भाजपा के बाबूलाल मरांडी का ट्वीट भी ब्लैकमेल व धमकी का ही एक रूप

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp
बाबूलाल मरांडी का ट्वीट

2017-18 में 205 करोड़. 2018-19 में 169 करोड़. 2019-20 में 486 करोड़. के बंदरबांट जैसे सवालों की जवाबदेही भाजपा की, लेकिन उपचुनाव के दौर में बाबूलाल मरांडी का ट्वीट भी जवाब मांग रहे हैं हेमंत सत्ता से – यह भ्रम की राजनीति है.

सवाल कोरोना काल में रांची रेल मंडल का विशेष ट्रेनों को सामान्य ट्रेनों के रूप में चलाने का हो. और झारखंड की भाजपा के बाबूलाल मरांडी का ट्वीट वार जमशेदपुर की उस सड़क को लेकर छेड़े. जिसके अक्स में त्रासदी का खेल उसकी ही सरकार का उभरे. जहाँ उसके मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक की पूरी फेहरिस्त कटघरे में खड़े पाए जाये. जहाँ सवाल 2017-18 में 205 करोड़, 2018-19 में 169 करोड़, 2019-20 में 486 करोड़ के बंदरबांट की कहानी का हो. तो साफ़ तौर पर सवाल और जवाबदेही भी भाजपा के उसी डबल इंजन सत्ता के कार्यकाल के हिस्से को ही जाता है.    

चूँकि, बाबूलाल जी, जो आज खुद को भाजपा के सिपहसालार घोषित का सच लिए हुए हैं. कल जब वह जेवीएम के सुप्रीमों थे. तो उनका सवाल भी रघुवर सरकार से विपक्ष से इतर नहीं था. जाहिर है अब वे उसी भाजपा के अंग हैं. और सम्बंधित मामले में उन्हें पूरी कहानी ज्ञात हो चुकी होगी. तो ऐसे में पत्रवीर को मामले से पर्दा उठाना चाहिए. और चिर-परिचित अंदाज में सोशल मीडिया पर लाइव हो. ऐसे तमाम मामलों का जवाबदेही लेते हुए जनता के टाटा-रांची सड़क क्यों नहीं बनी?, सवालों का जवाब क्या देना नहीं चाहिए.   

केंद्रीय मंत्री सड़क, ब्रिज के लिए 675 करोड़ के बदले 5000 करोड़ देने को तैयार – बाबूलाल जी के शब्दों के आखिर क्या मायने हो सकते हैं?

बाबूलाल मरांडी ट्वीट कर कहते है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सड़क, ब्रिज के लिए 675 करोड़ के बदले 5000 करोड़ देने को तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार अपनी इच्छाशक्ति दिखाये. तो क्या बाबूलाल जी का मायने है कि केंद्र से अनुदान लेने के लिए, मौजूदा झारखंड सरकार केंद्र की पूंजीपति नीतियों के हामी भर दे. और झारखंडी जनता के भविष्य से गद्दारी कर ले. तो बाबूलाल जी में अब झारखंड की भविष्य के प्रति कोई जवाबदारी नहीं बची. और सीधे तौर पर खुद की विचारधारा को सांकेतिक तौर पर मान लेने का प्रलोभन वह हेमंत सत्ता को खुले तौर पर दे रहे हैं. क्या यह खुले तौर पर उपचुनाव के दौर में जनता के बीच भ्रम जैसी स्थिति उत्पन्न करना भर नहीं है.

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.