होंने यह भी साबित कर दिया है कि उनकी लालसा केवल सत्ता में रहकर सुख भोगने की नहीं है, बल्कि वे राज्य की जनता का पूरी तरह से विकास करना चाहते हैं। 

बदले की भावना से राजनीति करने में हेमंत नहीं रखते यकीन, घोटाला अगर हुआ हैं, तो पारदर्शी सरकार में जांच तो होनी चाहिए

यह तो सभी जानते हैं कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान केंद्रीय योजना के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि को बड़े ही सुनियोजित तरीके से चोरी करने का पर्दाफाश हुआ है। इस पर हेमंत सोरेन ने कहा था कि वह बदले की भावना से राजनीति करने में यकीन नहीं रखते। लेकिन जब दिल्ली की मीडिया में यह बात सामने आयी हैं, तो यह राज्य के लिए काफी शर्मनाक बात है। रघुवर सरकार के कार्यकाल में लाखों विद्यार्थियों के बैंक खाते में छात्रवृति राशि के डीबीटी ट्रांसफर में गोलमाल होना कोई नयी बात नहीं है। रघुवर राज में ऐसे कई घोटाले किए गए। धीरे-धीरे सारे घोटाले सामने आ रहे हैं। अगर घोटाला हुआ है तो पारदर्शी तरीके से इसकी जांच होगी ही। 

छात्रवृत्ति के नाम पर घोटाला पहली बार नहीं, 2018 में भी चतरा में आया था मामला

हेमंत ने कहा था कि झारखंड में गरीबी है। छात्रवृति की राशि से बच्चे पढ़ाई करते हैं। डाइरेक्ट बेनीफीट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत छात्रवृति देने का काम इसलिए शुरू किया गया कि किसी तरह का गोलमाल नहीं हो सके। अब इसमें भी हेराफेरी हो गई। बता दें कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में छात्रवृत्ति के नाम पर घोटाला कोई पहली बार नहीं हुआ है। दो वर्ष पूर्व चतरा में भी छात्रवृत्ति घोटाले का मामला सामने आया था। कल्याण विभाग से संबद्ध स्कूलों में प्रति विद्यालय 400 छात्रों के नाम पर पहले ही चेक काटकर बंदरबांट कर लिया गया था। तत्कालीन डीसी ने जब इस पर जांच करायी, तो पता चला कि प्रखंड कल्याण अधिकारी के खाते में 1.10 करोड़ और कुछ एनजीओ के खाते में 22 लाख और 1.89 करोड़ की राशि जमा कराई गई थी। कुल 9 करोड़ के इस घोटाले में शामिल तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी सहित कई के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था।

फर्जी ज्वाइन लेटर से भी झारखंड की छवि बिगड़ी

राज्य के माथे में कलंक लगाने के लिए भाजपा सरकार में आयोजित स्किल समिट भी कम पीछे नहीं है। विधायक प्रदीप यादव ने विधानसभा सत्र में एक घोटाले का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि वर्ष 2018-2019 में रघुवर सरकार ने स्किल समिट के दौरान 1.33 लाख युवाओं को नौकरियों की जो चिट्ठियां बांटी थीं, वह एक तरह से फर्जी से कम नहीं थी। युवाओं को राज्य के बाहर बहुत ही कम पैसे की सैलरी में काम के लिए भेजा गया। कई युवाओं को सिर्फ ऑफर लेटर ही दिया गया, ज्वॉइनिंग नहीं दी गयी। बाहर जाकर ऐसे युवा फंस भी गये थे और उन्होंने सरकार से मदद की गुहार भी लगायी थी। उन्होंने स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच की मांग की थी। जिसपर सीएम हेमंत ने सहमति दे दी हैं।

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